दिल्ली की राजनीति इन दिनों बड़े सियासी घमासान और प्रशासनिक उठापटक के दौर से गुजर रही है। एक ओर वित्तीय गड़बड़ियों के गंभीर आरोपों ने सरकार की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं, तो दूसरी ओर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं ने सरगर्मी बढ़ा दी है।
सौरव भारद्वाज द्वारा लगाए आरोप कि बाजार में ₹4,200 कीमत वाली साइकिलों को सरकार द्वारा ₹6,957 की ऊंची दर पर खरीदने का दावा।
1.30 लाख साइकिलों के सौदे में करीब ₹35.84 करोड़ की गड़बड़ी का आरोप ।
FCI गोदामों से गरीबों के लिए मिलने वाले करीब 31,000 मीट्रिक टन रियायती चावल को लाभार्थियों तक पहुँचाने के बजाय, बाजारों में ऊंचे दामों पर बेचे जाने का खेल।
लगभग ₹22,000 करोड़ का कथित घोटाला।
दिलचस्प बात यह है कि वित्त मंत्रालय का प्रभार खुद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के पास है। ऐसे में, उनके सीधे नियंत्रण वाले विभाग के तहत इतने बड़े वित्तीय घोटालों के सामने आने से उनकी प्रशासनिक पकड़ और सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं ?
48 सीटें जीतने के बाद रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पीछे डूसू (DUSU) अध्यक्ष, मेयर, प्रदेश महामंत्री, वैश्य समुदाय का प्रतिनिधित्व और महिला नेतृत्व जैसे कई सियासी समीकरण थे। हालांकि, इन घोटालों के सामने आने के बाद प्रशासनिक अनुभव को लेकर उनकी कार्यशैली आलोचकों के निशाने पर आ गई है।
इस राजनीतिक अस्थिरता के बीच भाजपा के भावी नेतृत्व को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं:
राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि क्या वीरेंद्र सचदेवा
को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंप सकती है ?
इसके अलावा केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय और विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के लंबे राजनीतिक अनुभव को लेकर भी कयासों का बाजार गर्म है।
इन तमाम घटनाक्रमों के बीच यह देखना अहम होगा कि क्या मौजूदा नेतृत्व इन सियासी और वित्तीय तूफानों से पार पा पाता है या पार्टी दिल्ली में किसी नए चेहरे पर दांव खेलने का विचार करती है।
Leader of the Opposition Rahul Gandhi and Congress President Mallikarjun Kharge have written a joint letter to Prime Minister Narendra Modi expressing serious concern over the current process of caste census.
कांग्रेस पार्टी मानती है कि जिस तरह देश में जातिगत जनगणना कराई जा रही है, वह जनता के साथ धोखा है।
मोदी सरकार जनता को धोखा देने के बजाए सही तरीके से देश में जातिगत जनगणना कराए।
: कांग्रेस महासचिव श्री @Jairam_Ramesh
Delhi Youth Congress's BJP HQ siege 🔥
The baton charge on students on July 20, pellet guns and the order to run AK-47 in Bihar belonged to none other than Amit Shah.
Until the resignation of Amit Pallet Shah, the Youth Congress will continue to struggle on the streets all over the country 👊
मुख्यमंत्री @Dev_Fadnavis जी,
महाराष्ट्र के अनेक आदिवासी छात्र 10 दिनों से अधिक से अपने अधिकारों के लिए भूख हड़ताल पर हैं।
पुणे में 'छात्रों की गूंज' के दौरान छात्राओं ने बताया कि छात्रावासों में 30 वर्ष की अनावश्यक उम्र सीमा, अपमानजनक नियम, असुरक्षित सुविधाएं और महिलाओं के लिए गर्भावस्था जांच जैसे अमानवीय प्रावधान लागू हैं।
सुदूर गांवों-कस्बों से आने वाले ये छात्र कोई दान नहीं, अपना अधिकार मांग रहे हैं। अपेक्षा है कि आप उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करेंगे।
Women are the strength of India - its foundation, its present, and its future.
You belong to no one but yourself.
Be loud. Be proud. Fight for your space.
Smash the patriarchy!
#ChhatronKiGoonj
आज साहिल लोचब के साथ, उनके साथ हुई पुलिस बर्बरता के खिलाफ FIR दर्ज कराने संसद मार्ग के DCP कार्यालय पहुँचा।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे साहिल पर पुलिस ने पैलेट गन से हमला किया। छर्रों से बुरी तरह घायल साहिल की एक आँख की रौशनी खतरे में है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के खिलाफ ऐसी बर्बरता कोई कानूनी कार्रवाई नहीं, एक गंभीर अपराध है। इस क्रूरता के लिए न गृह मंत्री अमित शाह ने छात्रों को कोई सफाई दी, न प्रधानमंत्री ने उनसे माफ़ी मांगी।
अब जब साहिल न्याय के लिए FIR दर्ज कराना चाहता है तो वो भी नहीं करने दिया जा रहा। इस तरह संविधान और संवैधानिक अधिकारों को कुचला जा रहा है।
@AmitShah जी, न्याय से इतना क्यों घबरा रहे हैं? ये डर दिखा रहा है कि आप अपना अपराध कबूल कर रहे हैं।
FIR होगी। न्यायिक जाँच होगी। और ऊपर से नीचे तक जो भी इस बर्बरता के दोषी हैं, उन सभी पर कार्रवाई होगी।
साहिल और उसके जैसे पीड़ित हर छात्र को न्याय दिलाकर रहेंगे।
साहिल की FIR दर्ज न होने देने का एक ही मतलब है -
नरेंद्र मोदी और अमित शाह के राज में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर खुलेआम पैलेट गन चलाई जा सकती है, मगर उन्हें इंसाफ नहीं मिल सकता।
जब तक FIR दर्ज नहीं होती, जब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता - हम डटे रहेंगे।
लक्ष्य न्याय है और वो हर हाल में लेकर ही रहेंगे।
साहिल की FIR दर्ज हुई। यह न्याय की तरफ़ पहला क़दम है।
पर सोचिए - एक FIR लिखने की इजाज़त तक गृह मंत्रालय से आनी पड़ी। अब समझ आया कि न्याय पर लगाम किसने लगा रखी है।
एक भारतीय महिला होने का क्या मतलब है?
मैं जानना चाहता हूँ कि आप क्या महसूस करती हैं।
समाज की नहीं, परिवार की नहीं - आपकी अपनी आवाज़ क्या कहती है?
आपके संघर्ष, आपकी रुकावटें, आपका नज़रिया और आपके सपने।
आपकी कहानी क्या है? सबसे जवाब की उम्मीद कर रहा हूं।
22 अगस्त | महिला विशेष महारैली
📍AISSMS कॉलेज ग्राउंड, पुणे
#ChhatronKiGoonj