हिम्मत का सागर लांघो तो, लहर-लहर जयकारा होगा,
दिल टूटे या एटम टूटे, दुनिया में उजियारा होगा।।
- @DrKumarVishwas
पिछले दिनों से कई बार ये पंक्ति पढ़ी, सुनी... हमारे आपके बच्चों को हम ये विश्वास क्यों नहीं दे पा रहे 🥲🥹🥹
सोचिएगा जरूर
#Kota#IITBombay
@RamaKRoy ये गीत 1955 में आई फिल्म "वचन" का है...
लेकिन ये गज़ब की बहस चल रही है आजकल
गायक (Singer): आशा भोसलेगीतकार (Lyricist): प्रेम धवनसंगीतकार (Music Director): रवि
हद्द है मतलब..... कुछ भी 👎👹
@RamaKRoy@aajtak@OfficeOfDKV निंदा तो खैर अभी तक किसी की नहीं की, आज तक वाले तो अपना काम कर रहे, रही बात आपकी... तो आपने खुद ही निंदनीय काम चुन रखा है श्रीमान। निहायत ही संभ्रांत वर्ग से होते हुए भी इतनी नकारात्मकता!!! जाने कैसे संभालते होंगे आप अपनी सोच को👎👎
@theDevSh@Observer4s@DrKumarVishwas आपके आत्मबकवास , मतलब आत्मविश्वास से तो लगता है कि आपने "सपरिवार" और "व्यावहारिक" शोध का प्रयास किया है😆🤣 , वैसे व्यक्तिगत द्वेषभाव से पीड़ित हैं आप 👹
@singh_ap_@Vishwaasam@poonams95245250 सो, सोशल मीडिया प्रपंचियों की कठपुतली न बनिये, मूर्खता की उपाधि की तरफ बढ़ते कदम रोकिये। वरना कुएं बहुत हैं सोशल मीडिया पर, लगाइये छलांग 😅😆
@singh_ap_@Vishwaasam@poonams95245250 सनातन पढ़िये बहिन जी, श्रीमद्भागवत पुराण के सातवें स्कंध के अनुसार भक्त प्रह्लाद भौतिक सांसारिक ज्ञान और छल-कपट के मामले में बिल्कुल मासूम और निश्छल थे, किंतु आध्यात्मिक और ईश्वरीय ज्ञान के मामले में वे परम ज्ञानी थे। उनमें न तो द्वेष था, न लोभ और न ही ईर्ष्या।
@singh_ap_@Vishwaasam@poonams95245250@singh_ap_ जी, फिलहाल तो आपको हिंदी सीखने की आवश्यकता है, जिनके बारे में लिख रही हैं उनका नाम तो सही से लिखना सीख लीजिए। वर्तनी सीखने की जरूरत है। आपके मनोज मुंतशिर भैया जी न सिखा पाए हों तो बताएं, इंतजाम किए जायेंगे 😅😆
वैसे आपको शायद अपने बिग बी का इतिहास ठीक से नहीं पता🤭
ये वही लोग हैं जो शब्दों पर जाकर जड़ हो जाते हैं।
क्या है आचार्य शंकर की परिकल्पना, से ज्यादा महत्वपूर्ण है- क्यों है आचार्य शंकर की परिकल्पना।
पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण को एक सूत्र में पिरोने के लिए है यह परिकल्पना। और श्रीराम को सर्वस्व मान लेने की इच्छा से बड़ी भी कोई इच्छा थी माता सीता की?
राय साहब! व्यक्तिगत कुंठाओं को कम से कम उस प्रयोग से तो मत जोड़िए जो वामपथ पर जाती पूरी एक पीढ़ी को रामपथ पर लाने की कोशिश में है।
और हां! रस, छंद, अलंकार, बिंब, प्रतीक, ध्वनि, व्यंजना, वक्रोक्ति.... ये सब छोड़िए, आप बस ये समझिए कि कैसे भी एक व्यक्ति अपने निजी श्रम, समर्पण और इच्छाशक्ति से आपके घरों के बच्चों को हिंदी की ओर लौटा लाया।
बारिश का मौसम है, 103 डिग्री पर पानी गरम करके सीधे अंदर लीजिए, कलेजे को ठंडक मिलेगी।
@DrKumarVishwas जिस कथा को श्रवण करने स्वयं माँ भवानी सूक्ष्म उपस्थिति में प्रथम श्रोता बन प्रकट हुई हों, उसकी विराट भव्यता का पार कहां पाया जा सकता है🚩🕉️
भक्ति के भाव-संगीत तथा रोशनियों के नृत्य का अद्भुत वर्णन⭐👏🙏
झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर मैंने यह पोस्ट की। मैं मेरे गुरुदेव डॉ. कुमार विश्वास जी का प्रशंसक हूं, और उनके विचारों से प्रेरित हूं। मैंने उनकी तस्वीर को ही अपनी DP बना रखा है और अपनी प्रोफाइल के बायो में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि मैं उनका प्रशंसक हूं। कोई सामान्य ट्विटर चलाने वाला व्यक्ति भी समझ सकता है कि ये विचार मेरे निजी हैं। हैरानी की बात है कि कुछ आत्ममुग्ध खबरियों ने बिना तथ्यों की जांच किए, मेरी राय को मेरे गुरुदेव की राय समझ लिया।
ऐसी भी क्या जल्दबाजी रहती है खबरियों! कम से कम हैंडल तो चेक कर लेते।
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