राकेश टिकैत जी आपको मेरा दिल से सलाम है असली 56 इंच का सीना आपका है जो कि अपने किसान भाइयों के लिये तानाशाही सरकार के सामने डटे हुए है।
जय जवान जय किसान 🇮🇳
@maryada_maurya
छतरपुर जिले के राजनगर थाना क्षेत्र के कोड़ा गांव में हुए गोलीकांड मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस के अनुसार, इस मामले में दर्ज एफआईआर के आधार पर कार्रवाई करते हुए शालिग्राम गर्ग और अंकित मिश्रा को गिरफ्तार किया गया है. शालिग्राम गर्ग बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का भाई है.
#shaligramgarg #dhirendrashastri #mpnews #mppolice #abpnews
आज मैं पटना से दिल्ली(Flight: SG2478,PNR-IJ9L5E) @flyspicejet यात्रा कर रहा हूं| मेरे पास केवल एक हैंड बैगेज था जिसका वजन करीब 12 kg था स्पाइस जेट के चेक इन स्टाफ ने मेरे साथ बत्तमीजी के साथ साथ हैंड बैगेज के लिए 3750 रुपये अलग से लिये। मै एक पॉलिटिशियन हूं।
फ्लाइट का समय 11:30 मिनट पर था अभी 12:00 बज रहा है लेकिन टेकऑफ का इंतजार। ?
कृपया इसको गंभीरता से देखा जाय। अगर इस तरह की असुविधा होगी तो कोई भी #spicejet से यात्रा नहीं करेगा।
@PatnaAirport
विधवा महिला ने अपनी डेढ़ बीघा जमीन को बचाने के लिए पुलिस और बाबा के सामने पेट्रोल छिड़का.!
जनपद मथुरा के थाना शेरगढ़ स्थित ग्राम गढ़ी भीमा में क्षेत्र के भू माफिया बाबा ललता दास दंबगई और पैसों के दम पर जमीन हड़पने की कर रहा है साजिश..!
एक अकेली महिला और उसके तीन छोटे छोटे बच्चों पर पॉवर का कर रहा ग़लत इस्तेमाल उसके हक की जमीन पर जबरन चलाई जेसीबी।
@Uppolice कृपया मामले का संज्ञान लें और महिला के साथ न्याय करें।
वीडियो को ज्यादा से ज्यादा रीट्वीट करें जिससे एक गरीब विधवा और उसके तीन बच्चों की मदद की जा सके।🙏
निशांत कुमार को 3 महीने पहले कोई नहीं जानता था।
लोगों को लगा कि नीतीश कुमार के बेटे हैं इसलिए डायरेक्ट मिनिस्टर बना दिए गए।
बहुत लोगों ने हेल्थ को लेकर मज़ाक उड़ाया। मैं खुद गलत निकला।
केवल 2 महीने हुए हेल्थ मिनिस्टर बने, और मीडिया के सामने का बयान सुन लो ऐसा लग रहा है कोई बहुत पढ़ा लिखा बंदा बोल रहा हो।
मोदी जी ख़ुद मीडिया के सामने आज तक ऐसा बयान नहीं दिए होंगे।
राज्यहित एवं सामाजिक सरोकारों के दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर मैं भोजपुर ज़िले के जगदीशपुर में आगामी 5 जुलाई 2026 आयोजित होने वाले बहुजन महापंचायत के आयोजन कर्ताओं से आग्रह करता हूँ कि बड़ा दिल दिखाते हुए उक्त महापंचायत को फ़िलहाल स्थगित कर दें।
वर्तमान हालात में हमें संयम से काम लेना होगा,कुछ लोग इस फ़िराक़ में हैं कि कुछ भी ग़लत हो और तोहमत हमारे उपर लगा दिया जाए।
ये वक़्त बड़ा दिल दिखाने का है।
बिहार मंत्रिपरिषद की बैठक में पाँच नए केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना हेतु 5-5 एकड़ आवश्यक सरकारी भूमि को उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई है।
स्वीकृत प्रस्तावों के अंतर्गत-
📍 पूर्णिया पूर्व (मौजा–मधुबनी, जिला पूर्णिया)
📍 राजगीर (मौजा–पिलखी, जिला नालंदा)
📍 शेखपुरा (मौजा–नीमी, जिला शेखपुरा)
📍 मधेपुरा (मौजा–साहुगढ़, जिला मधेपुरा)
📍 मधुबनी (अंचल–राजनगर, मौजा–सतिहारपुर, जिला मधुबनी)
इन पाँच नए केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना से बिहार के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक शैक्षणिक संसाधन एवं बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध होगा।
#CabinetDecisions #विकसित_भारत #समृद्ध_बिहार #Education #KendriyaVidyalaya #NDA4Bihar #NewBihar #TransformingBihar
पटना के फुलवारीशरीफ में जनता को संबोधित करते हुए सीएम सम्राट चौधरी ने कहा, 'बिहार के अपराधियों को नेपाल ही भागना पड़ेगा, यूपी में योगी बाबा है, बंगाल में दादा है यहां सम्राट बैठा है. कोई माई का लाल बिहार में कानून के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता. जो अपराधी है उसको बिहार छोड़ना ही पड़ेगा'
#bihar #samratchaudhary #yogiadityanath #suvenduadhikari #abpnews
आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ।
बिहार के क्रिकेट "इमोशन" के लिए सरकार स्पष्ट "विजन" के साथ "मिशन" मोड में कार्यरत है। आपके सहयोग से निश्चित ही बिहार की क्रिकेट टीम को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
ISRO के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रवीण मौर्य का मामला सिर्फ एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं, बल्कि संस्थाओं की जवाबदेही का सवाल है।
जिस वैज्ञानिक ने गगनयान मिशन की संवेदनशील जानकारी लीक होने का विरोध किया, उसी पर आरोप लगा दिए गए। बिना पारदर्शी जांच के उन्हें “गद्दार” कहा गया, निलंबित किया गया और मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ा।
अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए मानवाधिकार आयोग को सौंपा है। ईमानदार लोगों को सज़ा नहीं, न्याय मिलना चाहिए।
#प्रवीण_मौर्य_को_न्याय_दो
अमित मौर्य नाम का ये व्यक्ति लगातार एक छोटी बच्ची जो अभी 10 में पढ़ती है उनके लिए गाली लिख रहा है और धमकी दे रहा है इसका न.88149 7228 है @Uppolice संज्ञान में लें...!!
अखिलेश यादव के सजातीय खुलेआम कोइरी समाज के बारे में अपना विचार व्यक्त कर रहे हैं।
कोइरी समाज एकबार आने वाले चुनाव में एक मुस्त वोट देकर विजयी बनायें और अहिरौटी का दौर वापस आये।
बरेली में देवेंद्र मौर्य की बारात 25 अप्रैल को जानी थी। उसी दिन सुबह उनकी लाश आम के पेड़ में लटकी मिली। एक दिन पहले हल्दी हुई थी, उसमें देवेंद्र नाच रहा था। एकदम खुश था। किसी तरह की चिंता नजर नहीं आई। फिर अचानक क्या हुआ, किसी को समझ नहीं आ रहा।
जिस जगह लाश मिली है, वहां कई सवाल हैं। जैसे देवेंद्र का पैर जमीन मुड़ा हुआ था। पैर में चप्पल भी पहने हुए था। लाश जमीन से मुश्किल से 3 इंच पर थी। ये सब देखने के बाद घर के लोग हत्या के एंगल पर भी जांच करने की मांग कर रहे हैं।
देवेंद्र की जिस लड़की से शादी होनी थी, उससे वह लगातार बात करता था। कभी किसी तरह की कोई अजीब बात नहीं बताई। 2 दिन पहले देवेंद्र कोट-पैंट वगैरह लेकर आया था। घर के लोगों के लिए भी वही आगे बढ़कर कपड़ा खरीद रहा था।
पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है।
बिहार की राजनीति में कोईरी से कुशवाहा बनने का सफर… और अब CM की दावेदारी तक की लड़ाई
बिहार की राजनीति में कुशवाहा (कोईरी) समाज का सफर समझना है तो इसे साल-दर-साल, दौर-दर-दौर देखना पड़ेगा। यह कोई एक दिन का उभार नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे बना हुआ राजनीतिक उत्थान है।
सबसे पहले पीछे चलते हैं औपनिवेशिक दौर में। 18वीं और 19वीं सदी में कोईरी समाज की पहचान एक कुशल कृषक के रूप में थी। खासकर सब्जी उत्पादन और अफीम की खेती में इनकी मजबूत पकड़ थी। अंग्रेजों के दस्तावेजों में इन्हें मेहनती और आर्थिक रूप से अपेक्षाकृत सक्षम किसान बताया गया। यही वह समय था जब इस समाज ने जमीन और उत्पादन के जरिए अपनी आर्थिक नींव मजबूत की।
फिर 20वीं सदी की शुरुआत में एक बड़ा बदलाव आता है। 1922 में अखिल भारतीय कुशवाहा क्षत्रिय महासभा का गठन होता है। यहीं से “कोईरी” से “कुशवाहा” बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। यह सिर्फ नाम बदलना नहीं था, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ाने की कोशिश थी। खुद को भगवान राम के पुत्र कुश का वंशज बताकर इस समाज ने अपनी पहचान को ऊपर उठाने का प्रयास किया।
आजादी के बाद असली टर्निंग पॉइंट आता है। 1950 में बिहार भूमि सुधार अधिनियम लागू होता है। इस कानून ने जमींदारी व्यवस्था को तोड़ा और जो किसान जमीन पर काम कर रहे थे, उन्हें मालिक बनने का मौका मिला। इसका सबसे ज्यादा फायदा यादव, कुर्मी और कोईरी जैसी जातियों को मिला। यहीं से यह समाज आर्थिक रूप से मजबूत हुआ और गांव की सत्ता संरचना में ऊपर आने लगा।
1960 और 70 का दशक इस समाज के लिए वैचारिक क्रांति का दौर रहा। जगदेव प्रसाद का उदय होता है। 1967 में उन्होंने शोषित दल बनाया और 1968 में उनके समर्थन से सतीश प्रसाद सिंह कुछ दिनों के लिए बिहार के मुख्यमंत्री बने। यह घटना प्रतीकात्मक रूप से बहुत बड़ी थी, क्योंकि पहली बार पिछड़ी जाति सत्ता के शीर्ष तक पहुंची।
1974 में जगदेव प्रसाद की पुलिस गोलीबारी में मौत हो जाती है, लेकिन उनकी विचारधारा पूरे बिहार में फैल जाती है।
इसी दौर (1970-90) में एक और धारा चलती है-नक्सल आंदोलन। भोजपुर, गया, रोहतास जैसे इलाकों में कई कुशवाहा युवा वामपंथी आंदोलनों से जुड़ते हैं। यह दिखाता है कि यह समाज सिर्फ चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि सामाजिक बदलाव के लिए संघर्ष भी कर रहा था।
अब आते हैं 1990 के दौर पर, जो बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जाता है।
1990 में लालू प्रसाद यादव सत्ता में आते हैं और मंडल राजनीति शुरू होती है। शुरुआत में यादव, कुर्मी और कुशवाहा एक साथ रहते हैं। लेकिन धीरे-धीरे यादवों का वर्चस्व बढ़ता है, जिससे अन्य पिछड़ी जातियों में असंतोष पैदा होता है।
1994 में “कुर्मी चेतना रैली” होती है और यहीं से नया राजनीतिक समीकरण बनता है।
इसके बाद नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस मिलकर समता पार्टी बनाते हैं। यह “लव-कुश” (कुर्मी-कुशवाहा) गठबंधन की शुरुआत थी। 1996 में बीजेपी के साथ गठबंधन होता है और धीरे-धीरे यह गठबंधन मजबूत होता जाता है।
2005 में बड़ा बदलाव आता है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनती है। कुशवाहा समाज इस सत्ता परिवर्तन का अहम हिस्सा होता है। लेकिन 2010 के बाद यह भावना बढ़ने लगती है कि सत्ता में कुर्मी और अति पिछड़ों को ज्यादा जगह मिल रही है, जबकि कुशवाहा समाज पीछे छूट रहा है।
यहीं से 2013-14 के आसपास एक नया चेहरा उभरता है-उपेंद्र कुशवाहा।
2013 में वे RLSP बनाते हैं और 2014 में बीजेपी के साथ गठबंधन कर केंद्र में मंत्री बनते हैं। यह पहला मौका था जब कुशवाहा समाज का एक नेता स्वतंत्र ताकत के रूप में उभरता है और यह साफ संकेत देता है कि यह समाज अब बंधुआ वोट बैंक नहीं रहेगा।
2015 के आसपास राजनीति में एक नया मोड़ आता है... पहचान की राजनीति।
सम्राट अशोक और चंद्रगुप्त मौर्य को कुशवाहा समाज से जोड़कर एक नई “मौर्य पहचान” बनाई जाती है। इससे समाज के भीतर गौरव और आत्मविश्वास की भावना बढ़ती है।
2020 के बाद राजनीति और ज्यादा बिखरती है। कुशवाहा समाज एक नेता के पीछे नहीं रहता, बल्कि कई हिस्सों में बंट जाता है... कहीं जदयू, कहीं बीजेपी, कहीं राजद, तो कहीं वामपंथ के साथ।
2023 में सम्राट चौधरी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बनते हैं और बाद में डिप्टी सीएम भी। यह बीजेपी की नई रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह ओबीसी नेतृत्व को आगे बढ़ाकर अपना आधार मजबूत करना चाहती है।
2024 का लोकसभा चुनाव इस पूरे सफर का सबसे बड़ा प्रमाण बनकर सामने आता है।
हर पार्टी कुशवाहा वोट के लिए संघर्ष करती है। तेजस्वी यादव कई सीटों पर कुशवाहा उम्मीदवार उतारते हैं। औरंगाबाद जैसी पारंपरिक सवर्ण सीट पर भी कुशवाहा उम्मीदवार जीत जाता है।
Samrat Choudhary अब आ चुके हैं___
मैं सम्राट चौधरी का प्रशंसक नहीं। उसे जब-जब आगे बढ़ाया गया विरोध ही किया।
बिहार बीजेपी में भी उसके विरोधी कम नहीं हैं। बिहार में बीजेपी के जो समर्थक हैं, उनमें भी बड़ा वर्ग उसे बाहरी मानता है।
पर प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी को बड़ा नेता बना दिया है। एक भी आरोप में दम नहीं है।
तात्कालिक तौर पर कई लोगों को लग रहा है कि सम्राट चौधरी का पत्ता कट गया है। मुझे ऐसा नहीं लगता। उलटा पिछड़े और मजबूती से उसके पक्ष में गोलबंद होंगे। कुछ ही दिनों में सम्राट 'पीड़ित' दिखेंगे। ऐसा प्रतीत होगा कि उन्हें जान बूझकर टारगेट किया/करवाया गया था।
आज पिछड़े वर्ग के युवा बड़ी तादाद में जनसुराज के कट्टर समर्थक हैं। कुछ दिनों में उन्हें आभास हो जाएगा कि पिछड़े होने के कारण ही उनके नेता प्रशांत किशोर ने सम्राट को टारगेट किया है।
कुल मिलाकर सम्राट चौधरी अब अगले 20 साल तक बिहार में पिछड़ों का सबसे बड़ा नेता रहेगा। जन सुराज का कोई भविष्य न रहेगा।
बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व यही चाहता था। एक ऐसा पिछड़ा नेता, जिसके सामने लालू के बाल-बच्चे खड़े न हो सके। ऐसा पिछड़ा नेता जो बिहार की सत्ता में बीजेपी को अकेले भी स्थापित करने में सक्षम हो।
बिहार में नीतीश के बाद एक ही 'सम्राट' रहेगा, सेव करके रख लीजिए।
भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा मुझ पर विश्वास जताते हुए #भाजपा_बिहार_विधानमंडल_दल के #नेता का दायित्व सौंपने पर हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
यह मेरे लिए केवल एक पद नहीं, बल्कि बिहार की जनता की सेवा, उनके विश्वास और सपनों को साकार करने का एक पवित्र अवसर है। मैं पूर्ण निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी के साथ जन-जन की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का संकल्प लेता हूँ।
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के कुशल नेतृत्व एवं माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री @NitinNabin जी के मार्गदर्शन में बिहार को विकास, सुशासन और समृद्धि के नए आयामों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहूँगा।
आप सभी का स्नेह, आशीर्वाद और सहयोग ही मेरी सबसे बड़ी शक्ति है।
जय बिहार,
जय भारत!
#NDA4Bihar
बिहार को पहली बार मिलेगा बीजेपी का मुख्यमंत्री।
पार्टी ने सरकार बनाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की।
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री तथा पार्टी के बड़े ओबीसी चेहरे शिवराज सिंह चौहान को विधायक दल की बैठक के लिए पर्यवेक्षक बनाया गया।
चौदह अप्रैल को नीतीश कुमार के त्यागपत्र के बाद चुना जाएगा बीजेपी विधायक दल का नेता।
संभावना है कि किसी ओबीसी को ही बीजेपी देगी बिहार की कमान।
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दौड़ में सबसे आगे।