1. यूपीआई डिजिटल लेनदेन को पहले ख़ूब बढ़ावा देने के बाद अब सरकार द्वारा उस लेनदेन पर शुल्क वसूलने की नई व्यवस्था लोगों की नज़र में प्रथमदृष्टया मुनाफाख़ोरी के पूंजीवादी रवैये के तहत जनता से दोनों हाथों से टैक्स वसूली है, जिससे जनता में बेचैनी व आक्रोश स्वाभाविक है।
2. वैसे तो जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की इस व्यवस्था को ’कर’ मानने को तैयार नहीं है, किन्तु दिनांक 15 अक्तूबर से लागू हाने वाली इस व्यवस्था को चाहे जो भी नाम दिया जाये जेब तो अन्ततः आमजनता की ही कटेगी, उसका ही ख़र्च बढ़ेगा।
3. साथ ही, यह भी सर्वविदित है कि देश की बहुसंख्यक जनता अपार ग़रीबी व ज़बरदस्त महंगाई आदि की मार से त्रस्त है व उनके बच्चे अशिक्षा, बेरोज़गारी व अव्यवस्था आदि से पीड़ित हैं, ऐसे में सरकार की नीति व कार्ययोजना लाभ कमाने वाली व्यावसायिक कम व कल्याणकारी ज़्यादा हो तो यह उचित होगा। जनता की तंगी, दुख-तकलीफ की अगर सरकार चिन्ता नहीं करेगी तो फिर कौन करेगा?
4. इसके साथ ही, यूपी सरकार द्वारा करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के कीरब 14,500 स्कूलों को ’स्मार्ट स्कूल’ बनाने की घोषणा अच्छी बात है, लेकिन बच्चों को कथित ’स्मार्ट पढ़ाई’ से पहले उन्हें बुनियादी शिक्षा आदि की ज़रूरतें अर्थात स्कूली बच्चों के सर पर छत, उनके लिये बेंच, कुर्सी, किताब, शौचालय, मैदान, साफ-सफाई आदि की सही व्यवस्था पूरी की जायें और यह सब प्रति स्कूल क़रीब दो लाख रुपये में क्या संभव हो पायेगा, इस पर भी सरकार सहानुभूतिपूर्वक ज़रूर विचार करे।
महिला पत्रकारो की पिटाई पर इंटरनेशनल पत्रकार रात 2 बजे पहुची साकेत थाने, कर दिया हंगामा।
मेरा आज़ाद समाज पार्टी कांशीराम के @HimanshuValmi13 जी निवेदन है इस मामले को संज्ञान मे लेकर पीड़िता को न्याय दिलवाया जाए।
@Delhipolice
निशु, घबराने की ज़रूरत नहीं है। मैं तुम्हारे साथ हूँ।
साफ है कि तुम्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि तुम अपने समुदाय और छात्रों के हक़ की आवाज़ उठाती हो।
अमित शाह की दिल्ली पुलिस एक तरफ़ छात्रों के साथ अमानवीय बर्बरता करती है। दूसरी तरफ़ एक दलित लड़की के पिता का सिर फोड़ने वाला अपराधी खुलेआम घूम रहा है।
@narendramodi जी, @AmitShah जी - ऐसे अपराधी को आपका और आपकी पार्टी के लोगों का संरक्षण क्यों है? अब भी कार्रवाई होगी या किसी को बचाते रहेंगे?
निशु, तुम्हारी लड़ाई अकेली नहीं है। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता।
जय भीम। जय संविधान।
ये है धर्म सिंह सैनी जो पूर्व मंत्री और भाजपा नेता हैं इन्होंने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया के माध्यम से बहन मायावती जी की तारीफ़ करते कहा कि “बहनजी ने मुझे एमएलए बनाया मंत्री बनाया और फिर एमएलए बनाया इसलिए बहनजी को जीवन में कभी भूल ही नहीं सकता हूँ उनका जीते जी आदर और सम्मान करूँगा”
आज भले ही बसपा अपने कठिन समय से गुजर रही हो लेकिन आज भाजपा और सपा की जो शान बने बैठे नेता हैं वो बहनजी की देन के बाद ही नेता बने हैं, बसपा की नर्सरी से निकले हुए नेता है।
@pratapgarhpol@Uppolice@dgpup@ADGZonPrayagraj@igrangealld भाजपा सरकार बरगलाया गई है होशोहवास खो बैठी है
निर्दोष नागरिकों को सुरक्षा,न्याय देने के बजाय प्रताड़ित उत्पीड़ित,शौषण करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है
जनता द्वारा राजकोष में जमा कराएं टैक्स राजस्व,जीएसटी के पैसों से भारी वेतन लेकर भी जनता को सुरक्षा और न्याय से वंचित किया गया है
यूपी के ज़िला अम्बेडकरनगर में वरिष्ठ आईपीएस अफसर श्री आशुतोष मिश्रा के लगभग 91-वर्षीय बुजुर्ग माता की हुई हत्या अति-दुखद तथा प्रदेश में क़ानून-व्यवस्था के हिसाब से अति-चिन्तनीय। ऐसी घटना को लेकर लोगों की यह आशंका वाजिब है कि जब हत्या जैसी जघन्य घटना पुलिस अधिकारी के परिवार के साथ हो सकती है तो आमजन की सुरक्षा का क्या होगा? सरकार इस घटना का उचित संज्ञान ले और दोषियों के ख़िलाफ सख़्त क़ानूनी कार्रवाई करे जो यह अत्यन्त ज़रूरी है।
ये रशियन लड़की 2/3 दिन पहले दिल्ली एयरपोर्ट आई थी, वहां पर दो-चार गरीब महिलाएं बैठी थी, रशियन लड़की से 3 महिलाएं ₹50×3 पैसे मांगने लगी।
रशियन लड़की ने इंसानियत दिखाते हुए एक किराने की दुकान पर गई और उन्हें ₹1400 रुपए का तीनों को राशन खर्चा/पानी दिलवा दिया।
तभी वहां पर एक blogger खड़ा था, उसको शक हुआ इतना सामान नहीं, और ₹1400 का बिल, रशियन लड़की को साथ लेकर सीधा दुकानदार पास पहुंचा।
दोबारा जांच की तो ₹1100 का सामान, blogger बोला विदेशी में मेहमान के साथ ऐसा धोखा करते हो, शर्म नहीं आती, रशियन लड़की ने English भाषा में धन्यवाद कहा, बोली आप जैसे व्यक्तियों वजह से इंडिया ख़ूबसूरत लगता है।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीतियों एवं सिद्धान्त पर चलने वाली विशिष्ट पहचान वाली पार्टी है, जो किसी भी समाज के व्यक्ति विशेष से ज़्यादा, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के पवित्र संविधान की सच्ची मंशा के मुताबिक़, सर्वसमाज के हित व कल्याण के लिये समर्पित है और इसीलिये पार्टी में नेताओं की नहीं बल्कि पूरे तन, मन, धन से समर्पित अम्बेडकरवादी कार्यकर्ताओं की ही फौज हर स्तर पर अधिकतर सक्रिय है। यही मान्यवर श्री कांशीराम जी द्वारा पार्टी व मूवमेन्ट के हित में स्थापित परम्परा भी है।
2. इसीलिये ब्राह्मण समाज व अन्य सभी समाज के जो भी लोग अभी तक पार्टी से निकाले गये हैं या निकाले जा रहे हैं या वे अपने निजी स्वार्थ में दूसरी पार्टियों में चले गये हैं या फिर वे अपने ग़लत कारनामों की वजह से उनसे बचने के लिये ख़ासकर सत्ताधारी पार्टी में शामिल हो गये हैं, तो उनका पार्टी के प्रति समर्पण भाव लोगों की निगाह में भी उनके कार्यों के ऑकलन के आधार पर काफी सशंकित व निराशाजनक बना रहा है, क्योंकि ख़ासकर बी.एस.पी. सरकार के दौरान भी ऐसे लोगों ने अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ के लिए ही पार्टी से फायदा ज़्यादा उठाया है और अपने समाज व पार्टी के हित के लिए वे लोग अधिकतर निष्क्रिय व उदासीन ही बने रहे हैं।
3. इतना ही नहीं बल्कि इन्हीं सब कारणों से उन लोगों ने अपनेे समाज को भी सही से बी.एस.पी. में नहीं जोड़ा है, जो कि पार्टी की अपेक्षा के विरुद्ध इनका यह सब कृत्य होने की वजह से पिछले कई लोकसभा व विधानसभा आमचुनावों में पार्टी को काफी नुकसान भी उठाना पड़ा है, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है।
4. किन्तु उसके बाद से पार्टी में लम्बे अरसे से ईमानदार व हर मामले में पार्टी के प्रति लगातार समर्पित एवं निष्ठावान चले आ रहे पार्टी के वरिष्ठ लोगों द्वारा आएदिन नये कर्मठ व ईमानदार लोगों व ख़ासकर युवाओं को पार्टी की नर्सरी में तैयार किया जाता रहा है, जो यह अभियान पूरी तरह से जारी है।
5. और अब वे लोग काफी हद तक पार्टी की अपेक्षा के अनुसार जी-जान से लगातार लगे हुये हैं। पार्टी को पूरी उम्मीद है कि ये सभी नये व पुराने लोग हर मामले में ज़्यादा बेहतर, साफ-सुथरे व मिशनरी मानसिकता के बनकर उभरेंगे और वे सच्चे अम्बेडकरवादी एवं संविधानवादी संघर्ष के भरपूर तौर पर काम आयेंगे।
6. इसके साथ ही, पार्टी ख़ासकर ब्राह्मण समाज को यह भी विश्वास दिलाना चाहती है कि वे अपनी पूरी मज़बूती के साथ पार्टी से जुड़े रहें और उन्हें हर चुनाव में उनकी तैयारी के आधार पर उनकी भागीदारी यानी चुनावी उम्मीदवार बनाने तथा सरकार बनने पर सन 2007 की तरह ही इनको व अन्य सभी समाज को भी पूरा-पूरा उचित मान-सम्मान ज़रूर दिया जाता रहेगा। और सर्वसमाज आधारित ऐसी अपनी बी.एस.पी. पार्टी को ज़मीनी स्तर पर तैयार करने के मामले में अब विशेषकर दलित समाज को ही अपनी अह्म भूमिका निभानी है। वैसे बी.एस.पी. की नर्सरी, सर्वसमाज के हसीन गुलदस्तों से ही, अधिकतर हरी-भरी व सजी रहती है
उत्तर प्रदेश में राज्यपाल का कार्यकाल सामान्यतः 5 वर्ष का होता है, लेकिन 5 वर्ष पूरे होने के बाद भी 7 वर्ष तक पद पर बने रहना गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े करता है। यदि कार्यकाल बढ़ाने या पुनर्नियुक्ति का कोई स्पष्ट आदेश नहीं है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
वहीं KGMU की कुलपति पर भ्रष्टाचार और आरक्षण नियमों की अनदेखी के आरोप लगने के बावजूद पुनः नियुक्ति भी सवालों के घेरे में है।
सवाल सीधा है—जब नियुक्तियों में नियम और संविधान का पालन नहीं होगा, तो SC/ST/OBC समाज को बराबरी का प्रतिनिधित्व और न्याय कैसे मिलेगा?
“अब मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा” - कल प्रयागराज में एक छात्र ने मुझसे यही कहा। सालों की तैयारी, घर की ज़मीन बेची, माँ-बाप का कर्ज़ और फिर भी हाथ में कुछ नहीं।
यह हार उसकी नहीं है। यह उस व्यवस्था की हार है जिसने उसकी मेहनत का दाम देने से इनकार कर दिया।
तेरह दिन हो गए - गृह मंत्री अमित शाह के मुंह से एक शब्द नहीं निकला। मोदी जी माफी मांगने की जगह क्षमा बाँट रहे हैं।
@AmitShah जी, यह मत समझिए कि हम जवाबदेही मांगना बंद कर देंगे। राजधानी की सड़कों पर बच्चों पर लाठियां और पैलेट चले - और आपने एक शब्द नहीं कहा। आज नहीं तो कल, इस जुर्म का जवाब आपको देना ही पड़ेगा।
छात्र देश की रोशनी हैं, और मैं उनकी पूरी शक्ति के साथ खड़ा हूं।
#ChhatronKiGoonj
1. गुजरात राज्य के ज़िला गिर सोमनाथ के ऊना में सन् 2016 में हुये दलितों पर जघन्य अन्याय-अत्याचार काण्ड के लगभग सभी अभियुक्तों को मार्च में स्थानीय कोर्ट द्वारा बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देकर न्याय पाने के लिये पीड़ित दलित परिवारों को वित्तीय आदि का भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी विचलित करने वाली कड़वी सच्चाई से ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के लोगों में भारी चिन्ता व्याप्त है।
2. इसको लेकर मेरी चिन्ता का विशेष कारण यह भी है कि इस काण्ड के पीड़ितों से मिलने मैं खु़द भी वहाँ गयी थी और वहाँ सच्चाई का पूरा पता करने के बाद राज्य सरकार से सभी दोषियों के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई करने की माँग की थी, किन्तु देश भर में इसके ख़िलाफ रोष व आक्रोश आदि होने के बावजूद 40 में से 35 आरोपी के मार्च महीने में बरी हो जाने की ख़बर कुछ और नहीं बल्कि दलितों के प्रति सरकारी द्वेष, उनके हित व सुरक्षा के प्रति लापरवाही व उदासीनता आदि का ही परिणाम ज़्यादा लगता है।
3. वैसे अभी भी मौक़ा है जब गुजरात सरकार अपनी इस ग़लती में सुधार करते हुये इस मामले की हाईकोर्ट में उचित पैरवी करके सभी दोषियों को सख़्त सज़ा दिलवाये ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके और दूसरों को सबक।
4. साथ ही, राज्य सरकार पीड़ित परिवार वालों के संतोष के मुताबिक वकील सरकारी ख़र्च पर उसी तरह मुहैया कराये, जिस प्रकार बी.एस.पी. की यूपी में मेरी रही सरकार ने ग़रीबों के लिये फ्री में क़ानूनी सहायता का क़ानूनी प्रावधान किया था।
कभी सोचा है कि की बहन जी (@Mayawati )@IndiaAllliance से दूर क्यों रहती है?
इसका जवाब छात्र आंदोलन दे चुका है
इंडिया गठबंधन आज पूरी तरह आप प्रसांगिक है इन्हें जनता के मुद्दों की बिल्कुल समझ नहीं है @AnandAkash_BSP जी ने पेपर लीक का मुद्दा 2024 में उठाया था