@sumit1kalra *सुख, समृद्धि, यश, कीर्ति की वृद्धि की मंगल कामनाओं के साथ हार्दिक बधाई!!*
लख लख बधाइयां और शुभकामनाएं!!
नन्द नन्दन गर्ग,
प्रांतीय महामंत्री,
संस्कार भारती,
ब्रज प्रान्त,
आगरा
कुछ दिनों पहले तक एथनॉल वाले पेट्रोल को लेकर ऐसा माहौल बनाया जा रहा था, मानो देश की हर गाड़ी कल सुबह से कबाड़ होने वाली हो। 😂
कहीं बोतल में पेट्रोल और गन्ने का रस,
कहीं फ्यूल टैंक पर चींटियाँ,
कहीं नोजल पर मधुमक्खियाँ...
बस NASA को बताना बाकी था कि भारत में पेट्रोल नहीं, गन्ने का शरबत भरवाया जा रहा है! 😂
अब अचानक शिकायतें कम हो गईं,
माइलेज भी कई लोगों को पहले से बेहतर महसूस होने लगा।
तो सवाल उठना स्वाभाविक है...
क्या सरकार ने चुपके से E20 को E10 या E15 कर दिया?
या फिर बेचारे पेट्रोल में कोई चमत्कारी सुधार हो गया? 🤔
सरकारी स्पष्टीकरण के मुताबिक देश में E20 व्यवस्था कायम है और व्यापक इंजन-क्षति का कोई सत्यापित प्रमाण नहीं मिला है।
लेकिन इंटरनेट की प्रयोगशाला में तो निष्कर्ष पहले ही निकल चुका था!
ठीक यही कहानी UPI को लेकर भी देखने को मिली।
“₹2,000 से ऊपर UPI किया तो चार्ज लगेगा!”
“UPI खत्म होने वाला है!”
“अब हर भुगतान पर जेब कटेगी!”
फिर वास्तविक नियम सामने आया...
P2P भुगतान मुफ्त,
₹2,000 तक के अधिकांश P2M भुगतान मुफ्त,
और लगभग 96% P2M लेनदेन अप्रभावित।
यानी पहले डर का ट्रेलर,
फिर आधी-अधूरी जानकारी का इंटरवल,
और अंत में नियम पढ़ने पर पता चला...
फिल्म कुछ और थी,
ट्रेलर किसी और ने बनाया था! 😂
अब बस एक सवाल बचता है...
एथनॉल हो या UPI,
क्या हर बार नीति से पहले “प्रचार” लॉन्च करने वालों का भी कोई लॉन्च-इवेंट होता है? 😏
मोदी जी, पुराना भारत ही लौटा दीजिए!
नेट बैंकिंग बंद कर दीजिए, UPI हटाइए, ATM के बाहर लाइनें लगने दीजिए। नए रेलवे स्टेशन, बेहतर सड़कें, 24 घंटे बिजली और मेडिकल कॉलेजों की बढ़ी सीटें किस काम की?
GST हटाइए, टैक्स मत लीजिए, लेकिन सुविधाएँ भी मत दीजिए।
सेना पर खर्च क्यों? सीमाएँ सुरक्षित क्यों? शहरों में धमाके बंद क्यों? रोजगार क्यों बढ़ रहे हैं? हाई-स्पीड ट्रेनें क्यों आ रही हैं?
हमें विकास नहीं, बस मुफ्त चाहिए।
सुविधाएँ नहीं चाहिए, शुल्क नहीं देना है।
यानी मांग साफ है:
भारत आधुनिक मत बनाइए, बस सब कुछ मुफ्त कर दीजिए!
चिराग पासवान कुछ दिन पहले कह रहे थे कि:- दलितों को आज भी मंदिर नहीं जाने दिया जाता
आज पासवान जी काशी विश्वनाथ के गर्भ गृह में घुसकर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर रहे हैं, पूजा अर्चना कर रहा हैं।
तो सवाल ये कि क्या अब चिराग पासवान जी अब दलित नहीं रहे?
या फिर उन्होंने झूठ फैलाया था जबकि पूरे देश में सर्व समाज मंदिर जा रहे हैं, पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
पूछना ये था की….
काफ़ी दिनों से इथेनॉल से गाड़िया ख़राब नहीं हो रही
तो कैम्पियन चलाने के लिए फंडिंग बंद हो गई
या दिमाग़ी नक्सलियों की जुबान सूख गई ??
बताओ,, बताओ 😂😂
कांग्रेस के राज में master card और Visa card लाए गए थे, जो अब भी चल रहे हैं। ये दोनों card American companies के है।
उस समय भी ये कंपनियां हर खरीद पर ये दोनों कंपनियां सीधा सीधा 2% चार्ज लेती थी।
आज भी आप ये कम्पनियां हर खरीद 2% charge ले रही है।
UPI ने 2000₹ से उपर की खरीद पर सिर्फ 0.4% चार्ज लगाया है और वो भी जायदा से जायदा 300₹। इससे उपर नहीं लगेगा।
कांग्रेस ने कभी master card और ViSA Card पर 2% का कभी विरोध नहीं किया।
करती भी कैसे अमेरिका को नाराज कैसे करेगी?
UPI का जरूर विरोध करेगी क्यों कि भारत का है।
सच तो ये कांग्रेस कभी भी भारत के साथ ना थी और ना है।
डोनाल्ड ट्रंप ऑपरेशन सिंदूर पर:
पहले दिन: “ऑपरेशन सिंदूर में 11 भारतीय फाइटर जेट मार गिराए गए।”
कुछ दिनों बाद: “भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में 8 फाइटर जेट खोए।”
दो हफ्ते बाद: “ऑपरेशन सिंदूर में कम से कम 5 भारतीय फाइटर जेट मार गिराए गए।”
अब पेंटागन इंस्पेक्टर जनरल रिपोर्ट कहती है कि ईरान संघर्ष के पहले चार महीनों में कम से कम 52 अमेरिकी फाइटर जेट, टैंकर और ड्रोन क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए।
जब ट्रंप भारतीय फाइटर जेट गिन रहे थे, तब उनके अपने सैन्य विमान गिर रहे थे।😅😅😅
एक ज़माना था, जब कांग्रेस बहुमत से सत्ता में रही और भारत में मनी ऑर्डर भेजने पर 5 प्रतिशत तक शुल्क लगता था। जी हाँ, आपने सही पढ़ा। किसी को ₹1,000 का मनी ऑर्डर भेजने पर ₹50 सरकारी शुल्क के रूप में देना पड़ता था।
इसके अलावा, मनी ऑर्डर की पावती के नाम पर कई जगह पोस्टमैन द्वारा ₹2 से ₹5 प्रति सैकड़ा तक सुविधा शुल्क लिए जाने की शिकायतें आम थीं। कुछ स्थानों पर यह राशि ₹10 प्रति सैकड़ा तक भी बताई जाती थी। कई बार सुविधा शुल्क न होने पर भी राशि काटकर बाकी पैसा दिया जाता था, और लोग इसे व्यवस्था का हिस्सा मानकर सह लेते थे।
कुछ समय पहले तक परीक्षा के लिए ₹100 की डीडी बनवाने में ₹20 तक अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता था। बैंक में पूरा दिन आवेदकों की भीड़ लगी रहती थी। दोपहर 3 बजे के बाद डीडी मिलती, फिर अगले दिन पोस्ट ऑफिस जाकर लंबी लाइन में लगकर उसे रजिस्ट्री करना पड़ता था। रजिस्ट्री के लिए भी ₹20–₹25 तक खर्च हो जाता था।
और आज?
आज UPI ने इसी भागदौड़ को कुछ सेकंड के काम में बदल दिया है। न बैंक की लंबी लाइन, न डीडी के लिए पूरा दिन, न पोस्ट ऑफिस की दौड़। मोबाइल उठाइए, भुगतान कीजिए और काम समाप्त।
डिजिटल युग में UPI अब केवल सुविधा नहीं, रोज़मर्रा की आवश्यकता बन चुका है। इससे दूरी बनाना आसान नहीं है।
बाकी कांग्रेस का काम है किकियाना।
उन्हें और उनके समर्थकों को किकियाने दीजिए, आप मस्त रहिए। 😄🇮🇳
आजीवन कारावास तो सुना था...
लेकिन आजीवन जमानत जैसी स्थिति कब तक चलती रहेगी? 🤔
सवाल किसी एक परिवार का नहीं, कानून के समान अनुप्रयोग का है।
अगर किसी राजनीतिक परिवार से जुड़े लोगों पर भ्रष्टाचार या घोटालों के गंभीर आरोप हैं, तो जनता यह जानना चाहती है कि उन मामलों की न्यायिक प्रक्रिया कहाँ तक पहुँची?
मामले वर्षों तक लंबित क्यों रहते हैं?
जाँच पूरी होने में इतनी देरी क्यों होती है?
जमानत और सुनवाई की प्रक्रिया में आम नागरिक और प्रभावशाली लोगों के लिए समान कसौटी कैसे सुनिश्चित होती है?
संविधान कहता है कि कानून की दृष्टि में समानता होनी चाहिए।
तो फिर जनता को यह भरोसा कौन देगा कि न्याय व्यवस्था में प्रभाव, पद और राजनीतिक हैसियत से अलग समान न्याय मिलता है?
न्याय में विलंब केवल कानूनी समस्या नहीं,
जनविश्वास की भी परीक्षा है।
आरोप सिद्ध हों तो दंड मिले, निराधार हों तो स्पष्ट रूप से समाप्त हों।
लेकिन अनिश्चितकाल तक लटके मामलों पर सवाल उठाना जनता का अधिकार है। ⚖️🇮🇳
दिल्ली में ‘टाटा बाय-बाय’!🚨
छह दशकों से दिल्ली की बेहद महंगी जमीन पर Ford Foundation का दफ्तर था। दफ्तर का पता: 55, लोधी एस्टेट, नई दिल्ली।
लीज़ समाप्त हुई तो केंद्र सरकार ने साफ संदेश दिया: अब यह जगह भारत की प्राथमिकताओं के लिए है।
अब यही परिसर International Big Cat Alliance (IBCA) और Global Biofuels Alliance (GBA) के काम आएगा। 🇮🇳
जिन्हें लगता था कि दिल्ली में उनकी जड़ें बहुत गहरी हैं, उन्हें अब पता चल रहा है कि भारत में अंतिम निर्णय भारत का ही होता है।
सवाल सिर्फ Ford Foundation का नहीं है...
दुनिया में कितने देश इतने आत्मविश्वास से कह सकते हैं:
“राष्ट्रीय हित पहले, बाकी सब बाद में”? 🔥🇮🇳
नया भारत किसी के प्रभाव में नहीं,
अपनी शर्तों पर फैसले करता है।
वंदे मातरम् 🇮🇳
शानदार! एकदम शानदार! 👏👏👍
कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री न होते, तो अमेरिका उन्हें कभी आमंत्रित नहीं करता...!!
USA से चौहान बाऊ नाथ का जवाब:
आदरणीय शुक्ला जी और कांग्रेसियों,
अब मैं आपको इस "अगर" की कहानी सुनाता हूँ...
1️⃣ अगर राहुल गांधी, सोनिया गांधी के बेटे न होते, तो आज वे किसी दफ़्तर में चपरासी ही होते...! 😂😂
2️⃣ अगर सोनिया गांधी, राजीव गांधी की पत्नी न होतीं, तो वे यूरोप के किसी बार की रिटायर्ड बार गर्ल होतीं...! 😂😂
3️⃣ अगर राजीव गांधी, इंदिरा गांधी के बेटे न होते, तो वे बस एक "पायलट" के रूप में ही अपनी ज़िंदगी बिताते...! 😂😂
4️⃣ अगर इंदिरा गांधी, नेहरू की बेटी न होतीं, तो वे एक आम मुस्लिम गृहिणी बनकर रह जातीं...! 😂😂
5️⃣ अगर गांधी-नेहरू ने जिन्ना के साथ मिलकर सत्ता के लालच में भारत की जनता के साथ धोखा न किया होता, तो आज अखंड भारत एकजुट रहता...!! 😂😂
6️⃣ अगर नेहरू ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जगह बेईमानी से प्रधानमंत्री पद न हथियाया होता, तो आज चीन इतना ताकतवर न होता, न पाकिस्तान बनता और न ही कश्मीर की यह समस्या कभी पैदा होती...! 😂😂
7️⃣ और अगर यह कांग्रेस न होती, तो यह तथाकथित गांधी परिवार भी अस्तित्व में न होता। इन गद्दारों और घोटालेबाज़ों के चंगुल में फँसकर पूरा देश भाई-भतीजावाद और सांप्रदायिक हिंसा से बर्बाद न हुआ होता। बल्कि, भारत दुनिया के सभी देशों का नेतृत्व कर रहा होता...!! 😂😂
राजीव शुक्ला जी...
"अगर" नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री न होते, तो भारत का कोई और प्रधानमंत्री ऐसा न होता, जो अमेरिकी राष्ट्रपति की आँखों में आँखें डालकर उनसे बात कर पाता...!! 😂😂
क्या करारा जवाब है! 🙏🏼🙏🏼
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राशिद अल्वी का दर्द है कि फ़िल्म “हनुमान अंश” से हिंदुओं को धार्मिक किया जा रहा है
और आरफ़ा को दिक़्क़त थी कि फ़िल्म “धुरंधर” से लोगों को राष्ट्रवादी बनाया जा रहा है
असल में इन लोगों को“बिल्ला नंबर 786” पर फ़िल्में देखने की लत लगी हुई है, वो भी पाकिस्तानी कलाकारों के साथ
कांग्रेस का काला अध्याय
175. 6 सितंबर 2004 प्रधानमंत्री मोदी जी को बदनाम करने के लिए उनको जेल डालने के लिए,हिन्दूओं की मौत को हादसा में तब्दील करने के लिए और मुसलमानों को ख़ुश रखने के लिए सोनिया गांधी जी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी और तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव जी के साथ मिलकर गोधरा कांड जिसमें 59 हिंदुओं को ट्रेन के डिब्बों में जला दिया के लिए न्यायिक आयोग जस्टिस यूसी बनर्जी जी के नेतृत्व में बनाया ।अयोध्या से आ रहे कारसेवकों को ज़िन्दा जलाने वाली घटना के 2 साल बाद हिंदू धर्म को प्रताड़ित करने वाली यह घटना असहनीय थी।तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को ऐन केन तरीक़े से गोधरा की घटना का ज़िम्मेदार बनाना,उसके बाद हुए हिंसा के लिए विलेन बनाकर जेल भेजना,गुजरात सरकार को बर्खास्त करना यही सोनिया गांधी जी की अन्तिम इच्छा थी ।लेकिन गुजरात हाईकोर्ट ने जस्टिस बनर्जी आयोग को ग़ैरक़ानूनी घोषित किया,हाईकोर्ट ने कहा कि जब नानावती आयोग जॉंच कर रहा है,उसका साथ दो स्पेशल टास्क फ़ोर्स दे रहा है तो घटना के 2 वर्ष बाद यह आयोग केवल राजनीतिक दुश्मनी के लिए बना है ।सत्यमेव जयते
#CongressDarkHistory
कश्मीर बन रहा बिहार, मस्जिदों के स्पीकर से इलाका छोड़ने के लिए हिंदुओं पर बनाया जा रहा दबाव। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक कर रहे हैं हिंदुओं पर हमले। बक्सर का है मामला।