सामान्य वर्ग ने नया कुछ नहीं मांगा कि हमे अन्य वर्गों से कुछ ज्यादा दो।
हमने केवल उतना ही मांगा जितना सबको मिल रहा उतना हमे भी दे दो ,यदि आप वास्तव में हिन्दू एकता चाहते हो तोl यदि चुनावी नाटक के लिए हिंदुत्व करते हो तो हम आपको हिंदुत्व की नई परिभाषा नहीं बनाने देंगे ,जिसमें आप उस वर्ग को अलग करो जिसने हूण, अरब, यूनान, तुर्क, मुगल, यूरोपीय आक्रमणों के बावजूद भी हिन्दू धर्म की रक्षा की है।
हम अपना वोट हिंदुत्व के लिए दे सकते है,पर यदि आप वोट ले के हिसाब चुकता करने की मंशा रखते हो तो याद रखना कि आप बहुत ही बड़ी गलतफहमी में जी रहे हो।
हम अपना वोट दे कर हिसाब चुकता करवा लेंगे ऐसा तो होने वाला नहीं, हां हम वोट देना बंद करते हैं आप नीले गमछों, फुले, पेरियार समर्थकों से वोट ले कर हिसाब चुकता कर लीजिए हमे कोई समस्या नहीं।
हिंदुत्व हमारे लिए चुनावी भाषण नहीं जन्म लेते ही खून की दौड़ान है ऑक्सीजन है ।
हमारा हिंदुत्व आज "जय श्री राम" कल "जय फुले" से नहीं चलता। अनादि काल से हम भगवान राम, मां सीता, मां सरस्वती की पूजा करते हैं।
शायद बीजेपी के "हिसाब चुकता" गैंग को पता भी न हो क्योंकि आप लोगों को हम मंदिर भी नहीं जाने देते थे ऐसा मोदी जी ने खुद बोला है,तो हमारे भगवान के बारे में शायद आपको पूर्ण ज्ञान न हो।
मां सरस्वती पर टिप्पणी करने वाला संत हो सकता या फिर मां सरस्वती देवी दोनों क्रमशः संत या देवी नहीं हो सकते।
और यदि आप दोनों को भगवान मान रहे तो आप दोगले हो जो केवल वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं।
आप फुले की माला जप के हिंदुत्व के लिए नहीं बल्कि हिंदुत्व के विरोध में काम कर रहे।
सत्ता के लिए फुले पेरियार तक पहुंच जाओगे कभी दिमाग में भी नहीं आया था।
आपके जो साधु साध्वी घूम रहे हैं वो आपको चुनाव में साध्वियों के चोले में चुनावी मदद दिला सकते हैं परंतु ये असल साधु साध्वी नहीं हो सकते क्योंकि इन्हें हिंदू धर्म का H भी नहीं पता है।
आपकी इन नीतियों ने RSS को राष्ट्रवादी नहीं बल्कि जातिवादी संगठन बना दिया है ।
जिसका समर्थन हम खुद नहीं करना चाहते।
आज आराम से इस लिए बता रहा की राजस्थान निकाय चुनाव के बाद आत्ममंथन करने में मदद मिलेगी ।
यदि विचारधारा नहीं बदली इसी Scst, यूजीसी आरक्षण में चलते रहे तो बहुत जल्द देश से बीजेपी का चैप्टर खत्म हो जाएगा।🙏
@narendramodi@Baliyan_x@Sadhvi_prachi
ईश्वर सबको खुश रखे सबको धन दौलत और खुशियां दे। बच्चा और उसका परिवार शायद वीडियो बनाकर पैसे कमाने की उम्मीद कर रहा होगा, लेकिन समाज को तोड़ने वाली बातें अगर इस उम्र से ही सिखाई जाएंगी, तो बच्चा बड़ा होकर भी इसी घर में इसी गाने पर नाचता रह जाएगा।
घर की दीवारों पे प्लास्टर तक का पैसा नहीं है।
और बेटा शेरनी का दूध पीके भीम और संविधान के लिए नाच-नाच कर दहाड़ते हुए एड़ियां तोड़ रहा है।
जय बीम-जय दलित माता।
हम तो कब से कह रहे की जातिगत योजनाएं केवल राजनीतिक फायदे के लिए बनाई जाती हैं, इनका समाज से कोई लेना देना नहीं।
उम्मीद करते हैं कि धीरेन्द्र शास्त्री की बात सरकार के कानों तक जाएगी।
गिरिराज जी आपको विश्विद्यालयों को दीवारों पर सवर्णों के नरसंहार के नारे नहीं दिखाई दिए क्या?
या सवर्णों की बात ना करना ही कट्टर हिंदुत्व का मानक हो चुका है।
गिरिराज जी आपको विश्विद्यालयों को दीवारों पर सवर्णों के नरसंहार के नारे नहीं दिखाई दिए क्या?
या सवर्णों की बात ना करना ही कट्टर हिंदुत्व का मानक हो चुका है।
विश्वविद्यालयों की दीवारों पर भड़काऊ नारे लिखकर देशद्रोह के आरोपियों की ढाल बनना सीधे तौर पर राष्ट्रविरोधी ताकतों की साजिश है।
यह वही लोग हैं जिन्होंने हर बार देश को अस्थिर करने और अराजकता फैलाने का काम किया है।
समाज को जोड़ने के लिए जो ट्वीट किए जा रहे हैं, यह और कुछ नहीं, बल्कि सवर्णों की एकता का बीजेपी खेमे में फैला डर है, जिसे
हिसाब चुकता गैंग अब संभाल नहीं पा रहा है।
समाज को जोड़ने के लिए जो ट्वीट किए जा रहे हैं, यह और कुछ नहीं, बल्कि सवर्णों की एकता का बीजेपी खेमे में फैला डर है, जिसे
हिसाब चुकता गैंग अब संभाल नहीं पा रहा है।
प्रियंका जी, सोच समझकर बोलिएगा, क्योंकि रक्षा बजट के लिए जो आवंटन मिलना चाहिए, वह सरकार आपको मुफ्त योजनाओं के नाम पर बांट रही है।
ज्यादा चीन पाकिस्तान किया तो बजट मुफ्त योजनाओं से रक्षा बजट में चला जाएगा और मुफ्त की मलाई बंद हो जाएगी।🤫
प्रियंका जी, सोच समझकर बोलिएगा, क्योंकि रक्षा बजट के लिए जो आवंटन मिलना चाहिए, वह सरकार आपको मुफ्त योजनाओं के नाम पर बांट रही है।
ज्यादा चीन पाकिस्तान किया तो बजट मुफ्त योजनाओं से रक्षा बजट में चला जाएगा और मुफ्त की मलाई बंद हो जाएगी।🤫
10 मिनट की इस बहस को सुनिए, कैसे प्रेम शुक्ला गाली देता रहा ताकि मैं ITBP DG के बयान का जिक्र न करूँ, गलवान में कोई घुसपैठ नहीं हुई, ऑपरेशन सिंदूर में कोई शहादत नहीं हुई, वाले झूठ का पर्दाफाश न कर सकूं।
IAF चीफ के बयान पर कोई चर्चा नहीं होने दी कि "हमारे पास 42 स्क्वाड्रन होने चाहिए मगर सिर्फ 29 स्क्वाड्रन है।"
BJP, इस सच को देश को क्यों नहीं बताना चाहती है!
जब महामानव ने गलवान में किसी घुसपैठ से इनकार किया, तो शहादत कैसे हुई? Op. सिंदूर में सदन में राजनाथ जी ने किसी भी शहादत से इनकार क्यों किया?
इसने हिंदू धर्म खत्म करने की जगह यदि बौद्ध धर्म में धर्मांतरण की बात की होती, तो सरकार भी खुश हो जाती और इसका मकसद भी पूरा हो जाता।
और किसी को समस्या भी नहीं होती।
इसने हिंदू धर्म खत्म करने की जगह यदि बौद्ध धर्म में धर्मांतरण की बात की होती, तो सरकार भी खुश हो जाती और इसका मकसद भी पूरा हो जाता।
और किसी को समस्या भी नहीं होती।
China in 1990s - Industrialisation & Globalisation
India in 1990s - Caste and Reservation Politics
China in 2026 - Leading the Global AI Race
India in 2026 - Caste and Reservation Politics
हमें बांटने वाली ताकतों के खिलाफ समाज को एकजुट करना है, 2047 के 'विकसित भारत' संकल्प की दिशा में हमें आगे बढ़ना है
: प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी
प्रिंस खुद बोल रहा है कि 565 में 65 भी राजपूतों की रियासत नहीं थी, मतलब लगभग 500 रियासतें ऐसी थीं, जिन पर ज्यादातर मंडल कमीशन के द्वारा बनाए गए आज के ओबीसी शासन कर रहे थे।
पर भारत के राजनेता अपने स्वार्थ के लिए 65 रियासतों के शासकों की पीढ़ियों को शोषक और 500 रियासतों पर शासन करने वालों की पीढ़ियों को पिछड़ा और शोषित बता रहे हैं।
प्रिंस खुद बोल रहा है कि 565 में 65 भी राजपूतों की रियासत नहीं थी, मतलब लगभग 500 रियासतें ऐसी थीं, जिन पर ज्यादातर मंडल कमीशन के द्वारा बनाए गए आज के ओबीसी शासन कर रहे थे।
पर भारत के राजनेता अपने स्वार्थ के लिए 65 रियासतों के शासकों की पीढ़ियों को शोषक और 500 रियासतों पर शासन करने वालों की पीढ़ियों को पिछड़ा और शोषित बता रहे हैं।
इनको कौन समझाये, 565 में से 65 भी राजपूतों की नहीं थी। 🙂
पता नहीं कहा से पढ़कर आ जाते, अगर सबसे बड़ी रियासतों की बात करें तो हैदराबाद, ग्वालियर, बड़ौदा, मैसूर इनमे से कोई राजपूत नहीं था। ग्वालियर के शिंदे और बड़ौदा के गायकवाड़ कुनबी राजवंश ओबीसी में आते है, बाक़ी मुस्लिम। ये राजस्थान और कश्मीर के डोगरा राजपूतों को छोड़ कर कहा और किस जगह राज कर रहे थे आज़ादी के समय जरा बताये, सबको 🙂
इतनी मक्कारी कहाँ से लाते हो?
खुद समाज को बाँट रहे हो, और माइक के सामने समाज को एकजुट होने का ज्ञान दे रहे हो।
समाज को एकजुट करने की बात तो बोल दी, अब करना कैसे है एकजुट, वह भी तो बताओ।
यूजीसी बिल लाकर, 93% आरक्षण देकर, SCST एक्ट में बिना जाँच जेल जाने के डर और जातियों के नाम पर योजनाएँ लाकर, इस तरह समाज को एकजुट करना चाहते हो क्या?
इतनी मक्कारी कहाँ से लाते हो?
खुद समाज को बाँट रहे हो, और माइक के सामने समाज को एकजुट होने का ज्ञान दे रहे हो।
समाज को एकजुट करने की बात तो बोल दी, अब करना कैसे है एकजुट, वह भी तो बताओ।
यूजीसी बिल लाकर, 93% आरक्षण देकर, SCST एक्ट में बिना जाँच जेल जाने के डर और जातियों के नाम पर योजनाएँ लाकर, इस तरह समाज को एकजुट करना चाहते हो क्या?
त्रिपाठी जी, आपको बीजेपी का प्रचार करना है तो खुलकर करिए, लेकिन यूजीसी के विषय को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, ऐसा बोलकर सामान्य वर्ग को बेवकूफ मत बनाइए।
यूजीसी बिल सरकार ने जनवरी में नोटिफाई किया था। शुक्र मनाइए कि सामान्य वर्ग इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँचा और इस पर रोक लगवाई।
सरकार तो कोर्ट में भी इसे डिफेंड करने के लिए अपने वकीलों की टीम भेज रही थी।
सरकार ने आज तक यह नहीं कहा कि हम यूजीसी बिल वापस ले रहे हैं।
बिल लागू हुआ या नहीं, यह मत बताइए। सरकार की यूजीसी बिल पर लिए मंशा क्या थी, उसकी बात करिए।
त्रिपाठी जी, आपको बीजेपी का प्रचार करना है तो खुलकर करिए, लेकिन यूजीसी के विषय को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, ऐसा बोलकर सामान्य वर्ग को बेवकूफ मत बनाइए।
यूजीसी बिल सरकार ने जनवरी में नोटिफाई किया था। शुक्र मनाइए कि सामान्य वर्ग इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँचा और इस पर रोक लगवाई।
सरकार तो कोर्ट में भी इसे डिफेंड करने के लिए अपने वकीलों की टीम भेज रही थी।
सरकार ने आज तक यह नहीं कहा कि हम यूजीसी बिल वापस ले रहे हैं।
बिल लागू हुआ या नहीं, यह मत बताइए। सरकार की यूजीसी बिल पर लिए मंशा क्या थी, उसकी बात करिए।