@rchandra74@Sheetal2242 मंत्रों का उद्देश्य खुद पर और अपने विकारों पर कब्ज़ा करना है ज़मीन पर कब्ज़ा करना नहीं शास्त्र (मंत्र) का काम बुद्धि और चरित्र का निर्माण करना है और शस्त्र (सेना) का काम सीमाओं की रक्षा करना चीन-पाक के लिए हमारी सेना ही काफी है, उसके लिए मंत्रों को खर्च करने की ज़रूरत नहीं है
@aashuu888 वो पुराने दौर के ही बारे में बता रहे थे और शास्त्रों का उपदेश दे रहे थे कि क्या लिखा हुआ है
अगर कोई गलत काम करता है फिर चाहे वो कोई भी हो xyz उसको उसके दोष के आधार पर सजा दी जाती थी
@kapildubeyweyou@aashuu888 उन्होंने स्पष्ट किया कि पुराने समय में शिक्षा को विशुद्ध रूप से एक 'सेवा' माना जाता था, व्यवसाय नहीं। शास्त्रों के अनुसार, जो गुरु विद्यार्थियों से धन (फीस या ट्यूशन) लेकर पढ़ाते थे, उन्हें निम्न श्रेणी या 'अधम' माना जाता था
क्या भाई तुम भी प्रोपोगेंडा में फंस गये
@aashuu888 ऐसा माना जाता था पुराने दौर में उपाध्याय, चौबे, पाठक, त्रिगुणायत और दीक्षित जैसी शाखाओं वाले लोगों ने विद्यार्थियों से पैसे लेकर पढ़ाने की परंपरा शुरू की थी, इसी वजह से उस काल के नियमों के अनुसार उन्हें निम्न श्रेणी का माना गया
पूरी जानकारी लेकर आया करो यार ये मंडल का टाइम नहीं h
@aashuu888 उन्होंने स्पष्ट किया कि पुराने समय में शिक्षा को विशुद्ध रूप से एक 'सेवा' माना जाता था, व्यवसाय नहीं। शास्त्रों के अनुसार, जो गुरु विद्यार्थियों से धन (फीस या ट्यूशन) लेकर पढ़ाते थे, उन्हें निम्न श्रेणी या 'अधम' माना जाता था
@Prajapat204 Toh bhai jaakar boliye sarkaar se ki ek bill lekar aaye parliament me ki koi bhi desh me caste ya surname ka upyog nahi karega, tumhari hi sarkaar hai itna toh karwa do, hum hai samarthan me
Par tum log aisa karoge nahi kyuki tumhari netagiri khatam ho jayegi
@Sheetal2242 Kab tak in logo ki photo dikha dikha kar malayi aap log chaate rahoge
In logo ki asli dikkat ko pehchano, aaplog hi inke hisse ka haq dakaar jate ho aur dogalapana toh dekho inki hi photo laga kar phir line me lag jate ho inhi ke hisse ka reservation lene
@Voiceofpavan भारत के सभी मंदिर सरकारी विभाग या सार्वजनिक उपक्रम नहीं हैं इसलिए उनमें सरकारी नौकरियों की तरह सीधे आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता भारतीय संविधान के अनुच्छेद 26 के तहत सभी धार्मिक संप्रदायों को अपने धार्मिक मामलों के प्रबंधन और संस्थाओं के संचालन का मौलिक अधिकार प्राप्त है
@MukeshMohannn योग्यता (Merit) को दरकिनार कर केवल तुष्टिकरण और विभाजनकारी नीतियों को बढ़ावा देना भारत की तरक्की को रोकना है। हमें समाज में और अधिक विभाजन पैदा करने वाली आरक्षण राजनीति की नहीं, बल्कि जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर योग्यता, आर्थिक न्याय और एकता की आवश्यकता है।
@ADITYA_UP45@arakshan_hatao1@ajeetbharti@ARanganathan72 Ye toh kewal ek example hai, aise 20 example de sakta hun jana desh se kai pratishthit mandiro main mukhya pujari non-brahman hai
Toh bhai ab ye sab nahi chalega, kuch naya lekar aao
@TheGuysURG@ripper_dhruvaa शादी करना पूरी तरह से एक व्यक्तिगत (Personal) और पारिवारिक पसंद है, जो भारत में हर धर्म और जाति के लोग अपनी पसंद से करते हैं। (आज ओबीसी, एससी, एसटी समुदायों के भीतर भी लोग दूसरी जातियों में शादियां नहीं करते, तो क्या इसके लिए भी जनरल कैटेगरी जिम्मेदार है?)
@_nikki_tweets शादी करना पूरी तरह से एक व्यक्तिगत और पारिवारिक पसंद है जो भारत में हर धर्म और जाति के लोग अपनी पसंद से करते हैं(आज ओबीसी, एससी, एसटी समुदायों के भीतर भी लोग दूसरी जातियों में शादियां नहीं करते, तो क्या इसके लिए भी जनरल कैटेगरी जिम्मेदार है)