टूटे दिल जोड़ रहा हूँ।
ऐसी ज़िंदगी जी रहा हूँ।
पता नही जी रहा हूँ या
कोई सज़ा काट रहा हूँ।
बाहर से मझबूत हूं मैं
अंदरसे बिखरा हुआ हूं।
पत्थरों को आज ख़ुदा
मान कर पूज रहा हूँ।
प्यार के लिए ख़ुशीयोँ
की भीख मांग रहा हूँ।
#बज़्म@mohan_135
मिल लेते है
चलो आज ख़ुद से मिल लेते है।
मिल कर मन हल्का कर लेते है।
दर्पण के सामने खड़े होकर दो
चार सवाल ख़ुद से पूछ लेते है।
धड़कने तेज़ और आँखो में दर्द
उभर आए तो थोड़ा रो लेते है।
दो रोटी के लिए हम भी कभी
कभी मौत का खेल खेल लेते है।
#बज़्म@mohan_135
बाक़ी की लड़कियों को जब कैंडल लाइट डिनर चाहिए और महँगी गिफ़्ट,
तब वो ऐसे महबूब का तसव्वुर करती है
जो उसके सूनी एड़ियों पर आलता से मुहब्बत लिखे,
विडियो कॉल के इस मौसम में उसे चिट्ठी लिखे
और गिफ़्ट में माँ की उतारी वो साड़ी दे जो पापा ने माँ को पहली बार अपनी सैलरी से ख़रीदा हो!
मैं बनूंगी
विद्योत्तमा और रत्नावली भी
धिक्कारूंगी तुम्हें आत्मबोध को
और तुम कर देना मेरा त्याग
बनने को आदि कवि
तुम्हारे महामानव और ईश्वर
होने के सारे मार्ग
इस संसार का कल्याण
धर्म की स्थापना और जय
जाने क्यूं एक स्त्री के
त्याग से ही संभव है
जाने संसार में किसने
पहली बार कहा होगा
मैं प्रस्तुत हूॅं
बन के सीता
और काटने को एक वनवास
तुम्हारे साथ और तुम्हारे बिना
मैं चुकाने को तैयार हूॅं
तुम्हारे लोकनायक होने का मूल्य
मैं बन के राधा
वर लूंगी विरह चिरकाल तक
जो तुम्हें कहनी हो गीता
लोक कल्याण को और
करनी हो धर्म की स्थापना
मैं बन के कुंती और यशोधरा
पाल लूंगी