अब भी अगर बिहार पिछड़ा रह गया, तो इसके लिए सिर्फ राजनीतिक पार्टियाँ ज़िम्मेदार नहीं होंगी। इसके ज़िम्मेदार आज के नए-नवेले "जाति विशेषज्ञ" युवा भी होंगे, जिन्हें लगता है कि दिन-रात जातीय विश्लेषण करके वे बिहार का भला कर रहे हैं।
उन्होंने बिहार का वह दौर देखा ही नहीं, जब जातिवाद का नारा लगाकर लोग रातों-रात नेता बन जाते थे। उसके बाद बिहार का क्या हाल हुआ, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य आज भी पिछड़ा है और अगर यही सोच जारी रही, तो कल भी पिछड़ा ही रहेगा।
आजकल नया-नया जाति विश्लेषक बनने का शौक चढ़ा है। लेकिन अगर उनसे पूछ लीजिए कि बिहार का ऐसा कौन-सा नेता है, जिसने जाति से ऊपर उठकर राज्य के विकास की राजनीति की, तो जवाब देने के बजाय आसमान ताकने लगेंगे।
बिहार को एक बार फिर उसी दलदल में धकेलने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
#Bihar
अयोध्या में जब राम मंदिर का निर्माण शुरू हुआ था, तब कमेटी, ग्रुप आदि बनाकर मंदिर के नाम पर खूब रसीद काटी जा रही थी। दावा था कि पैसा सीधे अयोध्या जाएगा और भगवान राम के मंदिर के लिए खर्च होगा। जब मंदिर में चढ़ाया धन सुरक्षित नहीं बचा तो उन पैसों का क्या हुआ होगा?
क्या बिहार में फिर से जंगलराज लौट आया है?
भरत तिवारी के लिए न्याय की मांग करने वालों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। रूपेश तिवारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया क्योंकि उन्होंने भरत तिवारी के समर्थन में आवाज उठाई और सत्ता से सवाल पूछा। रायबरेली के दीपक दीक्षित पर भी कार्रवाई की बात सामने आ रही है क्योंकि उन्होंने न्याय की मांग की।
सम्राट चौधरी आखिर बिहार में कानून का राज चल रहा है या फिर सवाल पूछने वालों को निशाना बनाने का दौर? अगर न्याय की मांग करना, सरकार से जवाब मांगना और अपनी बात रखना अपराध बन जाएगा, तो इसे लोकतंत्र नहीं कहा जा सकता।
देश में सब लॉबी हैं। एथनॉल मिलावट पर बोलने वाले तो सबसे बड़े। बस गडकरी और कुछ कांग्रेसी नेताओं को छोड़ के जिनके अपने प्लांट हैं। इनकी लॉबी नहीं है। आम जनता लॉबी है। गडकरी साहब के महीने भर पुराने हाईवे पर डेढ़ फुट के गड्ढे हैं पर इन्हें लॉबी की फ़िकर है बस।
This was too depressing to watch!
Two college girls were electrocuted after rainwater under Nerul's LP Bridge became electrified due to a short circuit.
These politicians are living lavishly while ordinary people are left to die.
मंत्री जी की निर्लज्जता चरम सीमा को छू चुकी है। आरटीआई का ये लोग जवाब नहीं देते, मुद्दे की बात ना बता के इधर उधर की बकवास पेलते रहते हैं और सवाल पूछने वालों को अब लॉबी वाला बता दिया है। अहंकार पतन की पहली सीढ़ी है गडकरी जी।
गया जिला सांसद: जीतन राम मांझी
इमामगंज विधायक : दीपा कुमारी ( जीतन चा के घर की बहू)
गया जिले के इमामगंज विधानसभा के बांके बाजार में एक रेहान अंसारी नाम के लड़के ने दलित समुदाय के आधा दर्जन बालिग एंड नाबालिग लड़कियों के ग़लत काम किया और वीडियोज वायरल कर दिया ।
उसके फ़ोन चैट्स से पता चला कि 20 और लड़किया उसके टारगेट पर थी । 22 जून की दोपहर को बाँके पहाड़ी पर कुछ स्थानीय लोगों ने उसे एक नाबालिग लड़की के साथ अपतिजनक स्थिति में पकड़ा था फिर वहाँ से वो भाग निकला और आजतक पुलिस के गिरफ्त से फरार है ।
सवाल ये है कि जीतन राम मांझी और दीपा कुमारी दोनों ने अभी तक इस वीभत्स घटना पर एक भी बयान नहीं दिया है, अपने ही समाज की बेटियों से हुए दुर्व्यवहार पर चुप क्यों हैं?
वोट लेंगे लेकिन उनके खिलाफ हुए अत्याचार पर चुप्पी साध लेंगे? उनके वोट ने दलित समाज के वोट ने आपके पूरे खानदान का करियर सेट कर दिया लेकिन आप क्या कर रहे हैं अपने समाज के लोगों के लिए?
आप नहीं तो आपकी बहू ही सही ? कोई तो बाँके बाज़ार जाइए पीड़ित परिवार से मिलिए ।
12 वर्षीय अनाथ सुनील तिर्की, दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर! दाने-दाने को तरस रहा मासूम...
हजारीबाग (झारखंड): केरेडारी प्रखंड के अंतर्गत फुसरी गांव का निवासी 12 वर्षीय अनाथ बालक सुनील तिर्की आज दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। इस मासूम का इस दुनिया में कोई सहारा नहीं है। आलम यह है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण इस बच्चे का अब तक न तो जन्म प्रमाण पत्र बन पाया है और न ही आधार कार्ड। यही वजह है कि आज तक इस अनाथ बच्चे को किसी भी प्रकार की सरकारी मदद का लाभ नहीं मिल सका है।
यह 12 साल का मासूम इस उम्र में पढ़ाई करने के बजाय पेट पालने के लिए मजदूरी करने को मजबूर है। लाचारी इतनी बड़ी है कि रोज काम न मिलने के कारण उसे कई दिन और रातें भूखे रहकर, सिर्फ पानी पीकर बितानी पड़ती हैं। आर्थिक तंगी और इस भीषण मजबूरी के कारण वह स्कूल भी नहीं जा पा रहा है।
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रिशू सिन्हा और नौकरशाही की भ्रष्टाचारी लॉबी को एक्सपोज़ करने वाले IPS पंकज दराद को विशेष निगरानी इकाई (SVU) पद से हटाया गया।
बड़े-बड़े मगरमच्छ फंसा दिए थे इन्होंने, इसलिए सरकार ने इनाम में पुलिस भवन निर्माण निगम में ट्रांसफर कर दिया है। रूटीन ट्रांसफर दिखाने के लिए साथ में 12 और का ट्रांसफर हुआ है। इस केस में पहले ही कुछ पर सबूत कम होने पर FIR नहीं हुई, फिर कोर्ट ने इस मामले में रिपोर्टिंग कैसी करनी है, उसके निर्देश दिए। कुछ आरोपित फरार बताए जा रहे हैं।
ना खाऊंगा ना खाने दूंगा? 🙆
वाह मोदी जी वाह, क्या सरकार बना कर गए हैं आप 👌
कांग्रेस चाहिए नहीं, आरजेडी चाहिए नहीं, एनडीए से खुश हैं नहीं, और जन सुराज पर भरोसा नहीं।
तो बिहार के राजनीतिक विशेषज्ञ... सॉरी, जाति विशेषज्ञ बताइए कि बिहार के सामने राजनीतिक विकल्प क्या है?