@yadavakhilesh अन्ना हज़ारे के आंदोलन के समय बॉलीवुड के सितारे दिल्ली पहुँचकर समर्थन कर रहे थे। आज सोनम वांगचुक अनशन पर हैं, जिनकी प्रेरणा को बॉलीवुड ने पर्दे पर अमर किया, लेकिन वही सितारे खामोश हैं। क्या तब मनमोहन सिंह की आलोचना करना आसान था और आज नहीं?
@sudhirchaudhary अन्ना हज़ारे के आंदोलन के समय बॉलीवुड के सितारे दिल्ली पहुँचकर समर्थन कर रहे थे। आज सोनम वांगचुक अनशन पर हैं, जिनकी प्रेरणा को बॉलीवुड ने पर्दे पर अमर किया, लेकिन वही सितारे खामोश हैं। क्या तब मनमोहन सिंह की आलोचना करना आसान था और आज नहीं?
@sudhirchaudhary अन्ना हज़ारे के आंदोलन के समय बॉलीवुड के सितारे दिल्ली पहुँचकर समर्थन कर रहे थे। आज सोनम वांगचुक अनशन पर हैं, जिनकी प्रेरणा को बॉलीवुड ने पर्दे पर अमर किया, लेकिन वही सितारे खामोश हैं। क्या तब मनमोहन सिंह की आलोचना करना आसान था और आज नहीं?
अन्ना हज़ारे के आंदोलन के समय बॉलीवुड के सितारे दिल्ली पहुँचकर समर्थन कर रहे थे। आज सोनम वांगचुक अनशन पर हैं, जिनकी प्रेरणा को बॉलीवुड ने पर्दे पर अमर किया, लेकिन वही सितारे खामोश हैं। क्या तब मनमोहन सिंह की आलोचना करना आसान था और आज नहीं?
@virsanghvi अन्ना हज़ारे के आंदोलन के समय बॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारे दिल्ली पहुँचकर उनके साथ खड़े थे।
आज सोनम वांगचुक अनशन पर बैठे हैं, जिनकी प्रेरणा से बनी कहानी को बॉलीवुड ने करोड़ों लोगों तक पहुँचाया, लेकिन वही सितारे खामोश हैं।
@KrisNair1 It's not just about Modi. There are two kinds of leaders:
Those who gain value from their position.
Those who give value to the position.
Today, over 90% of politicians belong to the first category.