नाकाम-ए-तमन्ना दिल इस सोच में रहता है
यूँ होता तो क्या होता , यूँ होता तो क्या होता ।
उम्मीद तो बंध जाती तस्कीन तो हो जाती
वादा न वफ़ा करते वादा तो किया होता
Release the result of postcode 33/23 (TGT SPECIAL EDUCATOR).
The vacancy was advertised in 2023 and exam and was held in 2025. BUT the result is not declared SO FAR. No more delay..
@dsssbofficial@Dir_Education@LtGovDelhi@SandhuTaranjitS
@SP_Junagadh@IndexofGujarat There should be an action, not just formalities. All the culprits must be punished as forgiving for the sake of being minor is not accepted at all. They are mature and grown up to understand what is wrong and what's right.
When Nehru became PM, India had nothing, we were struggling for food, our budget was only ₹500 Cr
Still he built ISRO, IITs, IIMs & the entire India with scratch
There can never be second Nehru
— Major Gen CS Dhawan 🫡🔥
“इंग्लैंड जैसे देश में शिक्षा पर GST फ़्री है, जहाँ हावर्ड जैसे बड़े बड़े यूनिवर्सिटी हैं” 🚨🚨
“भारत में शिक्षा पर 18% GST ठोक कर बैठे हैं और मोदी जी कहते हैं कि घर-घर शिक्षा की ज्योति जली है”😂😂
माननीय सुप्रीम कोर्ट आदेशानुसार प्रत्येक स्कूल में एक विशेष शिक्षक होना अनिवार्य है। हम विशेष शिक्षको की सरकार से विनती है कि तृतीय श्रेणी में 5000 पदों पर,वरिष्ठ अध्यापक के 2000 पदों, व्याख्याता के 1000 पदों पर भर्ती की जाए
@BhajanlalBjp@TheUpenYadav#विशेष_शिक्षक_भर्ती
आगामी विशेष शिक्षक भर्ती ग्रेड 3 जिसमें पदो की संख्या अधिकतम 544 हो सकती हैं
जिसमें अधिकतम L1= 272 और L2 = 272 पद होंगे
इसलिए सभी विशेष साथियों के लिए सबसे उपयुक्त चीज यही है कि RTE 2009 के तहत प्रत्येक विद्याल��� में 1 विशेष शिक्षक का पद होना चाइए
Govt funding to religious yatras is unconstitutional.Govt must stay away from religion. Funding of Haj is also unconstitutional.
Giving funds directly to groups organising these will result in massive corruption.Besides, Kanwar Yatra is becoming a fest for unemployed lumpen youth
��ंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में तेनाली हाईवे पर तीन दलित युवकों को पुलिसकर्मी द्वारा सड़क के बीचोंबीच बैठाकर बेरहमी से पीटा गया। लाठियों से प्रहार, घुटनों पर पैर रखकर कुचलने की कोशिश-यह कोई कानून व्यवस्था नहीं, बल्कि जातंकवाद और सत्ता की बर्बरता है।
पीड़ित युवकों का आरोप है कि पुलिसकर्मी चिरंजीवी ने उनसे रिश्वत मांगी थी। जब उन्होंने मना किया, तो उन पर झूठा केस बनाकर यह सरेआम हिंसा की गई।
मैं मुख्यमंत्री @ncbn जी से कहना चाहता हूँ कि यह घटना केवल पुलिस बर्बरता नहीं — यह मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन, संविधान के अनुच्छेद 15, 17 और 21 की हत्या है।
हम @AndhraPradeshCM से माँग करते हैं:
पुलिसकर्मी को तत्काल बर्खास्त कर SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, BNSS की सख्त धारा��ं और मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया जाए।
पीड़ितों को राज्य द्वारा मुआवज़ा, सुरक्षा और कानूनी सहायता दी जाए।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग स्वतः संज्ञान लें।
आंध्र प्रदेश सरकार इस पर सार्वजनिक बयान दे और जवाबदेही तय करे।
@India_NHRC @NCSC_GoI