दिल्ली में यह दो मुस्लिम बच्चे जो की नाबालिग हैं, कनॉट प्लेस पर टहल रहे थे।
��ेरे सामने पुलिस ने बेवजह इन बच्चों को पकड़ लिया। मैं पीछे भागती रही और पूछती रही कि नाबालिग बच्चे हैं, पुलिस वाले ने जवाब नहीं दिया और बाद में इन बच्चों को यह कहकर नहीं छोड़ा कि यह सेना को गाली दे रहे थे जबकि ऐसा कुछ भी नहीं था।
यूपी: गाजियाबाद के इंदिरापुरम डी-मॉल में कैफे चलाने वाली महिला हरलीन कौर ने हिंदू रक्षा दल से जुड़े कुछ लोगों-सौरभ पंडित, दक्ष चौधरी, अक्कु पंडित और अमित पहलवान-पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
हरलीन कौर का आरोप है कि मुफ्त खाना मांगने, गाली-गलौज, मारपीट और तोड़फोड़ के बाद उनसे हर महीने ₹50 हजार की मांग की गई। उन्होंने कथित तौर पर यह रकम देने से इनकार कर दिया।
महिला का दावा है कि उनके पास पेमेंट के स्क्रीनशॉट, वीडियो फुटेज और कॉल रिकॉर्डिंग समेत मामले से जुड़े साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कार्रवाई की मांग करते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई ��ै।
एक ही प्रदेश, लेकिन पैमाने अलग-अलग क्यों?
📍संभल, उत्तर प्रदेश
चेहल्लुम जुलूस के दौरान इंस्पेक्टर सुधीर पंवार ने एक बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्त�� के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इस पर बजरंग दल ने आपत्ति जताई, जिसके बाद इंस्पेक्टर को हटाकर दूसरे थाने भेज दिया गया।
इसी उत्तर प्रदेश में कांवड़ियों के पैरों में दर्द देखकर पुलिस अधिकारियों को उनके पैर दबाते और सेवा करते हुए भी देखा गया था।
मेरठ: नाबालिग बच्ची के साथ गैंगरेप के आरोपी 'नकुल गुर्जर' ने जीशान और शाहवेज को फंसाने के लिए रची साज़िश, पैसों का लालच देकर एक लड़की के ज़रिए लव जिहाद का झूठा आरोप लगवाया, पुलिस की सूझबूझ ने किया बड़ा खुलासा.
#Meerut#Muslim#Hindu#India#BJP
राघव चड्ढा ने मुझे तो बिल्कुल नहीं चौंकाया . ये हो होना ही था .
बीजेपी से उनकी सेटिंग पहले से ही थी , एलान आज किया है .
बस इतना ही फर्क है . इतने सालों तक केजरीवाल के पीछे - पीछे ���लकर मज़े लिए . पंजाब में जलवे बिख��े. 'जलवे समेटे ' भी . राज्यसभा में बैठे . और अब उस बीजेपी की शान में कसीदे पढ़ेंगे , जिसे कोसते हुए नेता बने थे .
गाजा में अल-शिफा हॉस्पिटल के सामने से CGTN (चाइनीज स्टेट टेलीविजन) के रिपोर्टर ने रिपोर्टिंग करते हुए कहा:
"मैंने अपनी आंखों से 5 साल से कम उम्र के कम से कम 10 फिलिस्तीनी बच्चों को बिना सिर के देखा।"
🇵🇸💔 #Palestine दिल को झकझोर देने वाले एक दृश्य में, कैमरे ने उन क्षणों को कैद किया।
एक फिलिस्तीनी बच्चे की पीड़ा का वर्णन, जिसे एक इजरायली #sniper ने बेरहमी से निशाना बनाया था।
बच्चा धीरे-धीरे खून से लथपथ है, अकेला है, दुनिया की खामोशी के सामने मासूमियत की एक चीख दब गई।💔
अंतरात्मा के जागने से पहले कितने बच्चों को मरना पड़ेगा?
एक समय था जब हमें सरकारी स्कूल में किताबे मिलती थी।
उस दिन की खुशी, वो नई किताबें, उनमें कवर चढ़ाना,
आजकल तो ये सिर्फ धंधा बन चुका है,
ऐसा क्या प्रिंट होता है इनमें जो किताबें 500 रुपए की होती हैं?
सरकार इन पर लगाम क्यों नहीं लगाती हैं?
शिक्षक मंत्री जी से अनुरोध है कि,
कृपया स्कूल की पाठ्यपुस्तकों की कीमत तय करने में भी कुछ नियम लागू करें।
आखिर पढ़ाया क्या जा रहा है कि एक किताब की कीमत ₹1000 है?
यह अब शिक्षा नहीं रही, बल्कि परिवारों पर आर्थिक बोझ बनती जा रही है।
“पत्थर की मूरत को लगते हैं छप्पन भोग
भूखे, नंगे, तड़पते, सो जाते हैं लोग”
दिल जीत लिया इस छोटी बच्ची ने. ये झारखंड की रहने वाली है. इसका नाम नंदनी है. आप नंदनी की बातों पर गौर फ़रमाइए.