अभी भी आंख नहीं खुली है. सैकड़ों पोस्ट देखने के बाद यह लिख रहा हूँ कि अब भी लोग एनकाउंटर पर सवाल नहीं उठा रहे हैं. हां, भरत तिवारी के पक्ष में लोग जरूर हैं. बस अपना दुख और नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. असल सवाल को आवाज देनी होगी. एनकाउंटर, जो असंवैधानिक भी है, इसके खिलाफ खड़ा होना होगा.
#बिहार
क्या जांच कीजिएगा आपने तो अपने बयान में बोला था कि एक मानसिक विक्षिप्त युवक का हथियार लहराते हुए वीडियो viral हुआ है।
फिर आपकी बिहार पुलिस मानसिक विक्षिप्त युवक का गोली मारकर कैसे हत्या कर सकती हैं?
अब जांच का नाटक बंद कीजिए, जनता आपको अगले चुनाव में सबक सिखाएगी
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में दिनांक 17.06.2026 को हुई पुलिस मुठभेड़ की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हेतु उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है। न्यायिक जांच का उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता के साथ जांच सुनिश्चित करना है।
जिस राज्य का मुखिया रेप जैसे जघन्य अपराध पर जाति देखकर बचाव करने लगे उसका बंटाधार होना तय है।
बेगूसराय में एक महिला के घर में घुसकर 5 लोगों ने न सिर्फ रेप किया बल्कि उसके प्राइवेट पार्ट में गोली पत्थर डाल दिए।
चूंकि आरोपी मुरैठा कुमार के सजातीय है इसलिए एनकाउंटर तो भूल ही जाइए।
जबकि भरत तिवारी बिना गुनाह के मारा जाता है और यादव गमछा देखकर मारा जाता है।🫡
नीट रिएग्जाम देने के लिए नागपुर के एक स्टूडेंट ने एडमिट कार्ड डाउनलोड किया तो उसका सेंटर "अबू धाबी" निकला। जो उसके घर से 2500 किमी दूर है। बच्चा रातभर टेंशन में रहा सुबह सोशल मीडिया पर ये वायरल हुआ तो अब NTA की सफाई आई है कि सेंटर नागपुर में ही कहीं दिया जाएगा।
लगता है अब बच्चों को पासपोर्ट भी बनवा लेना चाहिए क्या पता एग्जाम देने कौन सा देश जाना पड़ जाए...✈️
#NEET
#neetexam
......मेरा क्या! मैं तो प्रतिबद्ध हूं सच लिखने को। जिसको बुरा लगे वो 4 रोटी ज्यादा खा सकता है भाजपा का साथ देकर खुद ब्राह्मणों नें मरने और प्रताड़ित होने का रास्ता चुना तो दूसरा कोई क्या कर सकता है | भरत तिवारी कोई पहला नाम तो है नहीं जिसको भाजपा के राज में मारा गया है और ना यह अंतिम नाम है | कुछ ब्राह्मण 2 दिन चिलायेंगे और फिर भाजपा की गुलामी में मस्त हो जायेंगे | 7 दिन की नवविवाहिता ख़ुशी दुबे की क्या गलती थी लेकिन ब्राह्मणों को कोई फर्क पड़ा | कमलेश तिवारी की सुरक्षा हटाई और वो मारा गया ब्राह्मणों को कोई फर्क पड़ा | प्रताड़ित करने वाले कानून हो या कानून को हथियार बनाकर मारना ,प्रताड़ना देना हो सब कुछ हुआ लेकिन ब्राह्मण भाजपा के जरखरीद गुलाम बने हुए है तो इनको कोई फर्क नहीं पड़ना है | भरत तिवारी की मौत पर जो लोग आज अँगुलियों को घिस रहे हैं उनमें से आधे से ज्यादा लोग 4 दिन बाद भाजपा के लिए अँगुलियों को घिसते नजर आयेंगे | ये सत्य है स्वीकार कीजिए 🙏
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार में 2025 तक 16,284 एनकाउंटर हो चुके हैं जिसमें 266 लोग मारे जा चुके है, एनकाउंटर करने वाले अधिकारियों को सरकार की तरफ़ से प्रमोशन और महामहिम राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित तक किया गया, कुछ लोगों के तरफ़ से एक भी एनकाउंटर पर न सवाल उठाया गया और न एनकाउंटर में मारे जाने वाले लोगों की हिस्ट्रीशीट चेक की आज आप एनकाउंटर का विरोध कर रहे हैं जबकि यूपी में 16,284 एनकाउंटरों पर चुप्पी साधकर कुछ लोग ठोंकों नीति का समर्थन करते रहे हैं? अगर विरोध करना है तो हमारी तरह एनकाउंटर नीति का विरोध कीजिए न कि धर्म जाति देखकर एनकाउंटर पर सवाल उठाए जाएं मैं तो कहता हूं एनकाउंटर प्रक्रिया ही गलत है क्योंकि इसकी संविधान में कोई जगह नहीं,
बिहार पुलिस कह रही है कि यह लड़का विक्षिप्त था! कहां से विक्षिप्त लग रहा है? लड़के ने रिवॉल्वर फेंककर सरेंडर कर दिया था। उसके बाद पुलिस ने उसे गोली मार दिया गया। यह निर्मम हत्या है।
हत्यारे पुलिस कर्मियों की तत्काल गिरफ्तारी होनी चाहिए और हत्या का मुकदमा चलना चाहिए!
का हो भरत, बहुत क्रान्तिकारी बनने का शौक चढ़ गया था, पुलिस को हथियार दिखा रहा था, गांव में परिवर्तन लाकर भगत सिंह बनना चाह रहा था, अब हो गया ना एनकाउंटर।
बहुत से लोग यही सोंच रहे होंगे। मैं उन लोगों से पूछना चाहता हूँ कि
जिस देश में ना जाने कितने रेपिस्ट पकड़े जाते हैं, ना जाने कितने गंभीर मामले के अपराधी पकड़े जाते हैं लेकिन पुलिस उनका केवल हॉफ एनकाउंटर करती है,
एनकाउंटर करने के बाद वह यह भी दिखाती है कि अपराधी के पास से हथियार बरामद हुए थे इसलिए गोली चलानी पड़ी।
उसी देश में एक मानसिक रूप से विक्षिप्त, गांव में परिवर्तन की मांग करने वाले, हथियार को फेंक देने के बाद भी भरत भूषण का फुल एनकाउंटर कर दिया जाता है, आखिर क्यों?
भरत भूषण तिवारी की सबसे बड़ी गलती यही थी कि उसने गांव में परिवर्तन लाने की मांग की।
वरना जिस आदमी ने हथियार फेंक दिया हो उसका एनकाउंटर करने की क्या ज़रूरत थी?
आजकल जिसका एनकाउंटर किया जाना चाहिए उसे तो केवल पैर पर गोली मारकर छोड़ दिया जाता है और सही की मांग करने वाले का फुल एनकाउंटर कर दिया जाता है।
नोट : मैं किसी भी निर्दोष व्यक्ति के एनकाउंटर के सख़्त खिलाफ़ हूँ, चाहें वो किसी भी जाति का क्यों ना हो।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे का बड़ा बयान जिन पुलिस वालों ने गोली मारी है, उनको मृत्यु दंड मिले!
उन्होंने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने की भी मांग उठाई।
#JusticeForBharatTiwari
सबसे पहले आपको धन्यवाद कि आपने आवाज़ उठाई।
लेकिन ऋतुराज (@RiturajSinhaBJP) जी, एक सवाल का जवाब भी दीजिए।
जब आप सत्ता में हैं, सिर्फ़ निलंबित क्यों किया गया है? उन पर कठोर से कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
#JusticeForBharatTiwari
भोजपुर के शाहपुर में घटित घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार ने त्वरित कदम उठाते हुए इसमें शामिल पुलिसकर्मियों को निलंबित कर सही कदम उठाया है, लेकिन पूर्ण न्याय के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) की सख्त आवश्यकता है।
#BhojpurNews#Shahpur#BiharPolice #LawAndOrder #JudicialInquiry #BiharGovernment #SocialJustice
आनंद मोहन भी सता के खिलाफ बगावत में हथियार उठाया और भरत तिवारी भी। आनंद मोहन भी क्रांतिकारी थे और भरत तिवारी भी। लेकिन आनंद मोहन के समय Lalu Prasad Yadav सीएम थे जो क्रांति और अपराध कें अंतर को समझते थे। लालू प्रसाद यादव सता से बगावत और अपराध के बीच अंतर समझते थे इसलिए आनंद मोहन हमारे बीच हैं। लालू प्रसाद यादव कभी भी लालू सरकार के विरोधियो का एनकाउंटर नही करवाया न जेल भेजवाया क्योकि वे कायर और डरपोक तथा सत्तालोलुप नही थे।लालू प्रसाद यादव सरकार में आनंद मोहन,प्रभू नाथ सिंह, दिग्विजय सिंह, बिजय कृष्ण सहित दर्जनो विरोधी बाहर थे खुलेआम लालू का विरोध करते थे। एनडीए की नीतिश सरकार बनी फिर भी ऐसा नहीं हुआ आनंद भी क्रांति के लिए कभी सशस्त्र क्रांति का नायक थे। लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार होने के लिए विष पिना होगा शंकर जी की तरह जो सता के खिलाफ उठने वाले आवाज को कभी दबाया नही न कुचला बल्कि आवाज को गुजने दिया।