If the government can provide free coaching to SC/ST/OBC students, why can't it add just 50 more chairs for poor GC students?
Why this blatant discrimination?
आंदोलन चल रहा है और अंदर ही अंदर पेज हाईजैक, फॉलोअर्स का दावा, व्यक्तिगत चेहरा चमकाने की लड़ाई शुरू।
आरक्षण हटाओ हो, UGC ब्लैक लॉ हो या मेरिट की लड़ाई… जब 50 अलग-अलग खेमे बन जाएँगे तो सिस्टम सबसे ज्यादा खुश होगा।
विचारों में मतभेद रह सकते हैं। लेकिन लक्ष्य एक है।
व्यक्तिगत लड़ाई मत लड़ो। सामूहिक लड़ाई लड़ो।
वरना फिर वही होगा — ज्यादा शोर, कम असर।
1952 में 600-700 जातियाँ दलित थी, बाबा साहेब के संविधान ने 600 और जोड़ दिया, यानी 5000 वर्ष के मनुवादी, ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने 600 अछूत जातियाँ दी, 70 साल के बाबा साहेब संविधान ने 600 और जोड़ा। तार्किक रूप से सुधीजन ये बताएँ कि आरक्षण से जातियों का उत्थान हो रहा है या पतन?
SC के 135-145 IAS ऑफ़िसर्स हैं, 50-62000 क्लास 1 ऑफ़िसर्स, डेढ़ से पौने दो लाख क्लास 2 ऑफ़िसर्स हैं इस देश में। अंबेडकर को उनके शिक्षक ने और तत्कालीन महाराज सयाजीराव गायकवाड ने उन्हें विदेश भेजा, फिर छत्रपति शाहूजी महाराज ने उनकी लंदन की पढ़ाई पूर्ण करवाई।
अब प्रश्न यह है कि ऊपर के IAS, क्लास 1 और 2 के लगभग 2 लाख अफ़सरों में से कितनों ने अपनी ही जाति समूह के बच्चों को स्पॉन्सर किया है?
मीना समाज 1000% अधिक ओवर रिप्रिजेंटेड है, जाटव का भी प्रतिनिधित्व SC वर्ग में अधिक है, यादव, कुर्मी, जाट, गुर्जर को OBC में देख लीजिए! तो प्रश्न यह है कि असली आदिवासी, भील कहाँ हैं ST में?
मुसहर, माँझी, वाल्मीकि, सुदर्शन, बहेलिया, बंतार, डोम, हलालखोर, तुरी, पासी, भंगी और मदारगी के बच्चे स्कूल भी पहुँच पा रहे हैं? OBC की लगभग 1,000 जातियों की सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी शून्य या नगण्य है, जैसे कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, बिंद, राजभर, पाल, बघेल, बढ़ई, कुम्हार, लोहार, तेली, चौरसिया, नाई (सैलानी) और नोनिया!
फिर कहा जाता है कि आर्थिक आधार पर रिजर्वेशन नहीं होना चाहिए, क्योंकि जो दो-चार जातियाँ सारा आरक्षण खा रही हैं, उनकी आर्थिक स्थिति भी ठीक है, पर उन्होंने स्वयं को इन जाति समूहों में राजनैतिक रूप से ब्लैकमेलिंग करके घुसा रखा है, इसलिए वो कभी भी अपनी ही जाति समूहों में आरक्षण नीचे तक नहीं जाने देंगे।
इसीलिए, Reservation पर ReThink, Rationalise, Reform और अंततः Remove करने के लिए हमें चर्चा करनी चाहिए।
श्री राजपूत करणी सेना के नेतृत्व में अपनी जायज मांगों को लेकर जयपुर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर प्रशासन द्वारा लाठीचार्ज किया जाना अत्यंत निंदनीय है। असहमति की आवाज़ का समाधान बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद और संवेदनशीलता से होना चाहिए।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है।
@PMOIndia@RajCMO
जयपुर वासियों और करनी सेना के महिपाल सिंह समेत हर व्यक्ति को आभार जिन्होंने यूजीसी को भुलाया नहीं और सतत इसके लिए पदयात्रा आदि के माध्यम से लोगों को जोड़ते रहे।
It takes a lot to be a stakeholder in Indian football. It has been like that for some time now. But when everything around looks like it will crumble, you bank on family to hold on to each other. And more often than not, it is the elders in the house that you turn to, for assurance. All of you at the TATA Group, through TFA first, and then @JamshedpurFC, have been one of our pillars.
To know that Jamshedpur has folded first team operations is a punch to the gut. The players and staff will be without clubs, and they might find one by the end of it all. The League will have a team less, but the season will go on. However, not having the TATA group involved in the top tier of Indian football - that would be a disaster with no alternative.
I understand that some tough decisions in sport are down to what makes sense in the board room. But I can only request and hope that the think tank at TATA picks their heart over head and reconsiders this call. It might be a poor business decision, but it will be the one Indian football needs the most at this hour.
She wants Al-Jazeera and BBC to raise the voice, but she doesn't know that Al-Jazeera and BBC only defame India, but can't talk about the brutality of Pakistani Army 🤨
They were active during CJP Protest, but stays silent on Pakistani Army brutality 😒
Clarification…
इस आंदोलन की अगली दिशा @ajeetbharti और @ARanganathan72 जी तय करेंगे।
तब तक, हम मुद्दों को उजागर करते रहेंगे, कड़े सवाल पूछते रहेंगे और अधिकारियों को जवाबदेह ठहराते रहेंगे,
सवाल पूछते रहें। एकजुट रहें। अपनी आवाज़ उठाएं।
#EndReservationNow