कॉकरोच पार्टी से इस आंदोलन का कोई लेना देना नहीं है. हम इसको बिल्कुल भी पॉलिटिकल नहीं बनाना चाहते.
कॉकरोच पार्टी वाले तो दिल्ली में 4 घंटे नहीं टिक पाए, तो यहां धूप में कहां टिकेंगे.
अमेरिका में रहने वाला आदमी 40 मिनट भी नहीं टिक पाएगा.
- लखनऊ के इको गार्डन के प्रदर्शनकारी
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कुछ लोगों को ये पोस्ट खराब लगेगी, लेकिन मेरा काम है कि आपको हकीकत बता दूं.
ये प्रोटेस्ट पहले दिन से कोचिंग सेंटर्स की ओर से बुलाया गया था. इनकी मांग भी अलग है, और सारी मांगें यूपी सरकार से हैं -
1. लेखपाल भर्ती की परीक्षा फिर से हो
2. UP SI का स्कोर कार्ड जारी हो
बाकी कुछ घंटों में आपको बताया जाएगा कि कॉकरोच के बुलावे पर भयंकर भीड़ जुट गई, जब���ि सच्चाई कुछ और ही है.
मा. राज्यसभा सांसद @SanjayAzadSln जी, समस्त जनप्रतिनिधियों, न्यायविदों एवं समाज की अंतरात्मा को झकझोरता यह एक बेहद पीड़ादायक संदेश है। यह राजनीति से परे, दो युवाओं के जीवन के उस कठिन संघर्ष की दास्तां है, जिसे सुनकर किसी भी संवेदनशील इंसान का भावुक होना स्वाभाविक है।
अत्यंत भारी मन से सबको याद दिलाना पड़ रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम में ध्यान केवल एक चेहरे पर सिमट कर रह गया है। छात्र नेता आशुतोष पांडे के साथ-साथ एक अन्य अत्यंत साधारण परिवार का बेटा, छात्र नेता पंकज पांडे भी उसी विपरीत परिस्थिति का दंश झेल रहा है। दोनों का संकट एक है, दोनों का नुकसान एक है, बस फर्क इतना है कि एक की विवशता को मीडिया का साथ मिल गया और दूसरे की आवाज अनसुनी रह गई।
परिस्थितियों का यह अंतर बेहद चिंताजनक है:
आशुतोष पांडे: इन्हें सर्किट हाउस के सामने से जब हिरासत में लिया गया, तो वहां कुछ साथी और स्थानीय मीडियाकर्मी मौजूद थे। वीडियो बन गया, प्रसारित हुआ और वह मामला व्यवस्था की नजरों में आ गया।
पंकज पांडे: लेकिन इस घटना से ठीक 2 घंटे पहले, पंकज पांडे को सीज की जा चुकी 'मारूफ सर की क्लाइमेक्स कोचिंग' के सामने से जब ले जाया गया, तो वहां कोई कैमरा नहीं था। डिजिटल दुनिया के इस दौर में एक छात्र का संघर्ष इसलिए सुर्खियों से ओझल रह गया क्योंकि ��सकी परिस्थिति का कोई गवाह नहीं बन पाया। क्या बिना वीडियो के किसी की परेशानी, परेशानी नहीं होती?
एक छात्र के जीवन का सबसे कठिन मोड़:
वीडियो का न होना तो सिर्फ एक बात है, लेकिन जो सबसे बड़ा और अपूरणीय नुकसान इन दोनों छात्रों को हुआ है, वह है इनकी TGT (शिक्षक भर्ती) की परीक्षा का छूट जाना।
एक प्रतियोगी छात्र का जीवन क्या होता है, यह केवल वही जान सकता है जिसने प्रयागराज की तपती गर्मी और हाड़ कंपान�� वाली ठंड में, एक छोटे से कमरे में सीमित संसाधनों के साथ रातें काटी हों। सालों की तपस्या, रातों की नींद, किताबों पर झुकी रीढ़ की हड्डी, और बूढ़े माता-पिता की कमजोर आँखों में तैरते हुए सपने—यह सब कुछ इस एक परीक्षा के दिन पर टिका था।
परीक्षा छूटने का मतलब सिर्फ एक अवसर का जाना नहीं है, बल्कि एक पूरे मध्यमवर्गीय ��रिवार की उम्मीदों का टूट जाना है। घर पर राह देख रहे उन बूढ़े मां-बाप पर क्या गुजर रही होगी, जिनके बेटों का भविष्य आज संकट में है? एक छात्र के लिए इससे कष्टदायक कुछ नहीं हो सकता कि उसकी बरसों की मेहनत परीक्षा केंद्र के दरवाजे के बाहर ही समाप्त हो जाए। दोनों ही छात्रों का जीवन इस मोड़ पर आकर पूरी तरह प्रभावित हो चुका है, जिसकी भरपाई आसान नहीं है।
अतः माननीय सांसद जी, छात्र संगठनों और समाज के हर उ�� व्यक्ति से, जिसके भीतर मानवीय संवेदनाएं जीवित हैं, सादर अपील है कि पंकज पांडे के इस खामोश दर्द को भी उतनी ही शिद्दत से महसूस किया जाए। न्याय और सहानुभूति में वीडियो के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। इन दोनों छात्रों को इस संकट से निकालने के लिए मानवीय और वैधानिक स्तर पर हर संभव प्रयास किया जाए। इन्हें सुरक्षा, सहानुभूति और अविलंब कानूनी राहत दी जाए ताकि इनके भविष्य को सुरक्षित किया जा ���के।
#JusticeForStudents #PankajPandey #AshutoshPandey #TGTAspirants #StudentsPain
प्रयागराज में पेपरो में हो रही धांधली, चरमराती शिक्षा व्यवस्था, फेल हो रहे सिस्टम और सरकार के खिलाफ हजारों छात्रों और युवाओं साथियों ने जो हुंकार भरी है यह जरूर सरकार और आयोग के कानो को चुभ रही होंगी यह चेतावनी है युवाओं की सिस्टम को, कि अगर सिस्टम युवाओ के भविष्य के साथ खिलवाड़ करेगा तो युवा भी चुप नहीं बैठेंगे,
क्योंकि खामोश��� तब तक रहती है जब तक उम्मीद रहती है, लेकिन जब उम्मीद टूटती है तो आंदोलन जन्म लेते हैं।
दिल्ली तक पहुँच गयी है आवाज💪
अगर विपक्ष तक पहुँची है तो सत्ता पक्ष तक भी जरूर पहुँच चुकी है हमारी बात।
आवाज दो... हम एक हैं
UPSSSC लेखपाल, SSC GD, UPSI एवं सभी अन्य सभी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों! अगर 10 जून तक निर्णय नहीं हुआ तो हम मिलते हैं 12 जून को लखनऊ Eco Garden में
प्रयागराज की सड़कों पर उमड़ा प्रतियोगी छात्रों का ग़ुस्सा सिर्फ़ एक परीक्षा का विरोध नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ़ आवाज़ है जिस पर युवाओं का भरोसा लगातार टूटता जा रहा है। लेखपाल भर्ती परीक्षा को निरस्त कर निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग कर रहे छात्रों का कहना है कि भाजपा सरकार में भर्ती परीक्षाएं अब मेहनत नहीं, बल्कि अव्यवस्था और संदेह का प्रतीक बन चुकी हैं।
पेपर लीक, धांधली और लगातार उठते सवालों ने प्रतियोगी युवाओं के भविष्य को असुरक्षा के अंधेरे में धकेल दिया है। मेहनत करने वाला छात्र आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
प्रयागराज की सड़कों पर उमड़ा प्रतियोगी छात्रों का ग़ुस्सा सिर्फ़ एक परीक्षा का विरोध नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ़ आवाज़ है जिस पर युवाओं का भरोसा लगातार टूटता जा रहा है। लेखपाल भर्ती परीक्षा को निरस्त कर निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग कर रहे छात्रों का कहना है कि भाजपा सरकार में भ���्ती परीक्षाएं अब मेहनत नहीं, बल्कि अव्यवस्था और संदेह का प्रतीक बन चुकी हैं।
पेपर लीक, धांधली और लगातार उठते सवालों ने प्रतियोगी युवाओं के भविष्य को असुरक्षा के अंधेरे में धकेल दिया है। मेहनत करने वाला छात्र आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
UP लेखपाल पेपर लीक मामले में बड़ी खबर 🚨🚨👇👇 Big News
लेखपाल भर्ती परीक्षा में भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप पर FiR दर्ज 👇👇
शिक्षक और सपा नेता - नवीन शर्मा
शिक्षक अमित पाण्डेय (UP GK)
रोहित धनगर, शिव सिंह और अन्य
सरकार ने अपनी तानाशाही चालू कर दिया 🧐
आप क्या कहना चाहेंगे इस पर " क्या ऐसा करना उचित है या एक बार बच्चों की बात मान के जांच करवा लेना " ❓
#लेखपाल_पेपर_लीक
#लेखपाल_भर्ती
#lekhpalधांधली #UPSSSC #Bignews #Lekhpal_Exam_Investigation
◆NEET पेपर लीक
◆CBSE एग्जाम शीट चेकिंग घोटाला
◆UPSC के प्रिलिम्स पेपर को लेकर सवाल
◆OSM की भयंकर गड़बड़ी
◆9 वी क्लास के बच्चों पर थोप दी गई तीसरी भाषा
◆UPSSSC लेखपाल पेपर लीक
◆बढ़ती बे���ोजगारी व महंगाई
◆डीजल पेट्रोल व गैस के दाम आसमान पर
छात्र जाएं तो कहाँ जाएं ?