आपकी हंसी
रघुवीर सहाय
निर्धन जनता का शोषण है
कह कर आप हँसे
लोकतंत्र का अंतिम क्षण है
कह कर आप हँसे
सबके सब हैं भ्रष्टाचारी
कह कर आप हँसे
चारों ओर बड़ी लाचारी
कह कर आप हँसे
कितने आप सुरक्षित होंगे
मैं सोचने लगा
सहसा मुझे अकेला पा कर
फिर से आप हँसे।
Reporter:You said you are not a turncoat like Raghav chaddha few days ago & now u hav ditched TMC
Sayoni: I'm not answerable to you,I don't want to answer you
Reporter:Then why were you calling other turncoat,why running away now
*Sayoni shuts car's door*
Peak Shamelessness
This is how a quintessential Modi bhakt’s brain functions!
No matter how big a predicament the common public faces because of Modi govt’s hocus-pocus policies, he’s invariably right and we’ve just to fall in line and obey his diktats.
At times you’re even asked to sell your 5yo car because Modi wants Ethanol blending with Petrol, and it’s my mistake that I bought a car that isn’t compatible with Modi’s vision. No wonder India is in such a rut.
हिंदू जगाने वालों ने असल में हिंदू को सुला दिया है
वरना मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के मंदिर से 200 करोड़ की चढ़ावा चोरी की ख़बर पर हिंदू ख़ामोश नहीं बैठता।
मैं जम्मू से दिल्ली तक 3rd AC में ट्रेन से सफर कर रहा था। मेरे पास लोअर बर्थ थी। वहां एक बुजुर्ग आंटी और उनकी लगभग 35 साल की बेटी अपने 3–4 साल के बच्चे के साथ यात्रा कर रही थीं।
बुजुर्ग आंटी ने मुझसे कहा कि उनकी सीट मिडिल बर्थ है और वह ऊपर नहीं चढ़ सकतीं। मैं उनकी स्थिति समझ सकता था क्योंकि उन्हें ठीक से चलने में भी परेशानी हो रही थी और उनका वजन भी काफी ज्यादा था, इसलिए मुझे उन्हें अपनी सीट देने में कोई दिक्कत नहीं हुई।
लेकिन फिर उनकी बेटी ने कहा, "जब आप सीट बदल ही रहे हैं, तो आप अपर बर्थ पर चले जाइए। मेरी सीट वहां है और मेरे साथ बच्चा भी है।" मैंने साफ मना कर दिया क्योंकि मैं अपर बर्थ पर नहीं जाना चाहता था। मैं आंटी की परेशानी समझ सकता था, लेकिन उनकी नहीं। अगर वह अपने बच्चे के साथ मिडिल बर्थ पर बैठ सकती थीं, तो फिर एक रात के लिए अपर बर्थ पर क्यों नहीं जा सकती थीं?
इसके बाद उन्होंने मुझे बहुत अजीब तरह के रिएक्शन दिए। मैं मिडिल बर्थ पर चला गया और वह खुद अपर बर्थ पर चली गईं।
बाद में उन्होंने अपने पति को फोन किया। उनके पति ने पूछा कि सब ठीक से एडजस्ट हो गया या नहीं। इस पर उन्होंने कहा, "हां, मैंने मम्मी को लोअर बर्थ पर एडजस्ट कर दिया, लेकिन एक लड़के ने एडजस्ट नहीं किया, इसलिए मुझे अपर बर्थ पर जाना पड़ा।" फिर उन्होंने कहा, "लोग बहुत स्वार्थी होते हैं, कोई किसी और के बारे में नहीं सोचता।"
मुझे समझ नहीं आया कि आखिर उनकी समस्या क्या थी। मैं पहले ही उनकी मां को अपनी सीट दे चुका था। मैं उन्हें अपनी सीट भी क्यों देता? और "मुझे अपर बर्थ पर जाना पड़ा" का मतलब क्या था?
वह तो उनकी अपनी सीट थी। फिर यहां मुझे गलत इंसान क्यों बनाया जा रहा है..?
𝐓𝐖𝐎 𝐈𝐍𝐃𝐈𝐀𝐒
𝐕𝐀𝐍𝐃𝐄 𝐁𝐇𝐀𝐑𝐀𝐓 𝐅𝐎𝐑 𝐓𝐇𝐄 𝐄𝐋𝐈𝐓𝐄, 𝐒𝐔𝐅𝐅𝐎𝐂𝐀𝐓𝐈𝐎𝐍 & 𝐃𝐄𝐀𝐓𝐇 𝐅𝐎𝐑 𝐓𝐇𝐄 𝐑𝐄𝐒𝐓.
This is What Happens When You Vote For Religion, Temples & Polarization instead of Governance, Jobs & Basic Infrastructure.
𝐀 𝐘𝐨𝐮𝐧𝐠 𝐄𝐱𝐚𝐦 𝐂𝐚𝐧𝐝𝐢𝐝𝐚𝐭𝐞 𝐃𝐢𝐞𝐬 Inside A Packed, Airless General Train At Patliputra Station Amid Bihar Exam Day Chaos. 16+ lakh Desperate Youth Fighting For A Handful Of Posts.
Overcrowding. Delays. No Arrangements. Result? A Metal Coffin On Tracks Where People Gasp For Their Last Breath.
#Bihar #apollotyres #INDvsPAK
Govt's own Oil Ministry: 'Ethanol-blended fuel can't be cheaper as costs now surpass petrol.'
So why is E20 mandatory at the pump, with lower mileage and no price cut?
ये दूसरे भारत का युवा है
परीक्षा देने निकला था, भीड़, गर्मी और प्यास के कारण रास्ते में ही दम तोड़ गया.. हम जब ऐसी में सो रहे थे तब ये सदा ले लिए सो गया 🥲🥲
90 डिग्री एंगल के फ्लाईओवर और ऐसी सड़कें-फ्लाईओवर बनाना जो आखिर में जाकर खेत में खुलें, इन कारनामों के बाद BJP सरकारें हर राज्य में अपने मूर्खतापूर्ण प्रदर्शन के लिए प्रसिद्ध हो रही हैं।
मध्य प्रदेश में 2021 में खजुराहो-पन्ना रेलमार्ग अप्रूव हुआ। 2022-23 में इसे बनाने के लिए 54,000 पेड़ काटे गए, और उसके बाद रेल विभाग को लगा कि, रूट गलत हो गया है, तो मध्य प्रदेश के वन विभाग से उन्होंने और 32,000 पेड़ काटकर नया रास्ता बनाने की बात की, जिसमें उन पेड़ों को चिन्हित भी कर दिया गया है जिन्हें काटना है।
BJP की सरकार में राज्य चाहे कोई भी हो, ऐसे मूर्ख लोग हैं कि प्लानिंग की स्टेज में लापरवाही करते हैं और उसके बाद, बिना किसी रिग्रेट के, बिना किसी जवाबदेही के, दोबारा दूसरा बखेड़ा खड़ा कर देते हैं।
बेहद शर्मनाक है कि पर्यावरण के साथ इस तरह का छल किया जा रहा है, और पन्ना-खजुराहो रेलवे लाइन अनंतकाल तक अपने बनने की प्रतीक्षा में है।
“एक पेड़ मां के नाम” का स्वांग भरना और 80,000 से ज़्यादा पेड़ एक झटके में काट देना, यह केवल ढोंगियों और पाखंडियों की सरकार ही कर सकती है!
स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्रों ने गूगल के सीईओ सुंदर पिचई का बहिष्कार कर दिया। गूगल ने अभी इस्राइल की हत्यारी सेना आईडीएफ के साथ समझौता किया है।
अमेरिका की ट्रम्प सरकार इस समय फिल्स्तीन के नाम से ही भड़कती है और तुरंत कार्रवाई करती है। मगर छात्रों ने ये हिम्मत दिखाई, उनको शाबाशी।
क्या भारतीय एकेडिमिया, छात्र जगत इस तरह की जागरूकता कभी दिखाएगा.....शायद नहीं, क्योंकि वह दौर ही चला गया जब छात्र जगत दुनिया भर के अत्याचारों के ख़िलाफ़ खड़े होते थे। मेरा नाम, तेरा नाम वियतनाम वियतनाम के नारे लगाते थे।