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नज़्मशाला टीम
भाई एक लहर बन आया, बहन नदी की धारा है
संगम है, गँगा उमड़ी है, डूबा कूल-किनारा है
यह उन्माद, बहन को अपना भाई एक सहारा है
यह अलमस्ती, एक बहन ही भाई का ध्रुवतारा है
पागल घडी, बहन-भाई है, वह आज़ाद तराना है
मुसीबतों से, बलिदानों से, पत्थर को समझाना है
~गोपाल सिंह नेपाली
#रक्षाबंधन
ख्वाहिशें रोप दी जाती है खेतों में
धान की तरह
मानो ये एक दिन ज़मी को आसमाँ कर देंगी
जिसमे उग आएंगे चाँद-तारे
यूं तो सपने भी बोए जाते है आँखों मे
जिसको सींचा जाता है हर रात सुबह होने तक
~नीरज (@neerajthepoet )
इस तरह मौसम बदलता है बताओ क्या करें
शाम को सूरज निकलता है बताओ क्या करें
यह शहर वो है कि जिसमें आदमी को देखकर
आइना चेहरे बदलता है बताओ क्या करें
~अमरनाथ श्रीवास्तव
वह अनन्त रितुराज,नहीं
जिसने देखी जाने की राह!
ऎसा तेरा लोक, वेदना
नहीं,नहीं जिसमें अवसाद,
जलना जाना नहीं, नहीं
जिसने जाना मिटने का स्वाद!
क्या अमरों का लोक मिलेगा
तेरी करुणा का उपहार
रहने दो हे देव! अरे
यह मेरे मिटने का अधिकार!
~महादेवी वर्मा
वही कच्चे आमों के दिन गाँव में हैं
वही नर्म छाँवों के दिन गाँव में हैं
मगर ये शहर की अजाब उलझनें हैं
न तुम गाँव में हो,न हम गाँव में हैं
~कुमार विश्वास(@DrKumarVishwas)
सवेरा है मगर पूरब दिशा में
घिर रहे बादल
रूई से धुंधलके में
मील के पत्थर पड़े घायल
ठिठके पाँव
ओझल गाँव
जड़ता है न गतिमयता
स्वयं को दूसरों की दृष्टि से
मैं देख पाता हूं
न मैं चुप हूँ न गाता हूँ ।
~अटल बिहारी वाजपेयी
देखिए ना तेज़ कितनी उम्र की रफ़्तार है
ज़िंदगी में चैन कम और फ़र्ज़ की भर-मार है
बे-वजह की रार से कितना लड़े आख़िर कोई
एक मुश्किल से बचे तो दूसरी तय्यार है
~रश्मि शर्मा