Rahul Gandhi fought the entire election on issues of social justice, reservations, lack of diversity, threats to the constitution, the absence of the SC, ST, and OBCs in the management of universities-companies-media, and the issue of caste census, as if these problems arose only in 2014!
Anyway, what’s done is done. जो हुआ सो हुआ! The Congress could not form the government at the center. Better luck next time.
Now I want the Congress to implement a model of social justice and diversity in Karnataka, Telangana, Himachal Pradesh, or Jharkhand, where it is in power directly or in coalition.
For example, it should implement diversity or reservation in IT and other companies in Bengaluru and Hyderabad. It should bring diversity in the media and business in Shimla.
Congress has no glory in its past regarding social justice and diversity. This is the party that stalled the Mandal Commission and Bharat Ratna for Babasaheb.
But it still has a chance in the states.
Will Congress take some action, or will it limit itself to scaring people for votes?
@kharge@RahulGandhi
1949 के नवंबर माह में RSS ने संविधान का विरोध किया, संविधान के विरोध में अपने मुखपत्र ऑर्गनाइजर में लेख लिखा.
और उसी साल दिसंबर माह HINDU कोड बिल का विरोध किया. दिल्ली के रामलीला मैदान में RSS के समर्थन में कई हिन्दू संगठनों ने जुलूस निकाला. डॉ आंबेडकर पर अपमानजनक टिप्पणी.
RSS के समर्थक स्वामी करपात्री महाराज बिल के एक धुर विरोधी नेता थे. उन्होंने डॉ आंबेडकर पर जातिगत टिप्पणियां की.
और कहा कि एक अछूत को उन मामलों में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है जो साधारणत ब्राह्मणों के लिए सुरक्षित है. नेहरू ने हिन्दू कोड बिल को ठंडे बस्ते में डाल दिया.
पार्लियामेंट प्रवचन का अड्डा बन चुका है.
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी प्रवचन दे रहे हैं.
लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला प्रवचन दे रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रवचन दे रहे हैं.
महामहिम उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ प्रवचन दे रहे हैं.
इन नेताओं से अच्छा प्रवचन तो आचार्य रजनीश देते हैं. उनके हर वीडियो को देखिए वो अपनी हर बात को ठोस सबूत के साथ बेहतर ढंग से रखते हैं.
ये नेता तो हवा हवाई प्रवचन दे रहे हैं.
◆ आरक्षण को गाली देना फैशन हो गया है. कोई भी आरक्षण को गाली देकर निकल जाता है. मानो आरक्षण नही होता ये लोग इंडिया को सुपरपॉवर बना देते.
आरक्षण जब नही था और केवल जाति वर्ण-अव्यवस्था थी तब क्या उखाड़ लिया इसका जवाब कोई नही देता.
◆ सवाल और भी है लेकिन जवाब किसी के पास नही है.
सवर्णों को जाति का अहंकार, जाति की श्रेष्ठता भी चाहिए, EWS आरक्षण भी चाहिए लेकिन OBC SC ST आरक्षण नही चाहिए.
◆ UPSC या अन्य परीक्षाओं में OBC SC ST कैंडिडेट्स लिखित परीक्षा में ज्यादा नंम्बर से पास होते हैं लेकिन उन्हें इंटरव्यू में कम मार्क्स देकर फेल क्यों कर दिया जाता है ?
यह कैसे मुमकिन है - सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, मीडिया, ब्यूरोक्रेसी, कला, शिक्षा और कॉरपोरेट क्षेत्र में 90% पदों पर सवर्णों का कब्ज़ा है जिनकी आबादी देश में 10% है ?
◆ विश्वास नही होता यह सब सवर्णों के कुशाग्र बुद्धि की वजह से मुमकिन हुआ है ?
क्या इसका जवाब किसी के पास है ?
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Akali Dal and Jan Singh-BJP: Long history as adversaries & friens ..
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Here is tracking their complex ‘love-hate’ relationship, starting from 1952
Understanding the roots of distrust of BJP in the larger Sikh community