संत आशाराम बापू, संत रामपाल और बाबा गुरमीत राम रहीम के भक्तों को भी ऐसा ही लगता था।
जब संविधान की चक्की चलती है तो कई बार बहुत बारीक पीस देती है।
संत हैं तो संतों वाली भाषा बोलें। सब सम्मान करेंगे। लेकिन किसी जाति का अपमान करेंगे, आरक्षण के खिलाफ बयानबाज़ी करेंगे तो नहीं चलेगा।
मैं राजीव से बात करना चाहता हूँ..
रात के 3 बजे, मालदीव के राष्ट्रपति ने इसरार की। थके हुए, मगर बेहद कृतज्ञ गयूम का सम्पर्क, सेटेलाइट फोन से राजीव से कराया गया।
राजीव उस रात सोए नही थे। उन्हें इस कॉल का इंतजार था।
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दिल्ली में राजीव से गयूम की मुलाकात तय थी, मगर अपरिहार्य कारणों से उनका दौरा स्थगित हो गया था। इसकी खबर विरोधियों को नही थी।
श्रीलंका में बैठे गयूम के विरोधी अरबपति ने सरकार पलटने की योजना बना रखी थी। लंकाई चीतों से डील सेट थी। गयूम दिल्ली में होते, माले में हमला होता।
भाड़े के लड़ाके, हाईजैक किये शिप से माले उतरे। बहुत से इसके पहले ही, आम वेशभूषा में माले पहुँच गए थे। 4 नवंबर 1988 की रात हमला हुआ।
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छोटा सा शहर- आप एयरपोर्ट, टेलीफोन एक्सचेंज, सेक्रेट्रीटीएट जैसी आधा दर्जन बिल्डिंग कब्जा कर लें, तो सत्ता आपकी हुई। भाड़े के विद्रोही कब्जा कर चुके थे।
लेकिन राष्ट्रपति को भी तो हिरासत में लेना होगा। वे अपने पैलेस में नही थे। हमले की खबर से वे कहीं छिप गए।
और वहीं से अमेरिका से मदद मांगी। मगर डिएगो गार्सिया से मदद आने में कुछ दिन लगते। श्रीलंका और पाकिस्तान से मदद मांगी।
पाकिस्तान ने क्षमता न होने का बहाना किया, श्रीलंका चीतों से उलझना नही चाहता था। तो ब्रिटेन से मदद मांगी। थैचर ने सलाह दी- भारत से मदद मांगो।
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राजीव कलकत्ता में थे, जब खबर आई। रक्षा और विदेश मंत्रालय की संयुक्त बैठक रखी गयी।राजीव सीधे एयरपोर्ट से वहीं पहुचें।
आर्मी, नेवी, एयरफोर्स का एक संयुक्त ऑपरेशन तय किया गया। नाम - ऑपरेशन कैक्टस
कई योजना बनी, बिगड़ी। पैराट्रूपर्स उतारने की बात सोची गयी, मगर माले इतना छोटा की ज्यादातर सैनिक, समुद्र में गिर जाते।
फिर एक डेयरिंग योजना बनी।
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शाम होते होते आगरा से हैवी एयरक्राफ्ट, फौजी, साजोसामान, जीपें लेकर प्लेन माले चला। और सीधे हुलहले एयरपोर्ट पर उतर गया। घुप्प अंधेरे में ये लैंडिंग जानलेवा हो जलती थी।
तुरन्त ही फौजी और जीपें बिखर गए। एयरपोर्ट थोड़ी बहुत सँघर्ष के बाद कब्जे में आ गया। इतने में और विमान उतर गए।
कुछ ही घण्टो में माले में विद्रोहियों की लाशें बिखरी पड़ी थी। खेल खत्म हो गया था।
सेफ हाउस में छिपे गयूम से माले के भारतीय राजदूत मिले। बताया कि विद्रोह कुचल दिया गया है। वे सेफ हैं।
राजीव को मदद की गुहार लगाए महज सोलह घण्टे हुए थे। त्वरित मदद से अभिभूत, थके हुए, मगर बेहद कृतज्ञ गयूम ने राजदूत से कहा - मैं प्रधानमंत्री राजीव से बात करना चाहता हूँ..
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इसके बाद, मालदीव एक स्ट्रेटजिक एसेट के रूप में भारत का ठिकाना बना। हिन्द महासागर में भारत को एक मजबूत ताकत बनाने में, वहां क्रिएट किया गया फौजी ठिकाना, हमे थाह देता रहा। तीन दशक तक ..
जब तक कि घर मे घुसकर मारने की बकैती नेशनल टीवी पर करने वाले,
औरो के बाथरूम में ताक झांक करने वाले..
दूसरो के स्वतंत्रता संग्राम में खुद को सेनानी बताने के शौकीन,
पड़ोसियों नाकाबंदी कर क्षुद्र ब्लैकमेलिंग करने वाले मूर्ख को, हमने राजीव के जूतों में फिट न कर दिया।
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दस साल पहले जिस व्यक्ति के राज्याभिषेक में समारोह में सभी सार्क देशों के नेता, लाइन लगाकर हाथ मिलाने आये थे..
तब मेरे,आपके, हिंदुस्तान की जनता के निर्णय से एक नई आशा भारत में ही नही, पूरे उपमहाद्वीप में फैली थी।
सबको लगा, कुछ बड़ा होने वाला है..
दस बरस बाद, सिर्फ निराशा है। उम्मीदों का बादशाह, बौना जोकर साबित हुआ है।
पदानुकूल बड़प्पन त्यागकर, क्षुद्र हरकतों से, छिछोरे समर्थकों की तालियां हासिल तो हुई। मगर पद , देश का वकार, इसके स्ट्रेटेजिक इंटरेस्ट, इसकी गरिमा का जनाजा निकल गया है।
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हाल यह है कि पाकिस्तान ही नही नेपाल, श्रीलंका, भूटान भी चीन को गोद मे जा बैठे है। ताजा ताजा मालदीव उसमे मिल चुका है। माले से भारतीय बेस खाली करवाया जा चुका है।
और हमारा छबीला राजा, लक्षद्वीप में बैठकर मालदीव को चिढा रहा है। उसके छल्ले लक्षद्वीप को मालदीव से बेहतर टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने की देशभक्ति बेच रहे हैं।
हद्द है..
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इस दौर में राजीव की रह रह कर याद आती है। वो गरिमा, वो गम्भीरता याद आती है।
काश यह शख्स अगर 10 साल जिया होता। तब दुनिया की हर बड़ी ताकत दिल्ली में फोन लगाकर कहती..
- मैं राजीव से बात करना चाहता हूँ..
❤️
#12thFail Movie का ये dialogue आज कई #राजनीतिक पार्टियों पर सटीक बैठता है
यही अनपढ़ लोग इनका #Vote_Bank है जो धर्म और जाति के नाम पर वोट देते आए
Dr. Ambedkar ने 1942 में कहा था
‘Educate Agitate and Organise’
अब अगर जनता पढ़ लिख गई तो इन नेताओं के लिए समस्या खड़ी हो जाएगी
इन अपराधियों ने 1 नवंबर को शराब पीकर बीएचयू में जाकर बलात्कार किया!
छात्रों का विरोध देखकर यह लोग मध्य प्रदेश में चल रहे चुनाव प्रचार में चले गए क्योंकि पार्टी के पदाधिकारी थे,
पुलिस ने तीन दिन बाद ही सीसीटीवी से और पीड़िता के बयान पर इनकी पहचान कर ली थी/
फिर भी गिरफ्तारी नहीं हुई इसका जवाब तो यूपी पुलिस के अधिकारी देंगे हैं/
बस इतना समझ लीजिए गिरफ्तारी अगर उसे समय हुई होती तो विधानसभा चुनाव में इसका असर पड़ता इसलिए गिरफ्तारी होगी गई थी/ #IITBHU
आज मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी भेंट कर उनसे RAS मुख्य परीक्षा स्थगित करने का अनुरोध किया। अभ्यर्थी तैयारी के लिए पर्याप्त समय देने की मांग कर रहे हैं, जो तर्कसंगत है। इस अवसर मैंने ERCP को जल्द धरातल पर उतारने की भी मांग की ताकि 12 जिलों के लोगों को राहत मिल सके।