इटावा में पत्रकार असीत यादव ने एक नेताजी से सवाल पूछे जो सांसद हैं, सवाल पसंद नहीं आए तो पत्रकार पर SC/ST Act में मुकदमा दर्ज हो गया।
“भारत में यही हो रहा है।”
अश्विनी उपाध्याय, अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट
मोदी एक्ट से देश परेशान है
जहाज़ उड़ाना नहीं आता तो लाइसेंस नहीं मिला, जिसके बाद ट्रेनी पायलट ने इंडिगो के अधिकारियों के खिलाफ SC/ST एक्ट में FIR दर्ज करवा दी है
अधिकारी फरारी काटने को मजबूर है
"तुम जनरल कैटेगरी के लोगों के लिए आवाज़ क्यों नहीं उठाते?"
यह सुनते ही गाँव के सरपंच ने लड़के को पीटना शुरू कर दिया।
क्या जनरल कैटेगरी के लोगों को अपनी आवाज़ उठाने का भी हक़ नहीं है? 💔😢💔
The Finance Minister should immediately go on a global roadshow with a team of people who actually understand finance.
We can’t let the FIIs go on selling like this.
If a judge isnt able to deliver justice on time. 2000 per day must be added to their electricity bill too?
Fair enough?
Because justice delayed is justice denied.
बैंक यूनियन्स को बैंकर्स का काटना ही था तो कम से कम सैटरडे को ही ये सब कर लेते।
संडे भी काम करा लिया और स्ट्राइक भी कैंसिल कर दी।
बेचारे सैटरडे की छुट्टी माँग रहे थे, यहाँ एक संडे एक्स्ट्रा काम करवा दिया यूनियन ने।
गजबे है
#BlackSunday#5DayBankingNow
We are observing 27/09 as a #BlackSunday
All Bankers who are compelled to working on Sunday, 27.09.2026 will show their protest wearing Black Clothes on Sunday.
Stop exploiting your employees who are working in nationalized banks.
Madam, your adamant nature towards bankers might seriously hurt us in 2029.
Not the time to take revenge on bankers for the bundh called for their rights🙏🙏 @nsitharaman@nsitharamanoffc@DFS_India@PMOIndia
Ab mai jhel nahi paa Raha..
Mujhe maaf karna..
Last words from a banker who committed suicide this week.
Such toxic work atmosphere bankers are facing.
This is for those who keeps blaming bankers for everything.
बैंक कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कारण पूछने पर यही लगा कि जिस बैंक की नौकरी को अच्छी नौकरी में गिना जाता था, उसकी हालत बदतर हो गई है। टारगेट के नाम पर कर्मचारी देर शाम तक रोके जाते हैं, छुट्टी नहीं दी जाती है,
तनाव रोज़ का हिस्सा है। काम करने की जगह भी अच्छी नहीं है। ऐसा लगता है कि बैंकर को सज़ा दी जा रही है कि उन्होंने बैंक की नौकरी क्यों की। लोगों ने बताया कि अत्यधिक तनाव के कारण बीमारियाँ होने लगी हैं।
एक बैंकर ने यह भी बताया-
सुबह 8:00 बजे घर से निकलने वाला बैंकर रात को 8:00 या 9:00 बजे के बाद ही घर लौट पाता है, क्योंकि एनपीए (NPA - गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) को रोकने का भारी दबाव होता है। हर खाते की मंथली ईएमआई (EMI) होती है, और यदि वह 90 दिनों तक जमा न हो, तो खाता एनपीए हो जाता है। ऐसे में रीजनल ऑफिस से ब्रांच हेड पर दबाव आता है कि यह खाता आज किसी भी हाल में एनपीए नहीं होना चाहिए। पहले केवल महीने की आखिरी तारीख को एनपीए रोकने का दबाव होता था, लेकिन अब हर सिंगल डे (प्रतिदिन) यह प्रेशर रहता है।
रात के 9:00 बज रहे होते हैं और रीजनल ऑफिस से फोन आता है कि "किसी भी तरह इस खाते को बचाइए।" थक-हारकर जब ब्रांच हेड को लगता है कि उसे अब घर जाना चाहिए, तो वह अपनी जेब से 2,000, 4,000 या 10,000 रुपये तक की ईएमआई खुद भर देता है। बाद में ग्राहक वह पैसा लौटाता नहीं है, जिससे बैंक मैनेजर के अपने पैसे डूब जाते हैं।
बैंक में दिनभर कई तरह के मानसिक तनाव झेलने पड़ते हैं। आपको रिकवरी के लिए फील्ड में निकलना होता है। वहाँ कोई ग्राहक आपको ब्लैकमेल करता है कि "मेरे घर मत आओ, नहीं तो मैं पैसा जमा नहीं करूँगा, सिर्फ़ फोन पर बात करो।" फोन पर बात करने के दौरान ग्राहक कभी-कभी अभद्र और गाली-गलौज वाली भाषा का प्रयोग करते हैं। उस तनाव में यदि मैनेजर के मुँह से गलती से भी कोई गलत बात निकल गई, तो ग्राहक उसकी कॉल रिकॉर्डिंग करके ब्लैकमेल करने लगता है।
कृपया बैंकर की बात सुनें । कोई रास्ता निकालें।