योगीजी मुझे बचाइए, मैं एक ब्राह्मण हूँ हमारे घर की
महिलाएँ यहाँ से बाहर भी नहीं निकलती
यहाँ मुसलमान लोग हमको घर से बाहर नहीं निकलने
देते हम कैसे जिये.? ग्राम प्रधान हमको जीने नहीं दे
रहे ग्राम प्रधान के सहयोगी मुसलमान लोग है
सनातनियों ये वीडियो योगीजी तक पहुंचाओ 🙏
बहनों को मेरा दिल से सलूट ✊
ठोक डाला.. एक हबसी मुहम्मद को 🔥
मोहम्मद जाकिर ने 6 साल पहले कशिश को फंसाया और उससे एग्रीमेंट करके उसके साथ
रहने लगा...
फिर उसकी बड़ी बहन किरन जो कि विधवा थी
उसको कशिश को उकसाकर अपने पास बुलवा लिया और किरन की 7 साल की बच्ची पर हबसी निगाह डाली..
तो दोनों बहनों किरन और कशिश ने
मिलकर मुहम्मद को हूरों के पास पंहुचा दिया...
इस तरह एक और मासूम को नोंचने की नीयत रखने वाले मुहम्मद का खुशनुमा अंत हुआ...
मामला ग़ाज़ियाबाद UP का ✍️
आखिर इन लोगों के ऊपर कार्रवाई कब होगी @Uppolice and @DCP_Noida एक पत्रकार महिल को घेर कर जिहादी मानसिकता के लोग छेड़खानी और शासन को चैलेंज दे रहे हैं।
आज ये योगी जी के लिए ऐसा बोल रहे कल अखिलेश यादव जी के लिए बोलेंगे इसलिए इनका इलाज जरूरी है।
@myogiadityanath आप के सरकार में बेटियां सुरक्षित नहीं है
Power Of Social Media:-
गोपाल शर्मा की मौत के 5 दिन तक चुप्पी थी। नेशनल मीडिया चुप, नेता चुप, सब मौन।
फिर सोशल मीडिया से आवाज उठी। मीडिया मृतक परिवार के ऊपर हुए अत्याचार को दिखाने पर मजबूर हुआ। आज तीन आरोपी हाफ एनकाउंटर के बाद अरेस्ट। बुलडोजर की कार्रवाई।
न्याय के लिए बोला करिए। सच के लिए बोलने वालों की दुनिया सुनती है। मृतक परिवार को न्याय मिलना ही चाहिए।
@ndskaushal नफरत से किसी का भला नहीं हुआ है असली सोच है वो उस मानसिकता की जो इतना जघन्य अपराध,क्रूरता और निर्ममता से हत्या करता है वो इंसान नहीं नर-भक्षी है ऐसे नर-भक्षी तो धरती पर बोझ है इनको तो सीधे फांसी की सजा मिलनी चाहिए।
@ndskaushal इसको क्या शेयर, रिट्वीट, किया जाए. @narendramodi हिसाब बराबर करने के लिए अत्याचारी SC ST act ले आये, इस बच्चे की हत्त्या से @BJP4UP@BJP4India को वोट मिलेगा, वोट.
मीडिया managed है, @myogiadityanath Ji भी चुप है, पुल्स भी चुप है, अत्याचारी मिलेंगे नही और बुल्डोजर भी नही.
जे भीम.
ब्राह्मण बच्चे की आंख निकाली गई, गुप्तांग काटा गया !
भीमवादी जश्न मना रहे ! मीडिया की No Coverage.
-दिलीप पाण्डेय
यूपी में एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी है । 21 मई को बच्चा गायब हुआ और 23 मई को लाश मिली । खबरगांव के यूट्यूूब चैनल ने पीड़ित परिवार से बात की तो पता ये लगा कि बच्चे के नाखूनों में कील ठोंकी हुई थी । आंखों को निकाला गया । गुप्तांग काटा गया । तेजाब फेंका गया और गलत काम करके तड़पा कर मारा गया ।
याद कीजिए हाथरस केस, जिसमें दलित बच्ची का केस था । फर्जी तरीके से ठाकुरों को फंसाया गया, बाद में सारे लोग छूट गए । जो एक व्यक्ति फंसा हुआ है उसके बारे में गांव में क्या चर्चाएं रहीं ये कोई आज भी जाकर पूछ सकता है, पूरा मामला असल में क्या है समझ में आ जाएगा । हाथरस केस में भीम आर्मी ने प्रोपागेंडा किया और पूरा नोएडा के फिल्म सिटी का मीडिया वहां पहुंचकर कर अखंड कवरेज करने लगा जबकि यहां क्योंकि ब्राह्मण बच्चा है तो सबका जमीर ठंडा पड़ गया इसलिए क्योंकि शायद सुनियोजित रूप से अंडेकरवाद और पेरियारवाद को देश में बढ़ाया जा रहा है जिसके मूल में ही ब्राह्मण विरोध है ।
मतलब ब्राह्मण लड़की रुचि तिवारी की मॉब लिंचिंग की कोशिश हो, यूजीसी लाया जाए, ब्राह्मण बच्चे की आंख निकाल ली जाए लेकिन मीडिया को कुछ नहीं कहना है, जबकि तमाम मीडिया न्यूज चैनलों में सभी अहम पदों पर अधिकांश सामान्य वर्ग के लोग ही काबिज हैं उसमें भी ब्राह्मण ज्यादा हैं ।
मैंने एक फोटो भी अपलोड किया है । सामान्य वर्ग के अधिकारों की मांग उठाने वाले एक ट्विटर चैनल पर जब इस बच्चे के लिए मांग उठाई गई तो एक भीमवादी ने उस मृतक बच्चे को ही मां बहन की गाली देते हुए लिखा है कि मर गया अच्छा हुआ ।
आप खुद सोच सकते हैं कि फुलेवाद के नाम पर देश में किस तरह ब्राह्मण विरोधी घृणा फैलाई जा रही है और इसका दुष्परिणाम किस तरह पूरे देश में लगातार सामने आ रहा है ।
-दिलीप पाण्डेय
शेयर, फॉलो, रीट्वीट,
1984 : सुनील दत्त पहली बार सांसद बने। कहा जाता है कि उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठियों को मुंबई में बसाया तथा अपने लोकसभा क्षेत्र में उन्हें स्थापित किया। धीरे-धीरे पूरा बेहरामपाड़ा बांग्लादेशियों से भर गया। मातोश्री से लगभग 500 मीटर की दूरी पर यह बस्ती विकसित हुई, किन्तु उस समय किसी प्रकार का प्रतिरोध नहीं हुआ। उस काल में Rajiv Gandhi प्रधानमंत्री थे और आरोप लगाए जाते हैं कि यह सब उनकी प्रत्यक्ष देखरेख में हुआ।
उल्टा, बीएमसी द्वारा वहाँ विभिन्न सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं। उस समय देश, राज्य और मुंबई में सत्ता किसकी थी तथा मुंबई पर प्रभाव किसका था, यह सभी जानते हैं।
12 मार्च 1993 : मुंबई में 12 बम विस्फोट हुए।
19 अप्रैल 1993 : उस प्रकरण में Sanjay Dutt को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से AK-56 बरामद होने की बात सामने आई। टाडा कानून के अंतर्गत गिरफ्तारी होने के कारण जमानत प्राप्त करना अत्यंत कठिन माना जा रहा था।
24-25 अप्रैल 1993 : Sunil Dutt ने Bal Thackeray से भेंट की। कहा जाता है कि उन्होंने संजय दत्त को जमानत दिलाने हेतु सहयोग का अनुरोध किया।
5 मई 1993 : संजय दत्त को जमानत मिली। जमानत पर बाहर आने के बाद सुनील दत्त उन्हें मातोश्री ले गए। इसके बाद यह भी कहा गया कि सहयोग के बदले सुनील दत्त को चुनाव न लड़ने की सलाह दी गई।
16 मई 1996 : सुनील दत्त ने चुनाव नहीं लड़ा तथा अप्रत्यक्ष रूप से शिवसेना प्रत्याशी का समर्थन किया। परिणामस्वरूप मधुकर सरपोतदार सांसद बने।
जब तक बीएमसी ठाकरे परिवार के प्रभाव में रही, तब तक इन घुसपैठियों की तीसरी पीढ़ी भी मतदाता बन गई। केवल पानी और सुविधाएँ ही नहीं, बल्कि आधार सहित अनेक सरकारी दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए। परिणामस्वरूप वे विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थी बन गए।
मातोश्री-1 के बाद मातोश्री-2 भी बनी, जो बेहरामपाड़ा से लगभग 300 मीटर की दूरी पर स्थित है, किन्तु तब भी कोई बड़ी कार्यवाही नहीं हुई।
यह कथित और अघोषित गठबंधन आगे भी चलता रहा।
15 जनवरी 2026 : बीएमसी से मुंबईकरों ने शिवसेना को सत्ता से बाहर कर दिया।
आज परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। न राज्य सरकार में उद्धव ठाकरे की शिवसेना है, न कांग्रेस का प्रभाव वैसा है और न ही बीएमसी में ठाकरे परिवार का नियंत्रण है। ऐसा कहा जा रहा है कि यदि राज्य सरकार या बीएमसी में पूर्व जैसी राजनीतिक स्थिति होती, तो बेहरामपाड़ा में वर्तमान कार्यवाही संभव नहीं होती।
समर्थकों के अनुसार आज रेलवे (केंद्र सरकार), पुलिस (राज्य सरकार) और बीएमसी — तीनों स्तरों पर भाजपा समर्थित “ट्रिपल इंजन” व्यवस्था होने के कारण बेहरामपाड़ा में कार्रवाई संभव हो रही है।
ईवीएम पर उचित बटन दबाने वाले मुंबईकरों को धन्यवाद एवं अभिनंदन।
वेल डन बीजेपी! 🌷
जय श्रीराम! 🚩
@vkjatav84@Shubhamshuklamp इसको दो उसको दो के चक्कर में फंसाकर ही सरकार वोट बैंक बनाती है।
इसको दो उसको दो की बात ही नहीं होनी चाहिए।
शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय सबके लिए मुफ्त और समान हो, और इसके अलावा किसी को कुछ भी मुफ्त नहीं मिले।
हरामखोरी किसी को नहीं और बुनियादी व्यवस्था सबको।
🚨 रिपोस्ट रुकना नहीं चाहिए🖐
सरोज त्यागी (निवासी: मोहरा, देवरिया, तहसील बरहज) द्वारा प्रभु श्री राम के चरित्र पर अत्यंत अभद्र, घृणित और अपमानजनक टिप्पणी की गई है।
@DeoriaPolice ~जल्द से जल्द कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करें।
~ @AdgGkr@diggorakhpur@Uppolice@Rajeevkrishna69
हिंदू औरतों को
मुसलमानों ने मार मार के भूत बना दिया...
कपड़े फाड़े.. दातों से काटा 🚨
पुलिस बोली आप थाने आ जाओ, रिक्से से
जी हाँ देश की राजधानी दिल्ली में सुल्तानपुरी मस्जिद के पास जिहादियों ने हिंदू औरतों को
ऐसे पीटा जैसे घाट पर धोबी कपड़े पीट रहा हो
मौके पे हज़ारों हिंदू थे लेकिन
किसी ने बीच में आने की किल्लत नहीं उठाई...
महिलाओं को दौड़ा दौड़ा के पीटा ✍️
इस हरामखोर Dainik Bhaskar को ब्राह्मणों को बदनाम करने वाली इस मनगढ़ंत कहानी को फैलाने के लिए अदालत में घसीटा जाना चाहिए।
यह नंगेली की कहानी मनगढ़ंत है और कई बार इसका खंडन किया जा चुका है। इसे पहली बार बीबीसी ने 2016 के केरल चुनावों में प्रकाशित किया था।
ऐसा लगता है कि यह केरल चुनाव 2026 के लिए एक पैसे देकर लिखवाई गई खबर है, कुछ हताश राजनीतिक दलों ने कुछ टुकड़े फेंके और इन कमीनों ने खुशी-खुशी इसके लिए अपने पैर फैला दिए।
मुख्यधारा का मीडिया पूरी तरह से बिक चुका है, अंदर से सड़ी हुई है।
सच कहूँ तो, मुझे इन बेशर्म मुख्यधारा के पत्रकारों से कहीं ज़्यादा सम्मान सड़क पर काम करने वाली वेश्याओं के लिए है। कम से कम वेश्याएँ अपनी असलियत तो मानती हैं।
@DrHemantMaurya महिला का रोड पे नाचना अच्छी बात है उसका पति और उसका सम्मान बढ़ रहा था स्वतंत्रता की बात करनेवाले अपनी मां बहन को रोड पर नचवाकर समानता का अधिकार दिलाओ
समाजवादी छात्र सभा के इकाई अध्यक्ष 'हिमांशु यादव' ने प्रशांत 'मिश्रा' की जाति पूछकर उन पर हमला कर दिया !
कॉस्ट डिस्क्रिमिनेशन का ये मामला बीएचयू का है,
'काशी हिंदू विश्वविद्यालय' के कैंपस में 'प्रशांत मिश्रा' के साथ जाति पूछकर मारपीट का मामला सामने आया है !
पीड़ित छात्र प्रशांत मिश्रा हिंदी विभाग के एम.ए. 2nd Year के छात्र है, पीड़ित प्रशांत मिश्रा का आरोप है की
@UPTakOfficial के मुताबिक
'हिमांशु यादव' व अन्य हमलावरों ने पहले 'प्रशांत मिश्रा' की जाति पूछी. जैसे ही 'प्रशांत मिश्रा' ने अपना नाम बताया उन पर हमला कर दिया गया.
आप समझिए ये घटना सामान्य वर्ग के साथ हुआ है लेकिन यूजीसी जैसे कानूनों के अनुसार सवर्ण ही दोषी है।