महोदय, फकाना फीडर जोकि जिला बुलंदशहर मे आता है दिनांक 25/04/26 को दिन मे 10 बजे से लाइट कट कर दी गयी,और उसका समाधान रात्रि के 3 बजे तक़ नहीं हुआ, JE, SDO सर से भी बात की लेकिन कोई भी समाधान नहीं हुआ, करीब 7-8 गांव अँधेरे और गर्मी से परेशान है,l
@MpDrBholaSingh महोदय, बुलंदशहर मे अब तक़ cghs डिस्पेंसरी तो बन नहीं पायी आपसे जबकि आपका तीसरा कार्यकाल है, और एक रेपिड मेट्रो की मांग करिये जो गाजियाबाद से लिंक होकर सीधा लाल कुआँ, दादरी, सिकंदराबाद और काला आम तक़ चले जिससे रोज आने जाने वाले लोगों को जाम मुक्त सफर मिल सके 🙏🏻
“24 घंटे काम लो, छुट्टी मत दो, पर्याप्त वेतन-भत्ते भी मत दो… फिर कहो सिपाही-दरोगा भ्रष्ट हैं”
भूमिका
देश में एक अजीब सोच बन चुकी है।
जनता कहती है—पुलिस को अच्छा वेतन मिलता है, फिर भी भ्रष्टाचार है।
सरकार कहती है—चूंकि भ्रष्टाचार है, इसलिए और सख्ती करो, छुट्टियाँ मत दो, 24 घंटे काम लो, और पर्याप्त वेतन-भत्ते भी मत दो।
इन दोनों के बीच जो सच्चाई दब जाती है, उसे सिर्फ सिपाही और दरोगा ही जीते हैं।
1. 24 घंटे की ड्यूटी: कोई तय समय नहीं
कब बुलावा आ जाए, कोई समय तय नहीं
दिन हो या रात, हमेशा तैयार रहना
त्योहार, शादी, परिवार—सब पीछे छूट जाता है
👉 यह नौकरी नहीं, लगातार चलता हुआ दबाव है।
2. छुट्टी नहीं, आराम नहीं
वीकली ऑफ का कोई सिस्टम नहीं
छुट्टी माँगना भी कई बार “गुनाह” जैसा लगता है
बीमार होने पर भी ड्यूटी करनी पड़ती है
👉 जब शरीर और दिमाग को आराम नहीं मिलेगा, तो इंसान कब तक टिकेगा?
3. वेतन और भत्तों की सच्चाई
काम के हिसाब से वेतन संतुलित नहीं
पर्याप्त भत्ते नहीं मिलते या सीमित हैं
जोखिम, समय और दबाव के मुकाबले आर्थिक समर्थन कम
👉 फिर भी उम्मीद—काम बिना शिकायत चलता रहे।
4. जनता क्या देखती है?
👉 वर्दी, अधिकार और कभी-कभी गलत व्यवहार
लेकिन नहीं देखती—
टूटा हुआ इंसान
मानसिक तनाव
ऊपर का दबाव, नीचे की जिम्मेदारी
👉 और एक लाइन में फैसला—“पुलिस भ्रष्ट है।”
5. सिस्टम क्या सोचता है?
👉 “नीचे वाले गलत हैं, इसलिए कंट्रोल बढ़ाओ।”
लेकिन अनदेखा—
काम का असमान बोझ
कर्मचारियों की कमी
इंसान की सीमाएँ
👉 नतीजा: दबाव और बढ़ता है।
6. असली समस्या क्या है?
इंसान को मशीन समझ लेना
लगातार दबाव में काम कराना
सम्मान और समझ की कमी
👉 यहीं से शुरू होती है थकान, गुस्सा और टूटन।
7. मशीन नहीं हैं सिपाही-दरोगा
उनका भी परिवार है
उनका भी शरीर और दिमाग थकता है
उनकी भी सीमाएँ हैं
👉 लेकिन उनसे उम्मीद—हमेशा परफेक्ट रहो।
8. नतीजा: बदनाम वही, जो सबसे ज्यादा काम करता है
जनता दोष देती है
सिस्टम कंट्रोल करता है
👉 और बीच में पिसता है—सिपाही और दरोगा।
9. समाधान क्या है?
तय कार्य-घंटे
वीकली ऑफ
पर्याप्त वेतन और भत्ते
मानसिक और शारीरिक आराम
सम्मान और सहयोग
निष्कर्ष
जब 24 घंटे काम लेकर, बिना छुट्टी दिए, और पर्याप्त वेतन-भत्ते भी न देकर एक इंसान से मशीन जैसा व्यवहार किया जाएगा—
👉 तब तक समस्या खत्म नहीं होगी।
और अगर फिर भी हम कहेंगे—
“सिपाही-दरोगा भ्रष्ट हैं”,
तो हम सच्चाई से आँखें चुरा रहे हैं।
श्री सतेंद्र सिंह यादव, दरोगा जी ने आज मथुरा में 38 बच्चों की जान उस समय बचाई जब बस में आग लग गई थी और बस के नीचे से आग के गोले गिर रहे थे। दरोगा जी ने तेजी से जा रही बस को अपनी गाड़ी को दौड़ाकर रोक दिया और सभी बच्चों को सुरक्षित उतार लिया।।
🚺शाहदरा जैसे भीड़ भाड़ वाले इलाके की कानून व्यवस्था बनाए रखने में आखिर क्या रहती हैं चुनौतियां ??
जानने के लिए देखिए दिल्ली पुलिस का ख़ास पॉडकास्ट " Women in Khaki"
क्लिक करें - https://t.co/B0neuMBR9m
#DPUpdates
Team of Delhi Police @DCPPCRDELHI displayed prompt response & saved a drowning girl at Najafgarh drain.
PCR staff noticed a girl slip & fall in the drain near Najafgarh Nala Bridge. Acting swiftly, the team rescued her safely.
#DPUpdates
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#DelhiPoliceWeek
मर जाना शब्द ठीक नहीं है बल्कि ये शहादत है, जो दूसरों को बचाने में जान दे दे वो शहीद होते हैं।
हर किसी को पता ही होगा कि आप आंगनबाड़ी कार्यकत्री थीं, अपने अपना जीवन देकर 25 बच्चों को चटाई से ढककर मधुमक्खियों के हमले से बचा लिया।
आपका कर्जदार वो 25 परिवार नहीं बल्कि पूरा देश है। ये इंसानियत की जीत है जो आपने ज़िन्दगी हारकर दिया है, पैसे या तनख़्वाह के लिये नहीं बल्कि उन मासूम बच्चों को अपना समझकर आपने क़ुर्बानी दे दी।
प्रदेश सरकार अपने सर्वोच्च सम्मान से उनको श्रद्धांजलि दे। और केंद्र सरकार इस वीरता के लिये अशोक चक्र से सम्मानित करे, ये हम सबकी माँग है।
कंचनबाई जी को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि🙏🏼😭
अपनी साड़ी खोलकर 25 बच्चों की जान बचाई,,लेकिन खुद की जान चली गई
आंगनवाड़ी में खेल रहे बच्चों पर मधुमक्खियों ने कर दिया था हमला
टीचर और बच्चे चीखते रहे, जिंदगी बचाने वाली कंचनदेवी की 'शहादत' को मानने तैयार नहीं अफसर
साहसिक महिला सम्मान में दो शब्द
मध्यप्रदेश के नीमच में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल जी ने मधुमक्खियों के हमले से 20 मासूम बच्चों को बचाते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। तिरपाल से बच्चों को ढककर स्वयं मानव ढाल बन जाना मानवता और मातृत्व का सर्वोच्च उदाहरण है। हम मध्यप्रदेश सरकार से मांग करते हैं कि उनके बच्चों को आर्थिक सहायता, आजीवन निःशुल्क शिक्षा व कंचन बाई जी को राजकीय सम्मान दिया जाए।
नमस्ते! मुझे सीरोंधन कट पर फ्लाईओवर के बारे में विशिष्ट जानकारी नहीं मिली। NH-34 के गाजियाबाद-अलीगढ़ सेक्शन पर 6-लेनिंग और अंडरपास प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिसमें जनवरी 2026 में एक 126 किमी का EPC कॉन्ट्रैक्ट अवार्ड किया गया है। सटीक अपडेट के लिए NHAI की वेबसाइट या स्थानीय कार्यालय से संपर्क करें।
BC रवि@पांची चाकू मारता रहा पर HC कुलदीप और Ct नीरज (शाहबाद डेरी ) ने जख़्मी होने के बावजूद उसे पकड़ा उससे पिस्टल बरामद किया I यह फिल्म का सीन नहीं था रियल कहानी है 👍 देलेरी की चौतरफा प्रशंसा हो रही है पुलिस की बुराई तो बहुत ज्यादा शेयर करते हो 😡 अच्छे काम भी शेयर करो @CPDelhi
यह छोटा लड़का और उसका परिवार इलाज के इंतज़ार में कई दिनों से AIIMS के बाहर कड़ाके की ठंड में सोने को मजबूर हैं।
लड़के का कहना है कि "हमें कई दिनों से इलाज नहीं मिल रहा है। क्या मरने के बाद ही इलाज होगा?"
इस देश में गरीब होना सचमुच पाप है।
पटना की सड़कों पर ओला-उबर की बाइक चलाते विजय कुमार सिर्फ सवारियां नहीं ढोते, वे हर दिन अपने चार साल के बेटे की जिंदगी ढोते हैं।
मूल रूप से बिहार के पानापुर गांव के रहने वाले विजय इस समय पटना शहर में किराए के छोटे से कमरे में रहते हैं।
उनका बेटा ब्लड कैंसर से जूझ रहा है। हर महीने खून चढ़वाना उसकी जिंदगी के लिए जरूरी है और इसके लिए कम से कम 8 हजार रुपए चाहिए। यह रकम न जुटे, तो बेटे की हालत कभी भी बिगड़ सकती है।
बेटा विजय के बिना एक पल भी नहीं रह पाता। इसलिए वे उसे बाइक पर साथ लेकर ही काम पर निकलते हैं। रास्ते में बच्चा कभी कुछ खाने की जिद करता है, कभी बाइक पर ही सो जाता है।
ट्रैफिक जाम में फंसने पर विजय का दिल कांप उठता है कि कहीं अचानक बेटे की तबीयत न बिगड़ जाए। डॉक्टरों ने बताया है कि पांच साल की उम्र के बाद ही उसका ठोस इलाज संभव है, तब तक हर महीने खून चढ़वाना ही एकमात्र सहारा है।
विजय की जिंदगी पहले से ही दर्द से भरी है। उनका पहला बेटा तीन महीने की उम्र में चल बसा। घर पर 95 साल के लकवाग्रस्त पिता हैं, जिन्हें वे पोते की बीमारी का सच नहीं बताते। मां, दो बेटियां और बहन की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। तमाम मजबूरियों के बावजूद विजय हार नहीं मानते। वे कहते हैं बेटे का चेहरा ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।
‘बीमारी से पहले ठंड मार देगी’
AIIMS के बाहर से रात 3 बजे
ठंड से ठिठुरते, ज़मीन पर लेटे मरीज़
रात भर Appointment के लिए लोग
बर्फ़ सी फर्श, बीमारी से तड़पते लोग
न पीने का पानी, पेशाब घर पर भी ताला
सरकार के दावों की पोल खोलती Report
Full Documentary is on Red Mike YT
जिस महिला IAS अधिकारी @divyamittal_IAS ने मिर्जापुर उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्र में हर घर तक पानी पहुंचाया ,उसको नेताओं ने मिलकर जिले से बाहर कर दिया ,
और फर्जी फोटोज , फर्जी PR और नेताओं की चापलूसी करने वाले अवार्ड जीत जा रहे ।
"मानव सेवा धर्म हमारा"
दिल्ली की कड़क सर्द रातों में ठिठुरते बेसहारों की दिल्ली पुलिस के जवान @dusibdelhi के रैन बसेरों में ठहराने में मदद कर रहे हैं।
आप से भी अनुरोध है कि ऐसे किसी भी बेसहारा की सूचना रेस्क्यू हेल्पलाइन 14461 अथवा केंद्रीय कंट्रोल रूम 011-23378789/23370560 पर दें।
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