अहमदाबाद में प्लेग फैला।
मजदूर शहर छोड़कर भागने लगे। फैक्ट्रियां बन्द होने का खतरा था। सेठो ने दांव खेला- मजदूरी दोगुनी कर दी।
जो केवल पेट और तन भर का कमाते थे, उन्हें उम्मीद दिखी। रुक गए, जान पर खेलकर। चिमनियों से धुंआ नही रुका। प्लेग के बावजूद अहमदाबाद की मिलें चलती रही।
और जब प्लेग खत्म हो गया,
मजदूरी वापस घटा दी गई।
●●
मजदूरों ने विरोध किया। गांधी से सहायता मांगी। गांधी ने मलिकों बात की। वे नही माने, तो मजदूरों के साथ बैठकर उन्होंने हड़ताल का आव्हान किया।
मिलें रुक गयी।
अब सेठों ने फिर दांव खेला।
जो मजदूर, हड़ताल में शामिल थे, उन्हें नौकरी से निकालने लगे। मजदूर डर गए। हड़ताल से खिसक कर वापस काम पर लौटने लगे। अब गांधी ने वो किया..
जो अनोखा था।
●●
अनशन पर बैठ गए। सेठों के खिलाफ नही, अपने ही उन समर्थकों के खिलाफ, जो मिलो में जाकर वापस काम करने लगे थे। अब मजदूरों को शर्म आयी।
एक एक कर सारे लौट आये।
गांधी ने अनशन तोड़ा।
अहमदाबाद की मिलो की वो हड़ताल, ऐतिहासिक थी। चंपारण में किसानों की लड़ाई लड़ने के बाद, गांधी का यह दूसरा समर था- मजदूरों के लिए।
अपने ही देशवासी सेठों से लड़ गए। धनपतियों को झुकना पड़ा। मजदूरी की नई दरें तय हुई।
●●
नेहा का यह उदास मुखमण्डल देखकर बुरा लगा।
जिनके संघर्ष के शामिल होने गयी, उन्ही में से किसी ने मुंह पर स्याही फेंक दी। कारण पूछने पर वामपन्थी, देशद्रोही, उमर खालिद समर्थक होने के इल्जाम धर दिये।
लेकिन आंदोलन, एक्टिविज्म, न्याय की लड़ाई में ऐसा अक्सर होता है। कि जिसके लिए आप लड़ते हैं, वही कम्प्रोमाइज्ड हो जाता है।
कारण भय, भ्रम, या लोभ- कुछ भी हो, मगर यह लड़ने वाले के बिलीफ सिस्टम को तोड़ता है।
उदास करता है।
●●
कभी गांधी ने इसका स्वाद चखा, आज नेहा ने चखा है। लेकिन इस युवा लड़की ने जब संघर्ष, औऱ नेतृत्व की राह, राह चुनी है, तो उसे ऐसे बिट्रियल का से निराश नही होना चाहिए।
कर्मण्येवाधिकारस्ते, मा फलेषु कदाचनम!! 1918 में अहमदाबाद के गांधी की तरह, अपने भीतर की रोशनी पर, अपने उद्देश्य की पवित्रता पर यकीन रखकर वह आगे बढ़ती रहे। यही संदेश है।
और शुभकामनाएं हैं।
ब्रिलियंट एन्ड डायनामिक-
अमिश देवगन।
श्री देवगन भारत के सबसे महान पत्रकारों में शुमार थे। 2014 में देश के आजाद होने के बाद, टीवी पत्रकारिता को एक नया आयाम, नई दिशा देने वाले पत्रकारों की अग्रपंक्ति में शुमार अमीश देवगन को,
आज भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित है।
●●
बी एन्ड डी, अर्थात बोल्ड एन्ड डिसाइसिव पत्रकारिता की दुनिया मे अमीश, 2002 से सक्रिय हुए। हिंदुस्तान टाइम्स में उन्होंने डेस्क रिपोर्टर से शुरुआत की। 2003 में जी मीडिया में बिजनेस रिपोर्टर बने, और 10 साल बाद, उस चैनल के चीप एडिटर के पद पर पहुँच गए।
इसके बाद उन्होंने उन्होंने नेटवर्क 18 के हिंदी चैनलों का प्रभार सम्हाला। यह वही दौर था जब देश मे चूतियापा चरम पर था।
ऐसे में उनके शो की लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई। उनके शो आर-पार को उच्च TRP मिलती रही। जल्द ही अपनी आक्रामक, आमने-सामने की डिबेट स्टाइल के लिए, उन्हें “गरीबों का अर्णब गोस्वामी" कहा जाने लगा।
●●
अमीश जी, आधुनिक युग के वाल्मीकि थे। जहां दूसरे पत्रकार सिर्फ खबरें खोजकर पढ़ते, वहां अमिश जी खबरें खुद गढ़ लिया करते थे। “आर-पार” उनका अविस्मरणीय महाकाव्य था- जहां हर रात सत्य की खोज होती है।
हालांकि सत्य लँगड़ा होने के कारण एक तरफ झुका हुआ होता था। इसी दौरान एक शो में राजीव त्यागी ने उन्हें बोल्ड एन्ड ब्यूटीफुल कहा था।
यह नाम उनसे ऐसा चिपक गया कि दुनिया मे कोई भी, किसी को, कहीं भी- बी एन्ड डी कहे, तो उसके जेहन में अमीश देवगन की तसवीर आती।
लाइव टीवी पर इतनी सहजता से टाइटल हासिल कर लेना सामान्य बात नहीं। अब तो सोशल मीडिया पर भी लोग प्यार से “Gullu B&D” कहकर पुकारते हैं।
●●
हिन्दू मुस्लिम डिबेट के दौर में अमीश देवगन ने नए आयाम छुए। वे निडरता से सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को “लूटेरा चिश्ती” कह गए। बाद मे FIR होने पर क्षमा मांग ली।
मई 2020 में कुर्ला में एक मस्जिद में वाली लॉकडाउन के दौरान मुसलमानों की भीड़ नमाज की खबर चलाई, जो झूठी निकलने पर माफी मांग ली।
इससे प्रमाणित होता है कि वह एक विनम्र शख्शियत है, और माफी मांगने में ज्यादा समय नही लगाते।
●●
वे एक देशभक्त पत्रकार थे।
अपनी डिबेट में सप्ताह मे 3 दिन पाकिस्तान को घुटने पर ले आते। उसकी कमर तोड़ देते थे, और कराची लाहौर में धुंआ धुंआ करवा देते थे। अपने अंतिम वर्षों में कम से कम डेढ़ सौ बार उन्होंने पाकिस्तान को दिवालिया भी करवा दिया था।
दरअसल अमिश देवगन सिर्फ एंकर नहीं, एक संस्था थे। जहां अर्णब अंग्रेजी में जोर से चिल्लाते हैं, वहां कम पढ़े लिखे भक्तों के लिए अमिश जी, आसान हिंदी में किफायती संस्करण पेश करते हैं।
●●
दरअसल वे महान पत्रकार थे।
जिन्होंने दिखाया कि पत्रकारिता का असली मतलब है- सवाल पूछना लेकिन सही सवाल, सही समय पर,
और सही पार्टी की तरफ से..
देश के एक तबके के लिए वह अफीम की डली थे। जिसे उनकी लत लग चुकी है। उसे हर शाम किसी B&D की चीत्कार सुने बगैर नींद नही आती।
भोजन पचता नही,
अजीर्ण हो जाता है।
●●
आज जब वे नही रहे, (चैनल पर)
तो सूना स्टूडियो कराह रहा है।
और उनके दर्शक, सूनी आंखों से, उनकी छोड़ी हुई जगह को निहार रहे हैं। सोच रहे हैं, काश किसी कोने से वह फिर लौट आये। उस चैनल के किसी कॉर्नर से, पर्दे के "आर पार" से एक बार फिर वही आवाज सुनाई दे..
"थोड़ी मर्यादा रखिये"
💐💐💐💐💐💐💐
वे जल्द ही किसी यू ट्यूब चैनल पर वे नजर आ सकते है। दिखते ही लाइक, सब्सक्राइब कर लें, और घण्टा दबा दें।
ताकि उनसे आपका सम्पर्क बना रहे। बाकी तो जय हो गुल्लू महराज की।
जब तक सूरज चांद रहेगा
B&D का नाम रहेगा
🙏
And if a Muslim offers Namaz in a corner of a train or on his own seat for 5 minutes, it becomes a national security threat. Is this what majority privilege looks like ?a Hindu First India ?
कहना तो नहीं चाहिए पर....
कतई नीच आदमी हो @AshokShrivasta6 😠
तुम्हारी भी मां, बहन और बेटी होगी.. किसी महिला को C कैटेगरी की कहने के संस्कार कहां से मिले हैं तुम्हें??
और गृह मंत्री का किसी भी मुद्दे पर जवाबदेह नहीं बनना? क्या आपने या आपके चैनल ने गृह मंत्री को दिल्ली दंगों- मणिपुर- पहलगाम या अब जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में हिंसा- किसी मुद्दे पर भी सवाल किए हैं रजत जी? ये कैसी पत्रकारिता है जो सत्ता में बैठे- सवालों से भागते PM और मंत्रियों को जवाबदेह नहीं बनाता?
Exclusive: @gautam_adani TV @ians_india propaganda Expose!
Today @ians_india reached out to 4 'Students' to get a positive reaction from them, After PM Modi's tweet on paper leak and on Student's protest at Jantar Mantar. Surprisingly, All 4 'Students' praises PM Modi, Criticized the opposition, Claimed that CJP is foreign funded, dependant on foreign forces, Chinese Funded etc etc...
But the PRO-BJP Propaganda News Agency intentionally did not mention that all 4 students they reached out to are part of ABVP, A Student wing of RSS. The first student they spoke to is Swadhin, He is a General Secretary of ABVP, Mahanagar. Other three students are also associated with ABVP. Why misleading viewers by showing students associated with the BJP/RSS as normal students?
Another News Agency was known for running such propaganda, Now After Adani acquired IANS News Agency, They started Pro-BJP Propaganda too.
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि को बुरा लगा कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने मोदी के घर के बाहर प्रदर्शन किया.
इनका पहले दिन से एक एजेंडा है- किसी भी तरह से विपक्ष को डिस्क्रेडिट कर दो.
इनके मुंह से मोदी के खिलाफ एक शब्द नहीं निकलता है. इसलिए इनकी मंशा पर शक होता है.
इनके अनुसार युवाओं के लिए विपक्ष प्रदर्शन ना करे, सिर्फ मोदी और RSS के चहेते लोग ही प्रदर्शन कर सकते हैं.
अब इनका खेल साफ समझ आ रहा है.
बचकानी बात है यह।
गीतांजलि कॉल देकर ख़ुद संसद मार्च से ग़ायब रहीं, बच्चे पिटे।
कल तक सोनम माँग कर रहे थे कि विपक्ष मिलने आए और सदन में मुद्दा उठाने का वादा करे, आ
सदन में मुद्दा न उठाने देने पर राहुल संघर्ष में उतरे तो गीतांजलि उसका विरोध कर रही हैं।
आंदोलन पर किसी का ठेका नहीं होता, वह विपक्ष के नेता हैं उन्हें अपने तरीके से मुद्दा उठाने का हक़ है।
पति-पत्नी बार-बार सरकार से अपना गठजोड़ साबित कर रहे हैं।
Hello @republic, Please decide whom to blame for the Protest at Jantar Mantar.
You once Blame America ( Both Trump & Soros)
Then you blamed China,
Then you blamed Bangladesh,
Then you blamed Pakistan,
And then CIA.
And Arnab later blames the protesters when the heckle your 'Hard working Reporters'.
A viral CCTV clip from MP, Deori bus stand showing a man sexually harassing a woman on a parked bus before she hits back by slapping him is shared on social media my right wing handles like @SonOfBharat7 with a false communal claim that the accused was a Muslim name Sahil. Police arrest the accused Nitish Gond.
मुग़ल बादशाह भारत को लूटने नही शासन करने आए थे.
भारत का एक रुपया भी बुखार या समरकंद नही गया.
Babur की मृत्यु आगरा में हुई. बाद में अवशेषों को काबुल में दफन किया गया. मुग़ल साम्राज्य में अफगानिस्तान भारत का अभिन्न अंग था.
Humayun की मृत्यु दिल्ली में हुई.
Akbar की मौत आगरा में हुई.
Jahangir कश्मीर के राजौरी में मरे, दफन लाहौर में किया गया.
Shahjahan की मौत आगरा किले में हुई. ताजमहल के तहखाने में दफन किया गया.
Aurangzeb की मौत महाराष्ट्र के अहमदनगर में हुई, आज नाम अहिल्याबाई नगर है.
अनुपम खेर बताना चाहिए मुग़लों ने जो खजाना लुटा वो कहां लेकर गए. अगर अनुपम खेर का जन्म मुग़ल काल में हुआ तो अनुपम खेर अकबर के दरबार में मंत्री होते, बादशाह जिंदाबाद के नारे लगा रहे होते.
पानी दे दो मैं मर जाऊंगा… ये केतन के आखिरी शब्द थे। लेकिन केतन को पानी नहीं दिया, उसने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। केतन उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र के रहने वाले थे। केतन दलित समुदाय से थे। उनसे एक ‘अपराध’ हो गया। वो तथाकथित सवर्ण जाति की युवती से प्रेम कर बैठे, वह युवती भी टिहरी गढ़वाल क्षेत्र के खोलगढ़ की रहने वाली है। केतन मुंबई से लौटे और अपने घर पर आराम कर रहे थे, तभी उनकी प्रेमिका का फोन आ गया, उसने केतन को मिलने के लिए बुलाया। केतन अपने एक दोस्त को साथ लेकर प्रेमिका से मिलने जा पहुंचे, लेकिन ‘पकड़े’ गए।
युवती के परिजनों ने केतन और उनके दोस्त को रात भर जानवरों की तरह पीटा, केतन की जान चली गई, उनका दोस्त अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा है। केतन के पिता का कहना है कि उनके पास सुबह फोन आया कि अपने बेटे के ले जाओ, जब वो वहां पहुंचे तो केतन मर चुके थे। केतन के पिता बताते हैं कि केतन के साथ दरिंदिगी तमाम हदें पार की गईं हैं, उसके नाखून तक उखाड़ लिए गए।
केतन के परिवार को उत्तराखंड सरकार ने आठ लाख रुपये का मुआवज़ा देने का एलान किया है। लेकिन उत्तराखंड सरकार में इतनी हिम्मत नहीं है कि केतन के हत्यारों के घरों पर बुलडोज़र चला पाए? उत्तराखंड की पुलिस में भी इतनी हिम्मत नहीं है कि केतन के हत्यारों का जुलूस निकाल पाए या एनकाउंटर कर पाए? केतन पानी मांगते मांगते दुनिया से चला गए, लेकिन दरिंदों ने ज़रा भी तरस नहीं खाया। Brut ने केतन पर जो स्टोरी की है, उसकी शुरूआत ही केतन के इन शब्दों से होती है “पानी दे दो मैं मर जाऊंगा” केतन के हत्यारों का मक़सद सिर्फ उसे मारना नहीं था, बल्कि उसके साथ क्रूरता करके ‘दूसरों’ को यह ‘मैसेज’ भी देना था कि ‘प्रेम व्रेम, मोहब्बत वोहब्बत’ ये सब ‘अपने’ ही समाज में करो, कथित सवर्णों में नहीं। इस देश में सदियों से यही चला आ रहा है। यही कारण है कि 21वीं सदि में भी दलितों पर होने वाला अत्याचार थम नहीं पाया है। NCRB के 2023 के आंकड़े बताते हैं कि दलितों पर अत्याचार के 57 हज़ार से भी अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। मानवता को शर्मसार करने वाली इन गाथाओं से भारत विश्व गुरु बनेगा? या विष गुरु?