इसी कारण रिसॉर्ट देखकर बहुत पीड़ा होती हैजंगल, जीव और प्रकृति की कब्र पर खड़े होते हैं। पहाड़ों व नदियों के ख़ून से सने होते जवाई बाँध लेपर्ड ने रोज़गार दिए लेकिन जंगल-जानवर का नाश करके ।ये क्षेत्र भूमाफियाओं व होटल माफियाओं की गिरफ्त में @BhajanlalBjp#SaveAravalli#अरावलीबचाओ
@byadavbjp@BhajanlalBjp
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय मीडिया में आया तो अरावली का भी जनता को पता चला है। अगर ऐसा न होता तो आप लोग अरावली जीम जाते और जनता को बहुत बाद बाद में आप लोगों की मिलीभगत समझ में आती। हैदराबाद, झारखंड, हिमाचल के जंगल साफ़ कर चुके हो ।#SaveAravalli#अरावली_बचाओ
नेताओं आपकी बयान बाजी नहीं हमें अरावली चाहिए।आप लोग सिर्फ़ बयानों से ही जनता को बरगला देते हो ।थार के खेजड़ी जंगल समाप्त करने के ज़िम्मेदार आप लोग ही हैं।जाने कब आप लोग जंगल-पहाड़ निगल लेते हो आम आदमी को तो बहुत बाद में कुछ समझ आता है #SaveAravalli@byadavbjp@BhajanlalBjp
आडावळ पै संकट छायौ
• शिव " मृदुल " #SaveAravalli#अरावली_बचाओ
जनता जागी, ओ संदेसौ ऊपर तक पहुंचावण खातर, अखबारों में छपबा सारूं, फोटू चोखौ खंचा, मानवी।।ढोल नगाड़ा रोज बजातां, मिनखा रा टोळा कर भेळा, आड़वळ हर हाल बचेगा" नारा साथै नचा, मानवी चुप्पी साध्यां बैठ मती 'शिव', काट सकै नी
अरावली भारत का रक्षक है। अंधी लालची सरकारें व न्यायपालिका भूमाफियाओं के लाभ के लिए भारत के मौत का इंतजाम कर रही।पर ऐसा नहीं होने देंगे। फ़ैसला वापिस लेना होगा। किसी भी राजनैतिक विचारधारा से होहम सबको इस मुद्दे पर एक साथ मिलकर न्याय की लड़ाई लड़नी हैं
#Save_Aravali#अरावली_बचाओ
सभी साथी भले किसी भी राजनैतिक विचारधारा से हो... हम सबको इस मुद्दे पर एक साथ मिलकर न्याय की लड़ाई लड़नी हैं...
2030 से यह भयावह हालात होना शुरू हो जाएंगे....
अभी भी समय हैं अपनी आवाज उठाने की...
#Save_Aravali#अरावली_बचाओ@BhajanlalBjp@PMOIndia@bhupendrasingho
"अरावली बचाओ अभियान "
जय आबूराज
पूज्य तीर्थगिरी जी महाराज का आव्हान सुनिए.!
राजस्थान की जीवन आधार अरावली पर्वत श्रृंखला को बचाने के लिए आबू संत सेवा मंडल के सभी पूज्य महंत भी आवाज उठा रहे हैं अब ऐसा लग रहा हैं परमेश्वर का आदेश हैं कि राजस्थान वासियों एक लड़ाई अरावली को बचाने के लिए लडो .!
“चुप रहना आत्मघाती हमला है। लड़ना ज़रूरी है।”
@narendramodi जी, अरावली पर हमला करने से पहले
आपको मेरे जैसे लाखों योद्धाओ का सिर धड़ से अलग करना पड़ेगा।
आज अरावली हटेगी,
कल जंगल हटेंगे,
फिर जलस्रोत,
और अंत में इंसान।
अरावली पर्वतमाला की रक्षा के लिए
मैं इस प्रदेश के गाँव–गाँव, ढाणी–ढाणी जाकर
मोदी सरकार की विनाशकारी नीतियों के खिलाफ एक क्रांति की शुरुआत करूँगा।
और देश के हर युवा से अपील है—
यह लड़ाई सिर्फ़ पर्यावरण की नहीं,
हमारे भविष्य की है। इसमें अपनी भागीदारी निभाइए।
जब तापमान बढ़ रहा है,
भूजल गिर रहा है
और शहर जहरीले बनते जा रहे हैं,
तब यह पहाड़ काटने का उतावलापन किसके हित में है?
अरावली बचेगी
तो जल, जंगल, किसान और इंसान बचेंगे।
मोदीजी आप और आपका सिस्टम नेहरू जी के ख़िलाफ़ रोना धोना करते हो। अगर उस समय नेहरू जी की जगह आप होते तो आज हिंदुस्तान के हालात पाकिस्तान से भी गए गुजरे होते।
अरावली बचेगी, तो भारत का भविष्य बचेगा।
अरावली बचाओ — भविष्य बचाओ!
#SaveAravali #SaveAravaliHills #अरावली_बचाओ
@RahulGandhi@INCIndia
#NirmalChoudhary
अरावली पर हमला = बच्चों के भविष्य पर हमला! अरावली कोई नक्शे की रेखा नहीं, बल्कि गुजरात–राजस्थान–हरियाणा–दिल्ली की जीवनरेखा है। 100 मीटर से कम ऊँचाई वाले पहाड़ों को अरावली न मानने का नियम दरअसल जंगलों को खनन माफिया के हवाले करने की साज़िश है।
यह विकास नहीं, खुला विनाश है। अरावली हमारा प्राकृतिक सुरक्षा कवच है — इसे मिटने नहीं देंगे! #SaveAravalli
अरावली थार रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोकने वाली दीवार है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि 10 से 30 मीटर ऊंची छोटी पहाड़ियां भी धूल भरी आंधियों को रोकने में उतनी ही कारगर होती हैं। इनका खनन मतलब दिल्ली तक रेगिस्तान को निमंत्रण
#SaveAravalli#अरावली_बचाओ
सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार के एक पैनल की सिफारिश स्वीकार करने के बाद अरावली पर्वत श्रृंखला की नई परिभाषा में 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियां ही अरावली का हिस्सा मानी जाएंगी, जबकि राजस्थान में स्थित 90% से अधिक पहाड़ियां अरावली की परिभाषा से बाहर हो जाएंगी।
इसका सीधा असर मरुस्थल के तेजी से विस्तार के रूप में सामने आएगा। अरावली उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भारत के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच है, जो मरुस्थलीकरण को बढ़ने से रोकने और वर्षा के लिए अनुकूल जलवायु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। साथ ही राजस्थान की कई नदियों का उद्गम भी अरावली से होता है।
नई परिभाषा लागू होने पर न केवल जलस्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा बल्कि उत्तर-पश्चिमी भारत में भयंकर जलसंकट उत्पन्न हो सकता है। भूमि में वाटर रिचार्ज क्षमता बनाए रखने में अरावली अहम भूमिका निभाती है और यदि खनन को बढ़ावा मिला तो वन क्षेत्र, हरियाली और जैव विविधता को भारी नुकसान होगा, जिससे वन्यजीवों और प्राणियों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।
ऐसे में आवश्यक है कि नई परिभाषा पर तत्काल पुनर्विचार हो।
#SaveAravali
अरावली थार रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोकने वाली दीवार है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि 10 से 30 मीटर ऊंची छोटी पहाड़ियां भी धूल भरी आंधियों को रोकने में उतनी ही कारगर होती हैं। @PMOIndia@byadavbjp@SCJudgments#SaveAravalli#अरावली_बचाओ
सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार के एक पैनल की सिफारिश स्वीकार किए जाने के बाद अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा में हुए बदलाव से अरावली के अस्तित्व पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। इसी मुद्दे को लेकर गत दिनों प्रिंट मीडिया में प्रकाशित खबरें।
#NewsUpdate#Barmer#SaveAravali
अरावली थार रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोकने वाली दीवार है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि 10 से 30 मीटर ऊंची छोटी पहाड़ियां भी धूल भरी आंधियों को रोकने में उतनी ही कारगर होती हैं। इनका खनन मतलब दिल्ली तक रेगिस्तान को निमंत्रण
#SaveAravalli#अरावली_बचाओ
अरावली का संरक्षण कोई विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता है और यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो इसके परिणाम विनाशकारी होंगे। ऐसे में आवश्यक है कि नई परिभाषा पर तत्काल पुनर्विचार हो।
#SaveAravali
अरावली थार रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोकने वाली दीवार है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि 10 से 30 मीटर ऊंची छोटी पहाड़ियां भी धूल भरी आंधियों को रोकने में उतनी ही कारगर होती हैं। इनका खनन मतलब दिल्ली तक रेगिस्तान को निमंत्रण
#SaveAravalli#अरावली_बचाओ@PMOIndia@Bhupendrapbjp