याद है? कैसे बनारस को क्योटो बनाने की ख़बर पीट पीट कर चलायी गई थी?
BREAKING NEW लगा कर !
नहीं न? यही खेल है। पब्लिक मेमोरी शॉर्ट होती है। आज कुछ भी ख़बर चलवा लो कल कौन पूछेगा! है न!
जातिवादियों का गिरोह गुप्त चर्चा कर रहा है आरक्षण हटाना है मगर अभी सिर्फ सुधार की बात करेंगे।
उसमें भी एक टकला बाबा कह रहा है-सिर्फ रिफॉर्म की बात करेंगे मगर ये भी मायावती को पसंद नहीं आ रहा है।
15 साल हो गए सरकार गए हुए, खौफ़ फिर भी नहीं निकल पा रहा है🔥
भगवा पहने ये लोग मटन काट रहे हैं किसी की भावनाएं तो आहत नहीं हो रहीं ना
अच्छा याद आया भावनाएं तो non veg की दुकान खुलने से ही आहत होती है ना
कपड़े से पहचानो अगर यहां पर कोई मुस्लिम होता तो लाखों अंध भक्तों की धार्मिक भावना आहत हो जाती...
इतना डर, इतना ख़ौफ़?
छह साल के बच्चे को पुलिस ले जा रही है क्योंकि उसने प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगने वाला पोस्टर पकड़ा हुआ था।
इस तरह का भय अक्सर सरकारों की विदाई का संकेत होता है या फिर इमर्जेंसी राज का।
टीम निर्माण हो गया,
ऑफिस निर्माण हो गया,
बीजेपी और RSS का निर्माण हो गया।
सब कुछ बना लिया सरकार ने,
बस देश निर्माण छूट गया।
सरकार ने अपना सब कुछ बना लिया,
लेकिन देश को पीछे कर दिया।
हुडदंगई देखिए
कुणाल कामरा और विपक्ष के किसी विरोधी के बयान पर भावनाएं बहुत जल्द आहत
हो जाती है फिर उन लोगो को BJP आईटी सेल सरकार के चाटुकार चैनल पेपर के लोग और इनकै जिलाध्यक्ष से लेकर बूथ मथडल तक धमकियां देता है।
लेकिन जैसे ही यह लोग हनुमान जी को अपने स्वागत सत्कार मे नचा ले कांवडिए भगवान शिवजी को नचा ले तब धार्मिक भावनाएं आहत नहीं हो रही ?
मीडिया में डिबेट नहीं हो रही।
नेताओं की जबान नहीं खुल रही।
हैरत देखिए कोई चाटुकार कथाकार कथावाचक और फर्जी दूकान खोले धर्माचार्य की भावनाएं भी नही आहत हो रही।
यही दोहरा रवैया इस देश को खोखला तो कर ही रहा बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी खुलेआम प्रश्न चिन्ह खडा कर रहा है।
नरेंद्र मोदी भारत के लिए काम करते हैं या चीन के लिए?
मोदी सरकार भारत के लिए काम कर रही है या चीन के लिए?
चीन हमारी जमीनें कब्जा कर रहा है। अरुणाचल की जनता लगातार गुहार लगा रही है। कोई सुन क्यों नहीं रहा है? सरकार कुछ कर क्यों नहीं रही है? चीन को भारतीय क्षेत्र पर कब्जे की आजादी किसने दी है? घर में दुश्मन ढूंढने वाले लाल आंखधारी कब तक मौन रहेंगे?
विपक्ष को एक प्रतिनिधिमंडल बनाकर अरुणाचल में चीन सीमा का दौरा करना चाहिए। यह सरकार किसी काम की नहीं है।
चीन अरुणाचल प्रदेश के नए नए हिस्सों को नोंच नोंच कर अपने देश में मिलाते जा रहा है और "व्यापारी" नरेंद्र मोदी सरकार सब कुछ अनदेखा करके कभी चीन तो कभी अमेरिका की चाटुकारिता में लगी हुई है!
भाजपा को देश की एकता, अखंडता और सार्वभौमिकता से कोई मतलब नहीं है!
उन्हें केवल चुनाव जीतने से मतलब है!
देश का जितना भी हिस्सा बचा रहे, वहां बस भाजपा की सरकार या विधायक जीते भाजपा को केवल इससे मतलब है!
अरुणाचल प्रदेश से भाजपा के सांसद भी लगातार कह रहे हैं कि केंद्र को इस पर ध्यान देना चाहिए पर मोदी सरकार में ना तो शर्म है और ना ही देश को लेकर चिंता!
भाजपा के अंधभक्त कहते हैं कि कोई नहीं घुसा है जबकि सेना के जवान और अरुणाचलवासी लगातार बोल रहे हैं कि हर बीते दिन के साथ चीन भारत के नए-नए हिस्सों को अपने देश में मिलाते जा रहा है, उनमें dual use (सैन्य सह असैन्य) गाँव बसाते जा रहा है।
आज चीन अरुणाचल प्रदेश अपने देश में मिला रहा है, कल असम मिलाएगा और धीरे-धीरे पूरा पूर्वोत्तर भारत को निगल जाएगा। और भाजपा केवल दोषारोपण की राजनीति करके आम जनता को बरगलाते रहेगी।
@yadavtejashwi #RJD #India
बीजेपी झारखंड के युवाओं के भविष्य के लिए आवाज़ उठाने के बजाय माहौल बिगाड़ना चाहती है..
बंगाल से गाड़ियों में भरकर लाए गए लोगों ने खुद कैमरे पर कबूल किया कि उन्हें BJP द्वारा भेजा गया है और खाने-खर्चे का इंतज़ाम किया गया है।
जिन्हें आंदोलन के मुद्दे तक का पता नहीं, उन्हें छात्रों की भीड़ में शामिल कर रांची की माहौल को खराब करने की कोशिश की जा रही है।
@JmmJharkhand
लोकतंत्र ऐसे चलता है - तानाशाहियों से नहीं - कर्नाटक में छात्र आंदोलन कर रहे थे तो कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और गृहमंत्री प्रियंक खड्गे आंदोलन कर रहे छात्रों से संवाद कर समस्या का हल मिलकर निकालने के लिए खुद ही आंदोलन में पहुँच गये !
हल संवाद है - पेलेट गन-AK-47,आँसू गैस,शॉक बैटन या पुलिस की लाठी नहीं ये बात हर पार्टी, हर नेता हर सरकार को समझना पड़ेगी !