@NewsArenaIndia@KanganaTeam बीजेपी नेता " कंगना " का बैग देखिए..
फ्रांस की कंपनी का यह बैग सिर्फ 5,19,999 रुपए का है
इस बैग को बनाने के लिए "गाय के चमड़े का इस्तेमाल होता है जिसे हंटर लैदर कहा जाता है
अब आप ही सोचिए
भाजपा की सांसद "गाय के चमड़े" से बने बैग को लेकर "लोकतंत्र के मंदिर" में जाती है
@Javedakhtarjadu जावेद अख्तर जैसे लोगों को गाज़ा के बच्चों की बहुत फिक्र थी , एपस्टीन फाइल में जो कुछ दरिंदगी बच्चों के साथ की गई है और हैवानों के साथ उठने बैठने में इनके उस्ताद रिचर्ड डॉकिंग का भी नाम है और जावेद अख्तर को रिचर्ड डॉकिन्स अवॉर्ड भी मिल चुका है लेकिन अभी तक उसपर
जावेद अख्तर जैसे लोगों को गाज़ा के बच्चों की बहुत फिक्र थी , एपस्टीन फाइल में जो कुछ दरिंदगी बच्चों के साथ की गई है और हैवानों के साथ उठने बैठने में इनके उस्ताद रिचर्ड डॉकिंग का भी नाम है (और जावेद अख्तर को रिचर्ड डॉकिन्स अवॉर्ड भी मिल चुका है) लेकिन अभी तक उसपर इनकी आवाज़ नहीं
आज का युवा हाल ही में रिलीज़ हुई धुरंधर जैसी फिल्मों जो पाकिस्तान के एक डकैत की कहानी पर आधारित है उसके गानों, रील्स और रीमिक्स पर बड़े आराम से झूमता नजर आता है हम दूसरों के अपराधों में मनोरंजन ढूँढ लेते हैं, लेकिन अपने आसपास हो रही सबसे बड़ी लूट पर आँखें मूँद लेते हैं
किस्मत को कोसते हैं जब महँगाई बढ़ती है, तो हालात को दोष देते हैं लेकिन उन डकैतों से कभी सवाल नहीं पूछते, जो इस लूट के असली ज़िम्मेदार हैं शायद इसलिए, क्योंकि सवाल पूछने से ज़्यादा आसान ताली बजाना है आज ज़रूरत है कि हम असली डकैतों को पहचानें जो आपके सपनों, आपकी मेहनत और
वे महँगाई के ज़रिये आपकी जेब काट रहे हैं सबसे खतरनाक बात यह है कि ये डकैत रात के अँधेरे में नहीं आते ये दिन-दहाड़े आते हैं तालियों के बीच, नारों के साथ और हम? हम अगली फिल्म, अगली रील और अगले गाने में इतने उलझ जाते हैं कि असली लूट हमें दिखती ही नहीं जब नौकरी नहीं मिलती, तो हम