श्रीनिम्बार्क भगवान द्वारा प्रतिपादित कपाल वेध मतानुसार श्री पद्मा एकादशी व्रत (जलझूलनी एकादशी व्रत) 09 सितम्बर 2019, सोमवार को है।
आप सभी व्रत अवश्य करें।
जय श्रीराधे जय निम्बार्क।।
में वैरागी होने के नाते @nimbarksharan की और से प्रधानमंत्री श्री @narendramodi एवं @AmitShah का आभार प्रगट करता हूं कश्मीरी पंडितों में हमारी संप्रदाय के १२ आचार्य कश्मीरी थे वे कही न कहीं आज अखंड भारत को देख प्रसन्नता की अनुभूति कर रहे होंगे।
#Article370#AkhandBharat
श्रीनिम्बार्क भगवान द्वारा प्रतिपादित कपालवेध मतानुसार श्री पापमोचिनी एकादशी व्रत 1 अप्रैल 2019 दिन सोमवार को है।
आप सभी व्रत अवश्य करें।
जय श्रीराधे जय निम्बार्क।।
जय जय श्रीहरिव्यास जू, रसिकन हित अवतार।
महावाणी कर सबनि को, उपदेस्यो सुखसार।।
श्रीमन्निखिलमहिमामण्डलाचार्यचक्रचूणामणि रसिकराज राजेश्वर महावाणीकार जगद्गुरु निम्बार्काचार्य श्रीहरिव्यास देवाचार्य जी महाराज के पाटोत्सव की आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं।
जय जय श्रीहरिव्यास जू, रसिकन हित अवतार।
महावाणी कर सबनि को, उपदेस्यो सुखसार।।
श्रीमन्निखिलमहिमामण्डलाचार्यचक्रचूणामणि रसिकराज राजेश्वर महावाणीकार जगद्गुरु निम्बार्काचार्य श्रीहरिव्यास देवाचार्य जी महाराज के पाटोत्सव की आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं।
" 💐प्रियाकान्तजु पालना पद "
💐प्रिय नवनीत पालने झूले,श्रीविठलनाथ झूलावे हो ||
कबहूक आप संग मिल झूले,कबहूक उतरि झूलावे हो ||1||
कबहुक सुरंग खिलोना लेले,नाना भांति खिलावे हो ||
चकइ बंकी फिरकनि लहटू,झून झून हाथ बजावे हो ||2||
भोजन करत थाल इक झारी,दोउ मिल खाय खवावे हो ||💐
धन राधिका के चरण
धन धन राधिका के चरण
सुभग शीतल अति सुकोमल
कमल के से वरण
धन धन राधिका के चरण....
रसिक लाल मनमोदकारी
विरह सागर तरण
धन धन राधिका के चरण....
दास परमानन्द छिन-छिन
श्याम जाकि शरण
धन धन राधिका के चरण....
💐प्रियाकान्तजु पद-
💐पूत सपूत जन्यो जसुदा, इतनौ सुनि के वसुधा सब दौरीं।
देवन के आनंद भयो, पुनि धावत गावत मंगल गौरी।
नन्द कछु इतनौ जो दियो, कि इन्द्र कुबेरहुँ की मति बौरी।
देखत मोहि लुटाये दियौ, ना बची बछिया छछिया ना पिछौरी।💐
श्री राधाजु कौ जन्म सुन्यौ मेरी माई |
साजसिंगार चलीं व्रज सुंदरि , घर घर बजत बधाई ||
अति सुकुमार सखी सुबह लच्छिन , कीरति कन्या जाई |
'परमानन्द' करी नौछावर , घर - घर बात लुटाई ||
प्रगट भई सोभा त्रिभुवन की, श्रीवृषभानु गोप के आई
अद्भुत रूप देखि ब्रजबनिता, रीझि – रीझि के लेत बलाई
नहिं कमला न शची, रति, रंभा, उपमा उर न समाई
जा हित प्रगट भए ब्रजभूषन, धन्य पिता, धनि माई
जुग-जुग राज करौ दोऊ जन, इत तुम, उत नँदराई
उनके मनमोहन, इत राधा, ‘सूरदास’ बलि जाई
श्री राधे मेरी लाडली
प्रेमपूरित अश्रुओं से मैं तेरो चरण पखारूँ !
नित्य प्रसन्न भए लाडली राधा नाम उचारूँ!!
चरण तेरे धोय दूँ लाडली नैन जल बरसाऊँ !
कौन विधि सों मेरी श्यामा तोहे आज रिझाऊँ !!
कब मोहे शरण में अपनी लीजो विनय करूँ दिन रैन !
तेरी बाट निहारत स्वामिनी छलक रहे मोरे नैन !!