9 लाख करोड़ का माल अमेरिका से ख़रीदा जाएगा तो भारत के निर्माता क्या घास छीलेंगे?
देश के मज़दूर क्या भूखे मरेंगे? देश का किसान ज़िंदा रहेगा या मर जाएगा?
गाँजा पीकर ट्रेड डील करने गए थे क्या?
‘मेक इन इंडिया’ क्या पूरे देश को बेवकूफ बनाने के लिए लाए थे?
#TradeDeal
"How dare you offer Namaz on Brahmin's land?"
Shahid, A daily labour who was praying in an open field in Rudrapur, Uttarakhand, was kicked, beaten, made to apologize, and forced to chant 'Jai Shri Ram'.
The person seen beating him was Arvind Sharma, Temple Manager. A complaint has been filed. Let's see if police takes action against the accused.
उनके Toilet में भी clean water आता है
वो मुंह लगाकर सीधे टैप से पी सकते हैं...
लेकिन हमारे पीने के नल में भी गंदा, जहरीला, जानलेवा पानी आता है
सबसे बड़े सपने दिखाने वाली सरकार ने भी हमें साफ पानी नहीं दिया
122 देशों की लिस्ट में, आज भी हम 120वें नंबर पर हैं
हम गंगा को पवित्र कहते हैं, लेकिन ज्यादातर शहरों में गंगा का पानी, पीने तो छोड़िए, तैरने लायक नहीं है
और कहते हैं कि 2047 में विकसित भारत बन जाएंगे? आखिर कैसे बन जाएंगे, ये भी तो बताओ?
बहन कुमारी मायावती जी का जीवन केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि बहुजन समाज के आत्मसम्मान, अधिकार और सत्ता में भागीदारी की ऐतिहासिक संघर्षगाथा है। एक ऐसे समाज से निकलकर, जहाँ आवाज़ दबाई जाती थी, अवसर सीमित थे और सत्ता के द्वार बंद माने जाते थे, मायावती जी ने डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के विचारों को राजनीतिक ताक़त में बदलने का साहसिक कार्य किया।
लगातार साज़िशों, अपमानजनक भाषा, जातिगत हमलों और सत्ता के दबावों के बावजूद उन्होंने बहुजन मूवमेंट को संगठन, अनुशासन और सत्ता की दिशा दी।
उनका स्पष्ट संदेश रहा—बहुजन समाज केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि राज्य सत्ता का निर्णायक भागीदार बने।
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और जटिल राज्य में चार बार मुख्यमंत्री बनना आसान नहीं था। यह उस संघर्ष, दृढ़ इच्छाशक्ति और बहुजन समाज के विश्वास का परिणाम था, जिसे उन्होंने वर्षों की तपस्या से अर्जित किया। उन्होंने सत्ता को आत्मसम्मान का औज़ार, प्रशासन को संवैधानिक न्याय का माध्यम और राजनीति को सामाजिक परिवर्तन का रास्ता बनाने की कोशिश की।
मायावती जी की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि उन्होंने करोड़ों दलित-पिछड़े, वंचित और उपेक्षित लोगों को यह विश्वास दिलाया कि
“हम शासन कर सकते हैं, हम निर्णय ले सकते हैं, और हम इतिहास बदल सकते हैं।”
आज जब बहुजन राजनीति कई चुनौतियों से गुजर रही है, तब मायावती जी का संघर्षपूर्ण जीवन हमें यह सिखाता है कि आंदोलन केवल नारों से नहीं, बल्कि संगठन, विचार और धैर्य से जीवित रहते हैं। बहुजन मूवमेंट को मज़बूत करने की उनकी कोशिशें इतिहास में दर्ज रहेंगी।
आदरणीय सुश्री मायावती जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई।
बहन कुमारी मायावती जी
15 जनवरी 1956 को बहन कुमारी मायावती जी की विलादत हुई। बहन कुमारी मायावती जी भारतीय राजनीति की वरिष्ठ दलित नेता हैं और चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं।
बहन कुमारी मायावती जी का जन्म दिल्ली के श्रीमती सुचेता कृपलानी अस्पताल में हुआ। उनकी माता का नाम राम राठी और पिता का नाम प्रभु दास था। उनके पिता गौतम बुद्ध नगर के बादलपुर में डाक विभाग में कर्मचारी थे।
1975 में बहन कुमारी मायावती जी ने कालिंदी महिला कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए. की पढ़ाई की। 1976 में उन्होंने वी.एम.एल.जी. कॉलेज, गाजियाबाद से बी.एड. किया। 1983 में बहन कुमारी मायावती जी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एल.एल.बी. की डिग्री हासिल की।
बी.एड. पूरा करने के बाद बहन कुमारी मायावती जी ने पढ़ाना शुरू किया और साथ ही आई.ए.एस. की तैयारी भी की। 1977 में दलित आंदोलन के महान नेता मान्यवर कांशी राम उनसे मिले और उनके विचारों से प्रभावित होकर उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया।
1984 में मान्यवर कांशी राम ने बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की और बहन कुमारी मायावती जी को पार्टी का सदस्य बनाया। 1989 में बहन कुमारी मायावती जी पहली बार बिजनौर लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं। 1994 में वे राज्यसभा सदस्य बनीं।
बहन कुमारी मायावती जी चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं —
3 जून 1995 से 18 अक्टूबर 1995,
21 मार्च 1997 से 20 सितंबर 1997,
3 मई 2002 से 26 अगस्त 2003,
और 13 मई 2007 से 6 मार्च 2012 तक।
18 सितंबर 2003 को मान्यवर कांशी राम के अस्वस्थ होने के बाद बहन कुमारी मायावती जी बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।
बहन कुमारी मायावती जी का राजनीतिक जीवन संघर्षों, आरोपों और विवादों से भरा रहा। “गेस्ट हाउस कांड” को भारतीय राजनीति का एक काला अध्याय माना जाता है, इसके बावजूद उन्होंने बहुजन समाज को राजनीतिक पहचान दिलाई।
बहन कुमारी मायावती जी के जीवन पर पत्रकार मोहम्मद जमील अख्तर की किताब Iron Lady: Kumari Mayawati और पत्रकार अजय बोस द्वारा लिखी जीवनी उल्लेखनीय हैं।
बहन कुमारी मायावती जी द्वारा लिखी गई किताबें —
बहुजन समाज और उसकी राजनीति (2000),
मेरा संघर्षमय जीवन एवं बहुजन आंदोलन का सफरनामा (2006),
My Struggle-Ridden Life and Bahujan Samaj (2008)।
बहन कुमारी मायावती जी का जीवन संघर्ष, आत्मसम्मान और बहुजन राजनीति की ताकत का प्रतीक है।
@epanchjanya कोलकाता रेप में लड़की के परिजन असहाय महसूस कर रहे हैं शुरू से।
क्या हुआ क्यों हुआ ये सवाल, और सरकार का रुख बेचैनी और बाढ़ रहा था एक मां की पल पल।
महिलाओं को वस्तु समझने वाले भेड़ियों को क्या सज़ा दी जा सकती ताकी मिसाल कायम हो।
नहीं तो निर्भया....को भूल नहीं पायेंगे।
#69000_शिक्षक_भर्ती एक झोल
➡️69000 शिक्षक भर्ती हमेशा से ही विवादों में रही है. एक भर्ती में 4-4 सूची प्रकाशित की गईं, इसके बाद भी कुछ लूप होल बने रहे. तत्कालीन बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी सहित तमाम आला अधिकारी ये बात जानते थे कि भर्ती प्रकिया में झोल है. इस झोल को कवर करने के लिए 6800 शिक्षक भर्ती का शिगूफा छोड़ा गया था जो भर्ती प्रक्रिया में कहीं भी फिट नहीं बैठता था. खैर देर सबेर 6800 की सूची को रद्द होना ही था. अब उनका कहना है कि नये सिरे नियमों के अनुसार नई सूची तैयार करिए, भर्ती को पूरा करिए जो बाहर होता है उसे बनाएं रखें ताकि नौनिहालों का शिक्षण कार्य प्रभावित न हो.
➡️पूरे मामले में आरक्षण को लेकर योगी सरकार की किरकिरी तो हुई है पर अभी सुप्रीम कोर्ट में सारे पत्ते खुलने बाकी हैं. मामला और लंबा खिंचने की बारी है. ATRE के जरिए 69000 शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्रों के साथ बहुत बुरा हुआ.राजनीति का शिकार हुआ अभागा शिक्षामित्र. शिक्षामित्रों का जीवन बर्बाद करने वालों को वे कभी माफ़ नहीं करेंगे. बेसिक शिक्षा विभाग जो सर्वाधिक संख्या में रोज़गार उपलब्ध कराता है अब नई शिक्षक भर्ती में फिलहाल समय लगेगा~
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प्रवीण कुमार
कथावाचक फ़रारी खरीद रहे हैं।
कोचिंग वाले मोटिवेशन बेचकर करोड़ों कमा रहे हैं।
बेचारे भक्त और छात्र बुरी दशा में हैं।
कहीं भगदड़ में मर जा रहे हैं, कहीं डूबकर मर जा रहे हैं।
ओबीसी के लाखों लोग मंडल आयोग के कारण आज सरकारी नौकरी में हैं। लाखों छात्र शिक्षा संस्थानों में हैं।
कितने को याद है कि 1990 मे 7 अगस्त के दिन ही वीपी सिंह ने मंडल की सिफ़ारिश लागू कर भारतीय समाज को हमेशा के लिए बदल दिया।
कल का हैश टैग। सबको सूचित करें। #Mandal_Day
शिक्षामित्र, अनुदेशक और संविदाकर्मी साथियों के विषय में आवश्यक चर्चा है।
हमारे संविदाकर्मी समान कार्य के लिए समान वेतन की जायज मांग को लेकर धरना आंदोलन कर रहे हैं, अपनी आवाज़ उठा रहे हैं। एक शिक्षक और सहकर्मी के नाते मेरा पूरा सहयोग और समर्थन उनके साथ है।
स्थाई नौकरी और सम्मानजनक वेतन हर कर्मचारी का हक है, और सरकार को शीघ्र अति शीघ्र उनकी मांगों को पूरा करना चाहिए।
#शिक्षामित्र #अनुदेशक #संविदाकर्मी