ایک ایسا بے باک مسلمان جو اپنی بات کہنے سے نہیں گھبراتا۔ #SharjeelImam کی بات نے نظام کے مختلف سیاسی حلقوں—لبرل، رائٹ ونگ، لیفٹ اور سینٹرسٹ—سب کو بے چین کیا ہے۔
Is this the first step after the Makkah Pact? Changing the curriculum does not change history. Palestine’s name may be removed from textbooks, but it cannot be erased from history.
It's better to die than live in such an environment, Rt please 🙏
says the Imam of the Tughlakabad mosque in Delhi...
This has never happened before.
During the Ram Navami procession in Tughlakabad, Delhi, terrOrist thugs climbed onto the roof of the mosque, waved a saffron flag on the mosque's minaret,
played DJ music and danced in front of the mosque, They even carried we@pons
In Mahbubnagar, a Muslim youth named Mohammad Akram was allegedly dragged out of his home by a large mob. According to reports, the mob took him to a temple, abused him with communal slurs, and forced him to wash a photo of T Raja Singh with milk and apologize. The incident was reportedly linked to a cartoon he had posted featuring the MLA.
जो बातें सत्तर वर्षों में कहने वाले पैदा नहीं हुए थे, आज वो बातें कही जा रही हैं कि बीस करोड़ मुसलमानों की “घर वापसी” कराई जाएगी। ऐसा लगता है मानो सिर्फ उन्हीं लोगों ने अपनी माँ का दूध पिया है, बाकी और किसी ने नहीं। जबकि सच्चाई यह है कि हर वह आवाज़ जो देश को तबाही, बर्बादी, बदअमनी और आपसी दुश्मनी की ओर ले जाए, वह देश के प्रति वफादारी की आवाज नहीं हो सकती।
आज देश के भीतर नफ़रत की आग भड़काई जा रही है, हत्या-हिंसा का माहौल बना हुआ है, दिनदहाड़े लिंचिंग की घटनाएँ हो रही हैं, गाय के नाम पर बेगुनाहों को मौत के घाट उतारा जा रहा है, और सरकार खामोशी बनाये हुए है। इसके बावजूद कुछ लोग यह ऐलान करते फिर रहे हैं कि इस देश में वही रहेगा जो उनके विचारधारा पर चलेगा। यह सोच न केवल भारतीय संविधान का खुला उल्लंघन है बल्कि देश की अखंडता, एकता और शांति के लिए भी बेहद खतरनाक है।
जमीयत उलमा-ए-हिंद शुरू से ही ऐसी सांप्रदायिक और नफ़रत फैलाने वाली सोच की कड़ी विरोधी रही है और जब तक जिंदा रहेगी, इसका विरोध करती रहेगी। मुसलमान जिंदा हैं और अपने धर्म पर जिंदा रहेंगे; मुसलमानों को मिटाने वाले खुद मिट गए, मगर इस्लाम जिंदा है और कयामत तक जिंदा रहेगा। और इस देश में शांति, भाईचारा और आपसी सद्भाव केवल धर्मनिरपेक्ष संविधान की छाया में ही संभव है।
याद रखिए धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार की हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती। सभी धर्म मानवता, सहिष्णुता, प्रेम और एकता का संदेश देते हैं, इसलिए जो लोग धर्म का उपयोग नफ़रत और हिंसा फैलाने के लिए करते हैं, वे अपने धर्म के सच्चे अनुयायी नहीं हो सकते। हमें हर स्तर पर ऐसे लोगों की निंदा और विरोध करना चाहिए।
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#ArshadMadani | #GharWapasi | #घर_वापसी
@ArshadMadani007 اپ لوگ کے کہنے پر پچھلے 80 سال سے سیکولرزم کا جنازہ ہمارے کندھوں پر ہے اب اپ سنویدھان بھی ہمارے کندھوں پر ڈال رہے ہو یہ ٹھیک نہیں ہے اکیلے ہم ٹھیکے دار ہیں کیا ?
Aap loog Ke Kehne per pichle 80 Saal secularism ka janaza hamare kandhe per hai ab aap constitution bhi hamare kandhun per dalrahe ho… ye theek nhi hum Akele thekedaar hain kya ?
महात्मा गांधी की हत्या के बाद अगर सांप्रदायिकता का सिर सख़्ती से कुचल दिया जाता तो देश तबाह होने से बच जाता
आज़ादी के बाद कांग्रेस ने अपने शासन काल में धर्म के आधार पर नफ़रत की राजनीति पर जो लचकदार नीति अपानाई उसने देश और संविधान दोनों को बड़ा नुक़सान पहुंचाया। आज जिस तरह संविधान और लोकतांत्रिक चरित्रों को खुले तौर पर मिटाया जा रहा है इसकी कल्पना आज़ादी के हमारे पूर्वजों ने कभी नहीं क्या होगा, जिन रेखाओं पर आज़ाद भारत के संविधान की नींव रखी गई अगर इन्ही रेखाओं पर संविधान को भी पूरी ईमानदारी के साथ लागू कर दिया जाता तो आज हमें यह दिन न देखने पड़ते।
ऐतिहासिक रूप से यह एक दुखद सत्य है कि कांग्रेस के नेताओं ने न जाने किस भय से पहले दिन से धर्म के आधार पर नफ़रत की राजनीति के विरोध में एक लचकदार नीति अपनाई, सांप्रदायिक शक्तियों के साथ नर्मी बरती गई, संविधान के अनुसार उनके खिलाफ कड़ी क़ानूनी कार्रवाई से बचा गया जिसके नतीजे में सांप्रदायिक शक्तियों को खूब फलने फूलने का अवसर मिला।
महात्मा गांधी की हत्या के पीछे सांप्रदायिक शक्तियों का हाथ था, अगर उसी समय सांप्रदायिकता के सिर को कुचल दिया जाता तो देश को तबाही से बचाया जा सकता था, विभाजन के बाद देश भर में जब मुस्लिम विरोधी दंगे शुरू हुए तो उन्हें रोकने के लिए महात्मा गांधी ने उपवास रखा, सांप्रदायिक शक्तियां यहां तक कि कांग्रेस में मौजूद कुछ बड़े नेताओं को यह बात अच्छी नहीं लगी, वह उनके खिलाफ हो गए, अंततः उन्हें क़त्ल करदिया गया। हमारी नज़र में महात्मा गांधी जैसे महान व्यक्ति की हत्या देश की धर्मनिरपेक्षता की हत्या थी मगर अफसोस उस समय कांग्रेसी नेतृत्व को जो करना चाहिए था वह उसने नहीं किया।
जमीअत उलमा-ए-हिंद का नेतृत्व लगातार कांग्रेसी नेतृत्व से यह मांग कर रही थी कि सांप्रदायिकता के इस जुनून को रोकिए मगर अफसोस इस मांग पर गंभीरता से घ्यान नहीं दिया गया जिससे सांप्रदायिकों को बाढ़ावा मिल गया। आज की पीढ़ी उस इतिहास से भी अनभिज्ञ है कि आज़ादी से पहले ही जमीअत उलमा-ए-हिंद के नेतृत्व ने कांग्रेसी नेताओं से एक लिखित आश्वासन ले लिया था कि आज़ादी के बाद देश का संविधान सैक्यूलर होगा, जिसमें सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों को पूर्ण धार्मिक आज़ादी होगी, लेकिन आज़ादी के बाद जब देश विभाजित हुआ तो कांग्रेसी नेताओं का भी एक बड़ा वर्ग उन उन्य नेताओं की इस मांग में शरीक हो गया कि अब जबकि मुसलमानों के लिए धर्म के नाम पर एक नया देश बन चुका है, हमारे देश का संविधान सैक्यूलर नहीं होना चाहीए.
इस अवसर पर जमीअत उलमा-ए-हिंद के नेतृत्व कांग्रेस के नेताओं का हाथ पकड़ कर बैठ गया और उनसे कहा कि अगर देश का विभाजन हुआ है तो इसके मसौदा पर हमने नहीं आपने हस्ताक्षर किए हैं, इस लिए आप अपना वादा पूरा करें। इस के बाद एक सैक्यूलर संविधान तैयार हुआ लेकिन सांप्रदायिकता की जड़ें अंदर ही अंदर गहिरी होती गईं। जमीअत उलमा-ए-हिंद के लगातार कहने के बाद भी इस पर नकेल नहीं कसी गई जबकि उस समय केंद्र और सभी राज्यों में कांग्रेस की ही सरकार थी, अगर वह चाहती तो उसके खिलाफ कड़ा कानून बन सकता था, मगर उसने जो लचकदार नीति अपनाई थी उसके नतीजे में सांप्रदायिक ताकतें और शक्तिशाली होती गईं।
अगर कांग्रेस ने 77 साल पहले सांप्रदायिकता के खिलाफ यही कड़ा रुख अपनाया होता, तो वह सत्ता से बाहर नहीं होती और देश बर्बादी के कगार पर नहीं पहुंचता।
#SaveConstitution #AssassinationofMahatmaGandhi
#SaveDemocracy
#Freedom_of_India
#ArshadMadani
@FiltrationTime Buhat purani adat hai bewaqoof banane ki .ab magarmach Ke anso bahare bail nai dere bolkar.
Ghalti hamari hai jo hum buhat jald bhool jade
शरजील ईमाम भाई के केस के सिलसिले में दिल्ली में था, तब उसी दौरान @salaamtvnews से कुछ जानने वालों का कॉल आया और उन्होंने कहा की वो कुछ सवालात करना चाहते हैं, तो अब वो सवाल और उनके जवाब आपके सामने पेश कर रहा हूं।
#SharjeelImam
میں جتنا پڑھا اور سنا ہوں میری نظر میں قائد ملت نواب بہادریار جنگ رحمت اللہ علیہ کوموجودہ ہندوستان کے مسلمانوں کا سب سے بڑا قائد مانتا ہوں اللہ قائد ملت کے درجات کو بلند کرے اللہ رب العزت ہمیں قائد ملت کے بتائے ہوئے راستوں پر چلنے کی توفیق عطا فرمائے ہمیں امین
میر محبوب علی خلیل