सरासर भूल करते हैं उन्हें जो प्यार करते हैं। बुराई कर रहे हैं और अस्वीकार करते हैं
उन्हें अवकाश ही इतना कहाँ है मुझसे मिलने का किसी से पूछ लेते हैं यही उपकार करते हैं...!
~ जयशंकर प्रसाद
फूल को ख़ार बनाने पे तुली है दुनिया, खुद को बीमार बनाने पे तुली है दुनिया. हम महकती हुई मिट्टी हैं इसी आँगन की, हमको दीवार बनाने पे तुली है दुनिया
~ कुँअर बेचैन