-भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने मुस्लिम समुदाय से मांगी माफ़ी
-जयपुर की जामा मस्जिद की सीड़ियों पर चढ़कर नारा लगाने का था मामला
-मुस्लिम समुदाय ने की है विधायक को गिरफ़्तार करने की मांग, FIR भी दर्ज
-मस्जिद के नायब सदर ने कहा- माहौल ख़राब करने का प्रयास कर रहा है विधायक
दिल्ली के जंतर मंतर पर आज @AIMPLB_Official का वक़्फ़ संसोधन बिल के खिलाफ़ प्रदर्शन. सभी बड़े मुस्लिम संगठनों का इस धरना प्रदर्शन को समर्थन हैँ. विपक्षी पार्टियों को भी मंच पर आने का न्योता दिया गया.
#WaqfAmendmentBill#WaqfBill
वक़्फ़ की ज़मीनें सिर्फ़ अल्लाह के लिए वक़्फ़ हैं और असली मालिक वही है। हम इन ज़मीनों के व्यावसायिक इस्तेमाल के हर फ़ैसले का विरोध करते हैं और किसी भी ऐसे सरकारी क़ानून को नामंज़ूर करते हैं जो इन जायदादों पर क़ब्ज़े की नीयत से बनाया जाए।
#RejectWaqfBill
वक़्फ़ संशोधन विधेयक में क्या है? जानिए सरकार की मंशा, इससे होने वाले बदलाव और मुसलमानों की चिंताएं
अब्दुल मुक़ीत
सम्पूर्ण लेख (10 min.) पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें
https://t.co/NfoyxXDjYDवक़्फ़-संशोधन-विधेयक-में/
#WaqfAmendmentBill#WaqfBill
धन्यवाद
छात्र विमर्श
वक्फ बोर्ड अलग है उससे आपको कई शिकायतें हो सकती हैं लेकिन वक़्फ़ संपत्ति बिल्कुल दूसरी चीज़ है यह बिल वक़्फ़ बोर्ड के लिए नहीं बल्कि वक़्फ़ संपत्ति को हड़पने के लिए है मस्जिद, मदरसा, ईदगाह, क़ब्रिस्तान, खानक़ाहें, मज़ार, वग़ैरह के लिए है।
#RejectWAQFBill
Waqf Amendment Bill is against the secular and democratic principles of India. It violates the basic rights ensured in article 12 to 35 of the constitution of India.This bill hurts the emotions of 25 crore citizens who belong to minority community. We completely reject this bill and demand the government to take it back at once.
#RejectWaqfBill
वक़्फ़ एक इस्लामिक शब्द है जिसका अर्थ है किसी चीज़ को अल्लाह की राह में हमेशा के लिए वक़्फ़/दान करना यह ऐसी संपत्ति होती है जिसे किसी नेक उद्देश्य के लिए निर्धारित कर दिया जाता है और इसकी व्यक्तिगत स्वामित्व समाप्त हो जाती है यानी इसे बेचा खरीदा या विरासत में नही दिया जा सकता
Ramadan fasting is a profound exercise in nurturing piety, empathy, patience, perseverance, and diligence: Syed Sadatullah Husaini, President, Jamaat-e-Islami Hind
रमज़ान धर्मपरायणता, करुणा, धैर्य और
आत्म-संघर्ष के अभ्यास का महीना है: सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के मुख्यालय में आयोजित इफ्तार पार्टी की एक बड़ी सभा को संबोधित करते हुए जमाअत के अमीर सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा कि रमजान का पवित्र महीना चल रहा है और हम सभी इसके वरदान का भरपूर लाभ उठाने में व्यस्त हैं। इस पावन महीने को कुरान का महीना भी कहा गया है। यही कारण है कि हम सभी इस महीने के दौरान कुरान के साथ अपना संबंध जितना संभव हो सके उतना गहरा और मजबूत बनाने का प्रयास करते हैं। यह महीना तक़वा (ईश- भय) का है। तक़वा हासिल करने के लिए रोज़ा रखना अनिवार्य किया गया है। क़ुरआन में कहा गया “तुम्हारे लिए रोज़ा अनिवार्य किया गया है ताकि तुम नेक बनो।” क़ुरआन के इस आदेश के मुताबिक़ हम सभी अपने भीतर इस गुण को विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस पवित्र महीने को दया और धैर्य का महीना भी कहा जाता है। रमज़ान की ये सभी विशेषताएँ हमारे सामने रहनी चाहिए। और मुसलमान इस पर यथासंभव ध्यान देते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि कुछ पहलू ऐसे हैं जो इस पवित्र महीने में बहुत महत्वपूर्ण होने के बावजूद बहुत कम ध्यान दिए जाते हैं। एक बात यह है कि यह धैर्य का महीना है। इस महीने में अल्लाह अपने बन्दों को क़ुरआन के सिद्धांतों और ईमान की शर्तों पर दृढ़ रहने की ट्रेनिंग देता है। एक बार पैगंबर हज़रात मुहम्मद (स अ स) के एक साथी ने उनसे से पूछा, "ऐ अल्लाह के रसूल, मुझे कुछ सलाह दीजिए ताकि मुझे कभी किसी से पूछने की ज़रूरत न पड़े।" . वास्तव में, वे साथी इस्लाम का सारांश चाह रहे थे। अल्लाह के रसूल ने इस्लाम को एक वाक्य में सारांशित करते हुए कहा, “कहो, ‘मैं अल्लाह में आस्था रखता हूँ’, और फिर उस पर दृढ़ रहो।” इस दृढ़ता के साथ ईमान पर अडिग रहना ही इस्लाम है। इस महीने के दौरान भूख, प्यास और इच्छाओं पर नियंत्रण रखकर इसी दृढ़ता का अभ्यास किया जाता है। इसी प्रकार यह महीना संघर्ष का महीना है। यह धैर्य और कड़ी मेहनत का महीना है। हम जानते हैं कि इस महीने में कई जंगें हुईं।
अमीर जमाअत ने कहा कि हमने इन दो पहलुओं का विशेष रूप से उल्लेख किया है क्योंकि भारत के मुसलमान वर्तमान में जिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं, मेरा मानना है कि हमें इन दो गुणों अर्थात् दृढ़ता और संघर्ष की विशेष रूप से आवश्यकता है। परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, कठिनाइयाँ चाहे कितनी भी क्यों न हों, हमें अपने सिद्धांतों पर दृढ रहना चाहिए। आपको अपने उद्देश्य और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना होगा। इसके लिए जो भी त्याग और कड़ी मेहनत करनी पड़े, उसके लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। भारत के मुसलमान इन कठिनाइयों के चक्र से विजयी होकर तभी उभर सकते हैं जब वे अपने भीतर इन दो गुणों को विकसित करें।
इस आध्यात्मिक इफ्तार पार्टी में राजनीतिक, सामाजिक क्षेत्र के विशिष्ट व्यक्तित्वों सहित दिल्ली के आठ सौ अन्य प्रमुख हस्तियां शामिल थीं।
رمضان کے روزے تقویٰ، مواسات، صبرو استقامت اور جدو جہد کی بہترین مشق ہیں: امیر جماعت اسلامی ہند
استقامت و جدو جہد کے ذریعے مشکل حالات سے نمٹا جا سکتا ہے: امیر جماعت اسلامی ہند
نئی دہلی: جماعت اسلامی ہند کے مرکز میں منعقدہ ایک افطار پروگرام میں امیر جماعت اسلامی ہند سید سعادت اللہ حسینی نے فرمایا کہ رمضان کا مبارک مہینہ ہم پر سایہ فگن ہے اورہم سب اس کی برکتوں سے زیادہ سے زیادہ استفادہ کرنے میں مصروف ہیں۔ اس مبارک مہینے کو ماہِ قرآن کہا گیا ہے ۔ اسی لیے ہم سب کی کوشش ہوتی ہے کہ اس ماہ میں قرآن سے ہمارا تعلق زیادہ سے زیادہ گہرا اور مضبوط ہو۔ یہ ماہِ تقویٰ ہے۔ تقویٰ کے حصول کے لیے روزے کی فرضیت ہوئی ہے ۔ قرآن نے کہا ’’ تم پر روزے فرض کیے گئے تاکہ تقویٰ والے بن جاؤ‘‘۔ قرآن کے اس حکم کے مطابق ہم سب اس صفت کو اپنے اندر پروان چڑھانے کی کوشش کررہے ہیں۔ اس مبارک ماہ کو ماہ مواساۃ اور ماہ صبر بھی کہا گیا ہے۔ رمضان کی یہ تمام خصوصیات ہمارے سامنے رہنی چاہئے، اور مسلمان حتی المقدور اس پر توجہ بھی دیتے ہیں، لیکن میں سمجھتا ہوں ایک پہلو ایسا بھی ہے جو اہم ہونے کے باوجود اس پر توجہ کم دی جارہی ہے۔ وہ ہے استقامت ۔ یہ ماہ استقامت ہے۔ اس مہینے میں اللہ مومنین کو قرآنی اصولوں اور ایمانی تقاضوں پر استقامت یعنی ثابت قدم رہنے کی تربیت فرماتا ہے۔ ایک مرتبہ ایک صحابی نے رسول اللہ ﷺ سے عرض کیا کہ یا رسول اللہ مجھے کوئی ایسی نصیحت فرمایئے کہ اس کے بعد پھر کسی سے کچھ پوچھنے کی ضرورت نہ پڑے۔ دراصل وہ صحابی اختصار کے ساتھ اسلام کا خلاصہ معلوم کرنا چاہتے تھے۔ اللہ کے رسول نے ایک جملے میں اسلام کا خلاصہ بیان فرما دیا ’’ کہو میں اللہ پر ایمان لایا اور پھر اس پر جم جاؤ‘‘۔ تو ایمان پر استقامت یعنی ڈٹ جانے کا نام اسلام ہے ۔ اس ماہ میں بھوک و پیاس اور خواہشات پر قابو پا کر اسی استقامت کی مشق کی جاتی ہے۔اس استقامت کو ساری زندگی چاہے رمضان ہو یا غیر رمضان اس کا مظاہرہ کرنا ہے۔ اسی طرح یہ مہینہ ماہِ جدو جہد ہے۔ یہ صبر و مشقت کا مہینہ ہے۔ ہم جانتے ہیں کہ متعدد غزوات اسی ماہ میں ہوئے۔ غزہ بدر و اُحد جیسی جنگیں اسی ماہ میں ہوئیں۔ جنگ خندق کا بڑا حصہ اسی ماہ میں گزرا، تبوک سے واپسی اسی ماہ میں ہوئی۔ ان غزوات سے معلوم ہوتا ہے کہ اللہ کے رسول اس ماہ مبارک میں جہاں عبادت، تلاوت ، قیام اللیل کے لیے کمر کس لیتے تھے، وہیں یہ تصویر بھی سامنے آتی ہے کہ آپ نے عرب کے تپتے صحراؤں سے گزر کر اہم معرکے ، مہمات اور غزوات اس ماہ میں انجام دیئے۔
امیر جماعت نے کہا کہ ہم نے اس موقع پر استقامت اور جدو جہد کا خاص طور پر اس لیے تذکرہ کیا ہے کہ اس وقت ہندوستان کے مسلمان جن حالات سے گزر رہے ہیں، میں سمجھتا ہوں کہ ان دونوں صفات یعنی استقامت اور جدو جہد کی ہمیں خاص طور پر ضرورت ہے۔ حالات چاہے جیسے بھی ہوں، مشکلات جتنی بھی ہوں، ہمیں اپنے اصولوں پر پوری استقامت کے ساتھ ڈتے رہنا چاہئے ۔ ہمیں اپنے ایمان پر اپنے عقیدے پر جمنا ہے۔ اپنے مقصد اور نصب العین پر جمنا ہے ۔ اس کے لیے جو قربانیاں درکار ہوں، جس محنت و مشقت کی ضرورت ہو، اس کے لیے ہر وقت تیار رہنا ہے۔ ہندوستان کے مسلمان ان مشکلات پر قابو اسی وقت پا سکتے ہیں ، اور آزمائشوں کی گھڑی سے اسی وقت سرخرو ہو کر نکل سکتے ہیں ، جب یہ دونوں صفات اپنے اندر پیدا کرلیں گے۔ تو استقامت اور جدو جہد کو ہمیں اس ماہ میں خاص طور پر یاد رکھنا ہے اور کوشش کرنی ہے کہ دیگر مطالبوں کے ساتھ ان دو صفات کو بھی خاص طور پر اختیار کریں۔ ہمارے سامنے عبادت کی ظاہری شکل نہیں بلکہ اس کی روح اور اصل مقصد پیش نظر ہو، اللہ ہم میں تقویٰ، صبر و مواسات اور استقامت و جدو جہد کی صفات پیدا کرے ، آمین۔‘‘ افطار کے اس روح پرورموقع پرتقریبا آٹھ سو مہمانوں میں شہر کی سیاسی ، سماجی ودیگر معز ز شخصیات شامل تھیں ۔