ही हुआ,इसका इतिहास गवाह नही है क्या?इस 21वीं सदी के लोगों का कर्तव्य है,इतिहास से शिक्षा लेकर अपने राष्ट्र को हर प्रकार से संभाल कर रखें।अगर हमने अपनी सांस्कृतिक विरासत के स्मृति को स्मरण करते हुये,अपने अपने कर्तव्यपथ पर अग्रसर होते रहे,तो चाहे विश्व जैविक हथ��यार,या किसी प्रकार
@prasad_1958 प्रजा निष्ठुर,निर्दयी,और किसी की नही होती है-श्री राम(संदर्भ राम राज्याभिषेक के उपरांत सीता के परित्याग से पूर्व सामान्य वेश में राम जब जनमत का अवलोकन करने स्वयं निकले उसके उपरांत का राम का वक्तव्य)
@prasad_1958 कोरोना की समस्या,वक्तव्य,राजनेताओं, नौकरशाहों के बैठकों से समाप्त होना कतिपय सम्भव नही है,वस्तुतः भारत के मिट्टी के शक्ति में कोरोना के पटाक्षेप की अप��िमित सामर्थ्य है।महत्वपूर्ण यह है कि सत्ता के शक्ति प्राप्त व्यक्तियों की इक्षाशक्ति,कार्ययोजना,और बौद्धिक विवेक का क्या स्तर है?
साहित्य,गद्य,पद्य,इतिहास को अपनी लेखनी से कवितावद्ध करने वाले हिंदी साहित्य के मूर्धन्य,सरस्वती पुत्र, राष्ट्रकवि,पूर्व राज्यसभा सांसद,रामधारी सिं�� दिनकर जी की पुण्यतिथि पर शत कोटि नमन।
भारत के विशिष्टता पर हमला कोई नई बात नही है,सदियों से हमारी गंगा-जमुनी संस्कृति को नष्ट करने की योजना कुछ दुनिया वाले बनाते रहते हैं।हमारी सोंधी मिट्टी से जलने वाले ,जलते रहेंगे।हम सबों की सर्वांगिक सुरक्षा ,सरकार के सुझावों का पालन करने में है।
उपाय करने चाहिये।चाहे विरोध हो या समर्थन,प्रेम हो या द्वेष सभी चीजें जीवित रहने के बाद ही कि जा सकती है।रामायण में भी भगवान श्री राम ने कहा है"सब मम प्रिय,सब मोहि उपजाये, सबते अधिक #मनुज मोहे भाये।
देश के विभिन्न कोनों से कोरोना के खात्मे के जंग के खिलाफ जो समाचार मिल रहें हैं,गंभीर चिंता का विषय है।मेरा मानना है,इस प्रकार जो मनुष्यता के खिलाफ वारदातें हो रही है,उसमे निश्चित रूप से भारत के दुश्मनों का अप्रत्यक्ष षडयंत्र है।हमारी सभी धर्म,सम्प्रदाय,पंथ,मजहब,राजनीतिक दल,एवं
सम्पूर्ण मानव जाति से प्रार्थना है,चाहे किसी प्रकार का आपसी विरोध हो,या मतभेद हो मनुष्यता को नष्ट करके मानव जाति के इतिहास को कलंकित न करें।मेरा तो व्यक्तिगत विनती होगा, इस महामारी में किसी विशेष वर्ग,देश,राज्य तो क्या,सम्पूर्ण विश्व को सारे भेदों को भुलाकर एकजुट होकर हर सम्भव
हे, भारत वासियों, हम सभी ऋषि के वंशज हैं।संयम तो हमारे दिनचर्या के सौंदर्य रहें हैं,और इसी संयम के कारण हम विश्व गुरु रहें हैं।और इसी संयम के विशिष्टता ने हमे विश्व वंदनीय बनाया है।तपश्चर्या तो हमारे जीवन के अंग रहें हैं।और इसी संयम और तपश्चर्या का तो मात्र पालन करना है।
@narendramodi हे माँ भारती के वीर साधक,आपकी इक्षाशक्ति ने कोरोना वायरस को एक प्रकार से मात तो दे ही रहा है,साथ ही सम्पूर्ण विश्व भारत के कदम को आत्मसात करने को विवश है। ज्येष्ठ और आषाढ़ मास के बीच पड़ने वाले आर्द्रा नक्षत्र तक lockdown जारी रखने का हर सम्भव प्रयास किये जायें।