मध्य प्रदेश- 'लाड़ली बहना योजना' बंद कराने हाईकोर्ट पहुंची महिला: 1.25 करोड़ महिलाओं को मंथली ₹1500 की किस्त पर रोक लगे, योजना पर सालाना खर्च ₹22,500 करोड़ से ज्यादा; महिला ने क्यों लगाई याचिका और सरकार ने क्या कहा
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मध्य प्रदेश के बालाघाट में 30 आदिवासी समुदाय से आने वाले बच्चों की बीमारी और स्वास्थ्य सुविधाओं की चरमराई व्यवस्था से उनकी मौत हो गई है।
इसमें जितने भी जिम्मेदार अधिकारी, नेता या मंत्री लोग हैं जिन्होंने ऐसे गंभीर विषय को अनदेखा किया उनपर कार्रवाई होनी चाहिए।
ये बहुत ही ज्यादा संवेदनशील मामला है जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।
आखिर इन सबकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
राज्य में पीने के लिए साफ पानी, बीमारी से बचने की दवाएं, इन सबकी व्यवस्था की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए।
बालाघाट में 30 से ज़्यादा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच मौत हो चुकी है।
संवेदनहीनता का आलम यह है मासूमों की मौतें होती रहीं, लेकिन कार्रवाई सुस्त रही, सरकार सोती रही।
मुख्यमंत्री जी, दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो तो ज़रा राज्य की ज़मीनी हालत भी देखिए।
बीमारी, पोषण और साफ पानी की कमी और चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था नन्हें बच्चों की जान ले रही है।
मिलावटी दवाइयां और जहरीली अवैध शराब सैकड़ों परिवारों को तबाह कर रही हैं।
मैं इंदौर आ रहा हूं और लगातार प्रदेश के छात्रों, युवाओं और आम लोगों से feedback ले रहा हूं। सामने आ रही भयावह घटनाएं बता रही हैं कि मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था आज देश भर में सबसे ज़्यादा बर्बाद है।
छात्र, बच्चे, गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े या महिलाएं - हर वर्ग प्रताड़ित है, कोई खुश नहीं।
मध्य प्रदेश सरकार आज भारत की सबसे भ्रष्ट और सबसे कुशासित सरकार है - यही सच्चाई है।
Balaghat के उस Tribal village में, जहाँ 30 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है, लोगों को पीने के लिए यही पानी मिल रहा है।
एक सवाल Ministers और MLAs से है—
क्या आप अपने बच्चों को यही पानी पिला सकते हैं?
अगर नहीं, तो फिर इन Tribal बच्चों के लिए यही पानी क्यों?
क्या गरीब और आदिवासी बच्चों की ज़िंदगी की कीमत इतनी कम है कि उनके लिए basic drinking water भी सरकार की प्राथमिकता नहीं बनता?
सवाल सिर्फ पानी का नहीं है सवाल है कि सत्ता की नज़र में किसकी ज़िंदगी कितनी महत्वपूर्ण है?
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बालाघाट की पत्रकार महोदया ने प्रशासन के पेड इंफ्लुएंसर्स द्वारा नेरेटिव चलवाने की बात को लेके धागा खोल दिया,🔥
कई अधिकारी बगलें झांकने लगे और कुछ तो आँखे ही ऊपर नहीं कर पा रहे।
This is a school for tribal children in Balaghat.
Would our politicians ever send their own children to a school like this?
The ASHA workers here have not received their salaries for last 6 months.
Found tap water in one of the Tribal villages in Balaghat where more than 30 kids have died.
Would the Ministers and MLAs make their own children drink this water?
I hereby resign as the Chief Minister of MP with immediate effect.
I thank Hon’ble PM @narendramodi ji for giving me the opportunity to serve the people of MP, an opportunity in which I have clearly failed.
@GovernorMP
If True many congratulations to my friend Subhash.Banks and Government have admitted having recovered Rs 14,100 crores from me against a Judgement debt of Rs 6203 crores. Many more borrowers have settled at a fraction. Indian Debt Resolution Justice I presume. No media questions.
@Medhareports जब खबर की सच्चाई से ज्यादा इस बात की चिंता हो कि ट्वीट से किसे फायदा पहुंचेगा तो समझ जाइए कि पत्रकारिता भक्ति में बदल चुकी है फेक न्यूज को भी इतनी गंभीरता से परोसने के लिए आपको विशेष पुरस्कार मिलना चाहिए.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक तरफ शिलान्यास और लोकार्पण की औपचारिक पट्टिका हटा रहे थे, तो दूसरी तरफ उनके 'खास' समर्थक कैमरे की फ्रेम में आने के लिए आपस में ही भिड़ गए।