कि रुक जाता है मेरा जीवन तुम बिन..
कि तुम मुझे बस आस पास रहकर ही नहीं,दिल हर पल तुमसे जीना चाहता है..
ओर शायद क्या क्या चाहता है..
लेकिन मुझे पता है,ये सब कहां मुमकिन है..
ये मेरी कल्पनाएं ही तो हैं..
तुमसे ये सब चाहना भी बस सीमित है मेरे खयालों तक..
ओर बस ये यूं ही बना रहे हरदम
अगर मैं कहूं..
कि याद नहीं आती तेरी..
तो ये भी एक झूठ ही होगा..
अगर मैं कहूं..
कि जीना नामुमकिन है तेरे बिन..
शायद ये भी एक झूठ ही होगा...
अगर मैं कहूं..
कि तेरा मेरे आस पास रहना ही काफी होगा..
तो ये भी एक झूठ होगा..
जो सच होगा वो होगा कि हर पल याद रहता है मुझे
रुक सा जाता है
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राधा ने पूछा,
प्रेम क्या है, कान्हा?
क्या ये शब्दों से बनता है?
कृष्ण मुस्कुराए और बोले,
नहीं राधे...
प्रेम शब्दों से नहीं जन्मता,
वह तो हृदय में उठी
एक निष्कलुष भावना से जन्म लेता है,
और वही भावना धीरे-धीरे
रिश्ते का स्वरूप बन जाती है।
तुम प्रेम को जिस भाव से सींचोगी,
तुम्हें उसी भाव की अनुभूति होगी, राधे।
कृष्ण कहते हैं यदि प्रेम में स्वार्थ का एक कण भी होगा न राधे,
तो प्रतीक्षा में अधैर्य होगा,
खामोशी में शिकायत होगी,
दूरी में बेचैनी होगी,
और विश्वास के बीच भी कहीं न कहीं...
पा लेने की चाह छिपी होगी।
पर...
जब प्रेम में समर्पण उतर आता है न,
तो प्रतीक्षा भी प्रार्थना बन जाती है, राधे।
दूरी भी निकटता का एहसास देने लगती है,
मौन भी बहुत कुछ कह जाता है,
और प्रेम को किसी प्रमाण की
आवश्यकता नहीं रहती।
फिर न अधिकार जताने की बेचैनी होती है,
न खो देने का भय...
बस एक सहज विश्वास रह जाता है,
तुम मेरे हृदय में हो,
इसलिए तुम्हारा होना ही पर्याप्त है।
शायद यही वह प्रेम है, राधे...
जहाँ चाहत धीरे-धीरे
मिटकर समर्पण बन जाती है,
और दो हृदयों के बीच का रिश्ता
किसी नाम या बंधन से नहीं,
एक शाश्वत भाव से पहचाना जाता है।✨❤️
#રાધાસ્વરા
#बज़्म
#राधे_राधे
प्रेम किसी के साथ सो लेना नहीं, किसी से पूरे दिन बात करना नहीं, किसी संग रह लेना नहीं, किसी को पा लेना भी नहीं.. प्रेम तब पनपेगा जब आप एक दूसरे के सबसे बुरे रूप को देखकर भी उसे सहज स्वीकार लेंगे उसके होने के लिए, उसका साथ रहेंगे उसके लिए खुद के लिए...!!!
कभी कभी दिल मेरा बहुत दुखता है...
जैसे छोड़ दूं किसी के लिए कुछ करना..
जैसे मै भी बन जाऊं..
कुछ ऐसा जो बहुत कीमती हो..
जिसे जो जब चाहे ना पा सके ना तोड़ सके...
मेरे आसूं बस रह जाए...
ये फिर कभी ना बह पाए..
दिल खो जाए जिसमें..
वो उम्मीदों का चिराग कहां से लाऊं..
तू मेरा ओर मै तेरी हो जाऊं..
ये तकदीरों के मिलानो का हिसाब कहाँ से लाऊं..
मै ढूंढती हु तुझे ओर तू ढूंढता है मुझे..
ये दिल की इन बातों को तुम समझ जाओ, ऐसी किताब कहां से लाऊं
यूँ तू दिल को ना दुखा..
यहां कोई किसी का अपना नहीं होता..
अपनी भावनाओं पर तू काबू रख..
यूँ ना किसी के लिए तू आंसू बहा..
तू तो एक प्यारी सी लड़की है..
कुछ गुनगुना ओर दिल को हल्का कर जा..