बेटी-बेटी होती है, जाति नहीं !
RHA मेंबर प्रतीक पांडे ने सही सवाल उठाया -
OBC / जनरल बेटी के साथ रेप पर सामान्य केस,
और SC/ST बेटी पर 8 से 12 लाख का मुआवजा क्यों?
दर्द का मुआवजा जाति देख कर कैसे तय हो सकता है?
#ReservationReform#RHA
Came across a dirt cheap video defaming Swatantryaveer Savarkar recently on social media. Yesterday, one online FIR is lodged against instagram handle named "kyunandkya". I am expecting a swift action and strict punishment.
@Cyberdost@Dev_Fadnavis ji 🙏
On what basis is the BJP IT Cell attacking Rahul Gandhi for criticising Manusmriti when your own government made one of its biggest critics a Senior Advisor to the I&B Ministry?
At least keep your politics consistent. Absolute shameless hypocrites!
जब टपकती छत और घुटने भर पानी के बीच एक असहाय वृद्ध महिला अपनी बुनियादी छत के लिए तरस रही हो, तब उसकी जाति देखना इस सड़ चुके तंत्र की पराकाष्ठा है।
अगर उपनाम 'पांडेय' है, तो क्या उसे गरीबी, भूख और बारिश से सुरक्षा पाने का अधिकार नहीं है? @narendramodi
'सामाजिक न्याय' और योजनाओं का ऐसा घिनौना वर्गीकरण बना दिया गया है जहाँ सामान्य वर्ग का दरिद्र होना ही उसकी सबसे बड़ी खता बन जाता है।
योजनाएँ कागज़ों पर चमकती रहती हैं, लेकिन ज़मीन पर ज़ात देखकर पात्रता तय करने वाली सरकार ऐसे ही गरीब नागरिकों को उनके बुनियादी अधिकार से वंचित रखती है।
#PMAwasYojana #SystemicBias #MauganjMP #MeritAndEquality
मित्र @thekumarshyam की नई पहल। हमने एमेजॉन से @TharohiOrganics का गाय का घी मँगवाया! मेरी शुभकामनाएँ कि वो उत्तरोत्तर उन्नति करें। मित्रमंडली में अचार वाले, मधु वाले @MukeshPathakji और घी वाले श्याम हो गए हैं। यही लेते हैं शुद्धता की गारंटी!
ये हैं शोषक दशोदरी पांडे, जो अपने आलीशान महल के बाहर खड़ी होकर रो रही है क्योंकि उसमें पानी भर गया है और दीवारें ढह गई हैं!
ऐसे लोगों को अत्याचारी बताकर iphone चलाने वाले और mercedes में बैठने वाले "शोषित वंचित" लोग आरक्षण लेते हैं!
ये यूपी का एक ब्राह्मण परिवार है जो सरकार की नजरों में अरबपति है।
इस परिवार के पास जो घर है उसमें पानी आता है खाने को रोटी नहीं है रहने को घर नहीं है इसलिए ये बच्ची रो रही है।
इनको सरकार की कोई सुविधा भी नहीं मिलेगी क्योंकि ये अरबपति है।
और इनको आरक्षण नहीं मिलेगा क्योंकि आरक्षण मिलेगा उस मंत्री चिराग पासवान को क्योंकि वो बहुत गरीब है उसके पास खाने को भी कुछ नहीं है😡
मुसहर समाज के लोगों से जब पूछा गया कि आरक्षण किसे मिलना चाहिए, जिसे एक बार मिल चुका है उसे बार-बार, या उस गरीब को जिसे आज तक मौका ही नहीं मिला?
जवाब सीधा था, जिसे एक बार मिल चुका है, उसे दोबारा नहीं; पहले उन बच्चों को मिले, जिन्हें अब तक कुछ नहीं मिला।
इनकी आवाज़ को जगह देने के लिए पत्रकार महोदय को आभार।
आरक्षण पर बहस तेज है, लेकिन ज़रा इस बच्चे को देखिए, माँ की गोद में कुपोषण से जूझता हुआ, दवा तक ठीक से नहीं मिल पा रही।
मुसहर समाज आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है। सवाल सिर्फ आरक्षण का नहीं, बराबरी के अवसर और सामाजिक न्याय का है।
क्या हम यह सवाल नहीं पूछेंगे कि जिन समुदायों की स्थिति आज भी इतनी दयनीय है, उनके लिए व्यवस्था में पर्याप्त अवसर और प्रतिनिधित्व क्यों नहीं है?
(पत्रकार महोदय का आभार, ये दृश्य हम सभी तक पहुँचाने के लिए)
बिल्कुल।
हम वो ही बोल रहे हैं करने को, जो संविधान में लिखा है, जो कोर्ट ने बोला है, जो उन्हीं रिपोर्ट्स में लिखा है जिनके आधार पर आरक्षण दिया गया है!
उनको मानने में ना कोई संवैधानिक अड़चन है, ना कानूनी!
आरक्षण के नाम पर चल रही बंदरबांट बंद करके जिस लिए आरक्षण दिया गया था, उसको अपनाया जाए, यही मांग है!
आरक्षण-राजनीति का पिंजड़ा तोड़ पल👌
मैं फिर से कहूँगा कि @neha_laldas जैसे हैंडल्स ने आरक्षण जैसे गंभीर और जटिल मुद्दे पर साफ़गोई और तार्किक तरीक़े से बात रखते हुए एक नई मुहिम को जन्म दे दिया है। ये पहल किस दिशा में कहाँ तक जाएगा ये कहना किसी के लिए संभव नहीं, पर इन लोगो की मुहिम ने आरक्षण विषय को न सिर्फ़ अस्पृश्यता के दायरे से बाहर निकाला बल्कि इसके ढाँचे में बदलाव की ज़रूरत को भी ख़ास जनता तक पहुँचा दिया है।
ये भारतीय विमर्श में आरक्षण-राजनीति का पिंजड़ा-तोड़ पल है।
बात ओबीसी वर्गीकरण पर हो रही है।
बात एससी वर्गीकरण की हो रही है।
बात एसटी वर्गीकरण और उसे फिर से परिभाषित करने की हो रही है।
क्रीमी लेयर सिद्धांत को सही से लागू और फिर से परिभाषित करने की हो रही है।
क्रीमी लेयर सिद्धांत को एससी एसटी में जोड़ने की हो रही है।
ओबीसी एसटी ब्लॉक में सिर्फ जातियों को डालने की नहीं बल्कि उसमे से निकालने की भी बात हो रही है।
ओबीसी में मुस्लिम आरक्षण की समीक्षा की भी बात हो रही है।
दलित मुस्लिम और दलित क्रिश्चियन के नाम पर एससी में घुसने की लालसा को भी तार्किक तरीके से नकारा जा रहा है।
50% की सीमा को न लांघने देने की बात हो रही है।
आरक्षण कहीं रोलबैक नहीं होने वाला, पर यदि इन सभी बिंदुओं पर काम हो गया तो आरक्षण-राजनीति को ज़ोरदार धक्का दिया जा सकता है, जो भारत और हिंदू समाज के एकीकरण के लिए अहम है।
मैं इस मूवमेंट से नहीं जुड़ा, पर ऊपर लिखे सभी बिंदुओं पर मेरा कन्विक्शन भी है और सैद्धांतिक सहमति भी।
अठालवे जी, जाटव जी और पासवान जी का लक्ष्य इस बच्चे तक आरक्षण पहुँचाने से रोकना है। ये किस जाति का है, पता नहीं, पर इसे आरक्षण चाहिए यह इसकी थाली में पानी का होना बताता है।
Hello everyone.
Since there seems to be a confusion going on with respect to one of our demands, I thought I would explain.
One of our demands is removal of over-represented castes from SC/ST/OBC list.
Please note:
This is not going to happen via creamy layer or sub-categorization. Those are separate demands.
Over represented castes will go out via caste census data or existing caste surveys data (which is already available with many state govts).
As per article 16-4, castes which are having "adequate representation" CANNOT take reservation.
So any caste which has gained seats equal to or more than their population CANNOT take reservation.
Below are 2 examples from Bihar caste survey-2 castes (Kurmi and Kushwaha are over representated and not backward as per existing criteria. So they need to removed from OBC & should be added under GC).
This is the demand. And it's perfectly Constitutional.
I hope I have clarified.
Also, we will have regular spaces to discuss these demands in detail. Here we will clarify all doubts and take feedback as well.
Thank you 🙏
जीतनराम मांझी और ओमप्रकाश राजभर जैसे नेता अपना विकास करने के बाद समाज के लिए खुद का आरक्षण छोड़ने को तो तैयार हैं।
लेकिन चिराग पासवान और चंद्रशेखर रावण जैसे नेता अपना पेट भरने के बाद भी अपने और परिवार का पेट भरने में लगे हैं।
इनलोगों का पूर्ण रूप से बहिष्कार किया जाना चाहिए।
फिरोजाबाद में 21 राजपूत युवाओं पर SC/ST एक्ट लगा दिया गया है!
उनके परिवारों का कहना है कि पहले उनको गलियां दीं गईं, झगड़े के लिए उकसाया गया और जब उन्होंने जवाब दिया तो उनपर SC/ST एक्ट लगा दिया!
ये तरीका अब बहुत आम हो चुका है-हर जगह से यही शिकायत मिल रही है कि लोगों को उकसाकर फिर उनपर एक्ट लगाया जा रहा है!
इसलिए preliminary inquiry का प्रावधान इस एक्ट में डालना बेहद ज़रूरी है!
और कमाल ये कि इतना दुरुपयोग होने के बाद भी सरकार मुआवजा 40% बढ़ा रही है!
हेलो @firozabadpolice
उम्मीद है आप इस मामले की निष्पक्ष जांच करेंगे और बेगुनाहों को सज़ा नहीं होने देंगे!