नेक्स्ट लेवल के प्रो मैक्स अंधभक्त का वीडियो देखिए और मजे लीजिए!
ज्ञान ऐसा कि—“अगर मोदी सरकार नहीं होती तो चीन भारत पर कब्ज़ा कर चुका होता!”
https://t.co/oeAe6egzo2 किए हैं साहब… लेकिन WhatsApp University से Post Graduation जारी है।
समस्या सिर्फ ज्ञान की नहीं, उस आत्मविश्वास की है जिससे WhatsApp के फॉरवर्ड को देश की सुरक्षा का अंतिम सत्य समझ लिया जाता है!
ऐसे ही ‘ज्ञान’ के भरोसे देश नहीं चलता साहब!
ऐसे ही लोग देश को लेकर डूबेंगे और यह सब एक ही जगह पर पाए जाते हैं
इन्हीं जैसे कुछ लोगों के वजह से आज पूरा देश परेशान है ।
मेरे दोस्तों विडियो को रिपोस्ट जरुर करे और वाट्सअप युनिवर्सिटी के अंधभक्त छात्रों को जरुर दिखाएं।
Guys, I’m saying this again - I’ll return everyone’s money. There’s just a temporary bank limit on my account right now. Please wait until tonight. I’m not going anywhere, and I’m not running away with anyone’s money. Just have a little more patience, please. 🙏
मेरठ सेंट्रल मार्केट पर जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया तब मैंने लिखा था कि ये पैंडोरा बाॅक्स खुल गया है। इसके ज़रिए देश के नागरिकों को अपराधी बनाने की क़ानून की ताक़त का और विस्तार हो गया है।
44 संपत्तियों से शुरु हुआ मामला मेरठ की 16000 प्लस संपत्तियों तक आ गया है। अब कई और कालोनियों पर बुलडोज़र चलेगा। इनमें प्रमुख शिकार वो हैं जो सोतीगंज मार्केट उजाड़े जाने का जश्न मना रहे थे और बुलडोज़र न्याय पर लड्डू बांट रहे थे। यानि, ताली थाली से शुरु हुई बात घर के दरवाज़े पर नगाड़ा बजने तक आ गई है।
ये विडंबना है कि जिस वक़्स सुप्रीम कोर्ट एमडीए को मेरठ के हज़ारों घर और दुकानें तोड़ने का आदेश दे रहा था उसी वक़्त मेरठ में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत जेसीबी मशीनों से किया जा रहा था। ये दैवीय न्याय है या नीयति का बदला, कुछ साल बाद पीड़ित ही बता पाएंगे। फिलहाल तो वो धार्मिक राष्ट्रवाद का राक्षसी उत्सव मना रहे हैं।
मैं बार-बार कहता हूं अधिकांश क़ानून अपराध रोकने के लिए नहीं, बल्कि नागरिक को अपराधी साबित करने के लिए बनाए जाते हैं। क़ानून की नज़र में हर नागरिक संभावित अपराधी है। जितने ज़्यादा नियमन और क़ानून, उतने ही हर नागरिक के अपराधी साबित होने की संभावना।
बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लोगों के हाथ में भी एक अस्त्र आ गया है। आपको लगता है आपके शहर का लाला नफरत फैला रहा है तो अपने निकाय और नियमन संस्थान से इतना पता कर लो कि जिस जगह वो धंधा करके माल कमा रहा है, या जहां उसका घर है, उसका लैंड यूज़ क्या है और शहर के मास्टर प्लान में वो जगह किस प्रयोजन के लिए आवंटित है।
यह मामला मेरठ में रुकने वाला नहीं है। यक़ीन मानिए, भारत में इससे कोहराम मचेगा। मसलन, मेरे ही पास आरटीआई से हासिल शिमला के 200 से ज्यादा संपत्तियों की लिस्ट है जिसमें माॅल, सिनेमा, स्कूल, बैंक, पेट्रोल पंप और दुकानें शामिल हैं। मैं मेरठ मामले को नज़ीर मानते हुए इस लिस्ट को लेकर पीआईएल के लिए जाऊं तो शिमला में कोहराम मच जाएगा। बस मेरे मन में ख़ुराफात आने की देर है।
बहरहाल, ये उन लोगों के लिए चेतावनी है जो बुलडोज़र न्याय पर ताली बजाते हैं। उन अधिकारियों के लिए भी इसमें संदेश है जो धर्म योद्धा बने हुए हैं। इस फैसले के बाद सब कच्चे मकान में बैठे हैं। जैसे तो तैसा करने की देर है। जिसको चाहे सबक़ सिखा दीजिए।
कैसा लगे कि किसी मुरादाबाद में नफरत के ऐजेंट बने डीएम साहब के गांव, रिश्तेदारों की रेसिडेंशियल एरिया में चल रही कमर्शियल संपत्ति को, या नक्शानुसार घर में हुए बदलाव को इस फैसले के आधार पर तुड़वा दिया जाए? या संभल में उछल रहे राष्ट्रबाधियों के घर-कारोबार पर ऐसी ही एक पीआईएल लगा दी जाए? जस्ट एन आइडिया। दिमाग़ में ख़ुराफात हो और आपके पास एक अच्छा वकील हो तो संभावनाएं अपार हैं।
#bulldozer #meerutnews #centralmarket