@Sumittyagivats2@RailwaySeva@RailMinIndia सही कहा भाई आपने...
Train टिकट टाइम देख कर कटाते है...
और चलो थोड़ा लेट समझ भी आता है..
पर यहां तो थोड़ा नहीं बहुत लेट हो रहा है..
और दूसरी बात हमको किसी और स्टेशन से ट्रेन चेंज करना है...
वो ट्रेन भी छूठ जा रही है...
पता है तुम्हारी मौजूदगी कैसी है ?
घने कोहरे में
हल्की सी धूप की उम्मीद जैसे
वही धूप जो मद्धम होंने के बावजूद
कोहरे को चीरकर छू लेती है
तुम्हारी मौजूदगी रूह का घेरा है
जिसकी रौशनी से उजाले हैं
ये उजाले वजह हैं जीने की
तुम्हारा होना
जैसे कोहरे में धूप का छनना
पता है ना ...
प्रेमी की नज़र में मैं वफ़ा-दार नहीं हूँ
माँ से दग़ा करने को मैं तैयार नहीं हूँ
पगड़ी पिता की रौंद के मैं इश्क़ निभाऊँ
कैसे करूँ ये जुर्म, मैं गद्दार नहीं हूँ
~ त्रिशिका धरा