RIP राजस्थान पत्रिका 🙏🏻🙏🏻🙏🏻
कल सुबह के दिल्ली के कई अख़बारों में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के छात्रों की गूँज अभियान की पुणे में हुई सम्मेलन की ख़बरें देखने को मिलीं।
इसी बीच राजस्थान का एक बड़ा ��ख़बार ‘राजस्थान पत्रिका’ देखा जो कभी स्वर्गीय कर्पूरचंद्र कुलिश जी ने पत्रकारिता के बड़े मानक स्थापित करने के लिए शुरू किया था।
यह लिखते हुए बड़ा ही दुख हो रहा है कि आज गुलाब कोठारी के नेतृत्व में वो अख़बार सिर्फ़ सत्ता की चरण पादुकाओं तक ही सीमित रह गया है। देश का नेता प्रतिपक्ष कहीं इतना बड़ा सम्मेलन कर रहा है और वो भी महिलाओं से संबंधित, उस सम्मेलन से संबंधित एक भी ख़बर राजस्थान पत्रिका में नहीं छपी? वहीं दूसरी तरफ़ BJP की कार्यकारिणी की बैठकों का एजेंडा तक इस अख़बार में छापा जाता है।
क्या महिला सुरक्षा राजस्थान पत्रिका के लिए ज़रूरी मुद्दा नहीं है? या नेता प्रतिपक्ष द्वारा उठाया कोई मुद्दा गुलाब कोठारी जी को पसंद नहीं आता? ऐसा नहीं है कि ये भेदभाव पहली बार हुआ है। इससे पहले भी कां��्रेस और भाजपा से जुड़ी खबरों की हैडलाइन में आपको पक्षपात दिख जाएगा। लेकिन यहाँ महज़ पार्टियों की बात नहीं थी, यहाँ महिला सुरक्षा और अधिकारों की बात थी। इसी अख़बार में BJP से जुड़ी राजनीतिक ख़बर को मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है। लेकिन महिलाओं को समर्पित कार्यक्रम की एक फोटो तक नहीं छपी।
आज कहते हुए बड़ा अफ़सोस हो रहा है कि कोठरी जी ने उन सिद्धांतों से समझौता कर लिया है जो कुलिश जी ने स्थापित किए थे। एक प्रकार से ये राजस्थान पत्रिका के पत्रकारिता मूल्यों का अवसान है।
RIP Rajasthan Patrika as a Newspaper
हो सकता है बाक़ी अख़बारों की यही हक़ीक़त हो, किंतु मेरे यहाँ सिर्फ़ राजस्थान पत्रिका ही आता है।
सबूत के तौर पर कल के अख़बार की फोटो संलग्न है।
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देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश के पहले चुनाव के नतीजों के बाद 18 मई, 1952 को देश के मुख्यमंत्रिय��ं को लिखा, “मुझे बड़े अफसोस के साथ यह कहना पड़ रहा है कि महिलाएं कितनी कम संख्या में महिलाएं निर्वाचित हुई हैं और मुझे लगता है कि राज्य विधानसभाओं और परिषदों में भी ऐसा ही हुआ होगा। इसका मतलब किसी के प्रति नर्म पक्ष दिखाना या किसी अन्याय की ओर इशारा करना नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य के विकास के लिए अच्छा नहीं है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि हमारी ��ास्तविक प्रगति तभी होगी जब महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका निभाने का पूरा अवसर मिलेगा।”
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कांग्रेस को वैचारिकता का शिखर बताने वाले बुद्धिजीवियों, पत्रकारों और पक्षकारों को अभी कांग्रेस के नेताओं और ऑफिसियल पेजों से सिखों के ख़िलाफ़ दिल्ली में हुई हिंसा मे�� सिखों की हत्याओं के दोषी सज्जन कुमार को महान बताने वाले बयान देख, सुन और पढ़ लेने चाहिए.
कांग्रेस का सेक्युलरिज्म बस ऐसा सा ही रहा है.
जहाँ बात रिकॉन्सिलिएशन की करनी चाहिए थी, वहाँ ये लोग हत्यारे को महान बताने में जुटे हुए हैं.
@mandeeppunia1
इस देश को राहुल गांधी की कब से जरूरत थी ! उन सभी लोगों का धन्यवाद ,जिन्होंने भी इस आदमी को पप्पू कहा ! अपमानित किया, तिरस्कृत किया ! राहुल गांधी के खिलाफ षड्यंत्र किया। यह सब न होता तो यह सामने कैसे आता कि एक आदमी की अंतर्मन की शक्ति कितनी अधिक हो सकती है ! -
यह आदमी देश बदल रहा है, नजरिया बदल रहा है। संघर्षो का आदर्श बन चुका है। लोग घरों में कहने लगे हैं, ज्यादा नवाब मत बन , राहुल गांधी से बड़ा नवाब नही है तू , वो प्रधानमंत्रियों के खानदान में पैदा हुआ है। देख कितनी मेहनत और संघर्ष कर रहा है !
हर दिन राहुल गांधी कुछ नया लेकर आ रहे हैं, लोग इन्तेजार कर रह��� हैं कि वो सामाजिक बुराइयों से भी लड़ेंगे, वो दहेज़ , रूढ़िवादीता, धर्मांधता के खिलाफ भी आवाज़ उठाएंगे। यह आदमी Voice of india बनता जा रहा है।
पता नही किस मिट्टी का बना है , टूट ही नही पाया, आज पुणे में महिलाओं के जिन मुद्दों को राहुल गांधी ने उठाया वो असली महिला क्रांति लाएगा।
राहुल गांधी के भाषण का एक हिस्सा -
एक बात गांठ बांध लीजिए - सिर्फ मां, बेटी, बहन या पत्नी होना महिलाओं की पहचान नहीं है।
आपकी ��हचान आप खुद हैं - आपके सपने, आपकी आकांक्षाएं और आपकी अपनी उपलब्धियां।
#nehrustudycircle #RahullGandhi
हर रिश्ता ज़रूरी है, मगर उन सबसे ज़्यादा ज़रूरी है आपका अपना अस्तित्व।
जंतर-मंतर में गालियाँ लड़कों ने भी दीं और लड़कियों ने भी दीं. प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि गाली देना कल्चरल शॉक लगा, क्योंकि लड़कियों ने गाली दी.
मोहन भागवत जी कहते हैं कि इंडिया में रेप होता है और भारत में रेप नहीं होता है. खट्टर जी कहते हैं कि 80% रेप महिलाओं के कारण होते हैं.
इसी माइंडसेट से लड़ाई चल रही है कि लड़की पिंज���े में बंद होनी चाहिए. उसका कंट्रोल रहना चाहिए.
हम ऐसा हिंदुस्तान नहीं चाहते. हम न्याय चाहते हैं, ऐसा जहाँ सबका रिस्पेक्ट होना चाहिए.
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Remembering Rajiv Gandhi on his Birth Anniversary.
Rajiv Gandhi envisioned an India that was modern, inclusive, and forward-looking. His commitment to technological advancement, youth empowerment, democratic decentralization, and national unity continues to inspire generations.
As we pay tribute to his legacy, we also reaffirm our commitment to the values of progress, scientific temper, social justice, and democratic ideals.
“भविष्य उनका है जो अपने सपनों की खूबसूरती पर विश्वास करते हैं।”
श्रद्धांजलि और शत्-शत् नमन।
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आनंदमोहन बोस जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। भारतीय राष्ट्रीय आं���ोलन के अग्रणी राष्ट्रवादी, प्रख्यात विधिवेत्ता और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय एकता और राजन���तिक जागरूकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका राष्ट्रप्रेम, जनसेवा और शिक्षा के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।
#nehrustudycircle
14 वीं लोकसभा के चुनाव परिणाम आ चुके थे। यूपीए बड़ी ताकत बनकर उभरा था। यह लगभग तय माना जा रहा था कि सोनिया गांधी देश की प्रधानमन्त्री बनेंगी। हम सब भ�� यही चाह रहे थे क्योंकि पवार ,सुषमा स्वराज, तारिक अनवर के विदेशी मूल के बयानों से हम सब चिढ़े हुए थे। केवल कांग्रेस ही नहीं बल्कि यूपीए में शामिल सभी घटक दल इस बात पर अड़ गए कि जैसे ��ी हो उन्हें यह पद स्वीकारना होगा। लालू प्रसाद यादव ने ऐलान किया कि अगर सोनिया जी पीएम नहीं बनेंगी तो मैं उनके घर से नहीं हटूंगा भले पुलिस से मुझे फिकवा दिया जाए।
15 मई को सोनिया गान्धी को संसदीय दल का नेता चुन लिया गया था लेकिन आश्चर्यजनक ढंग से 17 मई को भी सोनिया गांधी के निवास पर संसदीय दल की बैठक बुलाई गई थी मंच सजा हुआ था। एक कोने में बैठी प्रियंका गांधी अपनी माँ के दिए जाने वाले भाषण का हिंद��� अनुवाद कर रही थी। उन्होंने कुछ गिने चुने लोगों को बताया कि माँ ने तय कर लिया है वो प्रधानमन्त्री का पद स्वीकार नहीं करेंगी! सभी अवाक हो गए।
इसकी सूचना अभी सांसदों को नहीं थी। इसकी सूचना जिन वरिष्ठ नेताओं को मिली दौड़े दौड़े दस जनपथ पहुंचे, थोड़ी देर में गठबंधन दलों के सारे नेता वहां आ गए। सोनिया जी ने कहा कि मैं अपने फैसले पर अडिग ह���ँ लेकिन नेताओं ने कहा कि आपको पुनर्विचार करना चाहिए।
लेकिन सोनिया तो सोनिया ठहरी अगले दिन सेन्ट्रल हाल में संसदीय दल की बैठक में उन्होंने अपना भाषण दिया। देश भर ने टेलीविजन पर उन्हें बोलते सुना लोगों के गले रुंधे हुए थे और लोगों के भी भाषण हुए सबने कहा पद स्वीकार करिए मगर यह तय हो गया कि वो पीएम पद ग्रहण नहीं करेंगी।हम दिल्ली से हजार किमी दूर टीवी के सामने अंगुलियां क्रॉस करके बैठे थे।
उस दिन पुनर्विचार के साथ साथ उन्हें फैसला करने का अधिकार देने का प्रस्ताव भी लाया गया था लेकिन सभी जानते थे कि पुनर्विचार का प्रस्ताव स्वीकार नहीं होगा। उधर दस जनपथ के बाहर 10 हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ जमा थी।
भूख हड़ताल, धरना प्रदर्शन आत्महत्या की धमकी सब दी गई। मगर सोनिया कहाँ मानने वाली थी। 19 मई की बैठक में सुरेश पचौरी ने बताया कि लोग धीमे धीमे आपकी बात मानने को तैयार हो गए हैं। मनमोहन सिं��� ने अपने भाषण में कहा कि यह आपकी कुर्सी है जिस पर आप मुझे बैठा रही हैं मैं तो धन्यवाद करने का भी साहस नहीं कर सकता।
मेरी माँ ने उस रोज कहा हिन्दुस्तानी स्त्रियाँ ऐसे ही बेमतलब के त्याग करती रहती हैं। आज जब मोदी और सोनिया की तुलना करता हूँ तो पाता हूँ एक वो है जिसने तीन बार पीएम के पद को ठोकर मार दी। एक वो है जो तीन बार पीएम बना जिसके लिए पीएम पद सब कुछ है, लेकिन उसके पास न तो संवेदना है न त्याग।
सोनिया जी की जीवनी आ रही है। हम आज भी जानना चाहते हैं कि उस वक्त सोनिया जी ने पीएम मद के लिए मना क्यों किया था?
#soniagandhi
@awesh29
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‘… India is an old country but a Young Nation
I am Young & I too have a dream
I Dream of India - Strong, Independent, Self-reliant & in Front Rank of Nations of the World, in the Service of Mankind …’
- Bharat Ratna Former PM Mr #rajivgandhi ji
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http
राजीव गांधी जी ने अपने समय से आगे का भारत देखा था।
एक ऐसा भारत जहाँ युवा देश की ताकत बनें, शिक्षा और विज्ञान नई राह दिखाएँ, तकनीक हर घर तक पहुँचे और समाज मे��� भाईचारा बना रहे।
उन्होंने सिर्फ़ सपने नहीं देखे, बल्कि अपने फैसलों से उस भारत की नींव रखी, जिसे आज हम आगे बढ़ते हुए देख रहे हैं।
राजीव गांधी जी की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण नमन।
उनकी सोच और उनके सपनों का भारत बनाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।
#nehrustudycircle
#RajivGandhi
21वीं सदी का स्वप्न दृष्टा
राजीव गांधी 40 साल की उम्र में भारत के प्रधानमंत्री बनने वाले सबसे युवा व्यक्ति थे। वे सिर्फ़ पाँच साल इस पद पर रहे। लेकिन इन पाँच साल में भारत में सामाजिक न्याय, पंचायतीराज, आधुनिक टेक्नोलॉजी और विकास के एक ��ए युग का सूत्रपात हुआ।
उनके प्रमुख योगदान
1. सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार क्रांति:
राजीव गांधी को भारत में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और दूरसंचार क्षेत्र का अग्रदूत माना जाता है। उन्होंने कंप्यूटर और टेलीकॉम तकनीक को बढ़ावा दिया। सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेली��ैटिक्स (C-DOT) की स्थापना और एमटीएनएल (महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड) जैसे संस्थानों की शुरुआत उनके प्रयासों का हिस्सा थी। उनकी नीतियों ने भारत को डिजिटल युग की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2. पंचायती राज और स्थानीय स्वशासन:
राजीव गांधी ने पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए। 1989 में 64वां और 65वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया गया, जिसने ग्रामीण और स्थानीय स्���र पर शासन को सशक्त करने की नींव रखी। हालांकि ये विधेयक उस समय पास नहीं हुए, लेकिन बाद में 73वें और 74वें संशोधन (1992) में उनकी दृष्टि साकार हुई।
3. शिक्षा नीति का विकास:
1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NPE) राजीव गांधी के नेतृत्व में लागू की गई। इस नीति ने शिक्षा के प्रसार, विशेषकर प्राथमिक और तकनीकी शिक्षा पर जोर दिया। जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना भी उनके कार्यकाल की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना था।
4. महिलाओं और युवाओं का सशक्तिकरण:
राजीव गांधी ने युवाओं और महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू कीं। उन्होंने 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को मतदान का अधिकार देने के लिए संविधान संशोधन (61वां संशोधन) लागू किया, जिससे युवाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ी। साथ ही, महिलाओं के लिए सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर दिया।
5. शांति प्रयास और विदेश नीति:
राजीव गांधी ने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए कई प्रयास किए। श्रीलंका में तमिल-सिंहली संघर्ष को सुलझाने के लिए भारत-श्रीलंका समझौता (1987) उनके प्रयासों का परिणाम था। इसके अलावा, उन्होंने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) को मजबूत करने में योगदान दिया।
6. विज्ञान और तकनीक को बढ़ावा:
राजीव गांधी ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी ��े क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया। मिसाइल विकास कार्यक्रम (जैसे अग्नि और पृथ्वी मिसाइल) और अंत��िक्ष अनुसंधान में प्रगति उनके कार्यकाल में तेज हुई।
7. पर्यावरण संरक्षण:
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए कई कदम उठाए, जैसे गंगा नदी की सफाई के लिए गंगा एक्शन प्लान की शुरुआत। यह भारत में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
8. आर्थिक सुधारों की शुरुआत:
हालांकि बड़े पैमाने पर आर्थिक उदारीकरण 1991 में हुआ, राजीव गांधी ने अपने कार्यकाल में आर्थिक सुधारों की नींव रखी। उन्होंने न���जी क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया और लाइसेंस राज को कम करने की दिशा में कदम उठाए।
राजीव गांधी का शासनकाल आधुनिक भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण कालखंड था। उनकी दूरदर्शी नीतियों और तकनीकी प्रगति पर जोर ने भारत को 21वीं सदी की ओर अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
#nehrustudycircle
#RajivGandhi
PM Rajiv Gandhi addressed Joint session of US Congress in 1985
His wit, vision, humor made everyone fall in love with India back then.
His historic “India is an old country but a young nation” remains one of the most powerful address ever.
#nehrustudycircle#rajivgandhi
राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें याद करने की एक वजह जवाहर नवोदय विद्यालय भी हैं।
जब देश में शिक्षा के अवसर अक्सर शहरों तक सीमित थे, तब राजीव गांधी ने एक ऐसा सपना देखा जिसमें गांव का ��्रतिभाशाली बच्चा भी देश के सर्वश्रेष्ठ स्कूलों में पढ़ सके। इसी सोच से जवाहर नवोदय विद्यालयों का मॉडल सामने आया। राजीव गांधी खुद दून स्कूल जैसे प्रतिष्ठित बोर्डिंग स्कूल में पढ़े थे तो उन्हें ग्रामीण भारत के लिए भी ऐसे स्कूलों का सपना देखा।
नवोदय सिर्फ एक स्कूल नहीं है, यह सामाजिक बराबरी और प्रतिभा को अवसर देने का एक अद्भुत प्रयोग है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों से आने वाले बच्चों को ग���णवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन, आवासीय माहौल और बेहतर संसाधन मिल ताकि उनकी प्रतिभा सिर्फ इसलिए न रुके क्योंकि उनका जन्म किसी बड़े शहर में नहीं हुआ।
आज देश के अलग-अलग क्षेत्रों में नवोदय से निकले हजारों बच्चे शिक्षा, प्रशासन, सेना, विज्ञान, चिकित्सा, राजनीति और दूसरे क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं।
मैं भी जवाहर नवोदय विद्यालय का विद्यार्थी रहा हूं। इसलिए मेरे लिए नवोदय सिर्फ एक संस्था नहीं, मेरे जीवन का वह हिस्सा है जिसने गांव से निकलकर बड़े सपने देखने का हौसला दिया।
राजीव गांधी क��� जयंती पर उस विचार को नमन, जिसने यह भरोसा जगाया कि प्रतिभा गांव में भी उतनी ही होती है, बस उसे अवसर चाहिए।
@hemantrajora_
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जेहनी नक्सल..
आजादी की वर्षगांठ पर लाल किले से नया शब्द प्रचलन में आया है। प्रधानमंत्री ने बताया है कि हथियारबंद नक्सली तो खत्म हो चुके हैं। लेकिन अब अगला मिशन..
"जेहनी नक्सलियों से हिंदुस्तान को बचाना है"
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तब मुझे बरबस, जार्ज औरवेल का 1984 उपन्यास याद आता है। थॉट क्राइम इस उपन्यास में एक केंद्रीय अवधारणा है। यह सत्ताधारी पार्टी, और उसके सुप्रीमों - "बिग ब्रदर" के खिलाफ कोई भी विचार, भावना या संदेह रखने का अपराध है। चाहे वह व्यक्त न भी किया गया हो।
ओशिनिया नाम के इस टोटलिटेरियन स्टेट में पार्टी की विचारधारा से अलग के सोचना ही अपराध है। दल का मानना है कि विचार ही विद्रोह की जड़ है। इसलिए जनता के शरीर पर नियंत्रण के साथ-साथ, दिमाग पर भी एब्सलूट कंट्रोल जरूरी है।
जो विचार बिग ब्रदर या पार्टी पर सवाल उठाते हों। जो स्वतंत्र सोच, व्यक्तिगत यादें, प्रेम, को बढ़ावा देते हों। जो लोग “डबलथिंक” न कर पाते हों (जैसे एक विदेशी महिला का अपमान करना, और दूसरी विदेशी महिला के उल्लेख पर स्त्री सम्मान की दुहाई देना ),
या “न्यूस्पीक” ( ���रकार द्वारा निर्धारित, एक छोटा शब्दकोष) से बाहर के शब्द सोचना, सरकार के बने निर्देशों ( जैसे 2+2= 5) पर शक करना थॉट क्राइम है।
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विचारों पर कंट्रोल के लिए बाकायदा एक थॉट पुलिस है। वह टेलीस्क्रीन, माइक्रोफोन, आपके बच्चों और पड़ोसियों के माध्यम से लगातार निगरानी करती है।
कोई भी चेहरे का भाव, मुस्कान, या डायरी में लिखा शब्द थॉट क्राइम साबित हो सकता है। उस देश में यह सबसे खतरनाक, बुनियादी अपराध है। पार्टी सिर्फ शरीर नहीं, बल्कि दिमाग को “ठीक” करना चाहती है।वह ठीक न हो सके..
तो व्यक्ति का अस्तित्व मिटा दिया जाता है।
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नॉवेल के हीरो और हीरोइन को थॉट क्राइम के लिए गिरफ्तार किया जाता है। वहाँ प्रेम अपराध है, अगर बिग ब्रदर के अलावे किसी से भी किया जाये
मिनीस्ट्री ऑफ लव में हीरो को यातना गृह में ले जाया जाता है। जहाँ उसकी सबसे भय को इस्तेमाल करके उसकी इच्छाशक्ति तोड़ दी जाती है। अंततः वह अपराध की सम्पूर्ण जिम्मेदारी हीरोइन पर डालकर, उसे मौतघर भेजवा देता है।
खुद की जान बचाकर, बिग ब्रदर से सच्चा प्यार करने लगता है।
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थाट मूलतः एक थॉट है। जेहन में कुछ भी आ सकता है, जो समय, काल, नैतिकता या नियमों के अनुरूप हो सकता है, और नहीं भी।
इसके एक्सप्रेशन या इम्प्लीमेंटेशन का दबाव किस तरह बना��ा जाता है, स्टेट की प्रतिकिया उससे तय होती है। मसलन इस देश में ख़ालिस्तान माँगा गया, नही मिला। कश्मीर की आजादी मांगी गयी, नहीं दी गयी।
उन मांगों मे हिंसा थी, धमक थी। इस देश की एकता अखंडता तोड़ने का भाव था।इनका दमन, स्टेट को करना चाहिए। वेल एन्ड गुड..
लेकिन इसी देश में झारखंड, उत्तराखंड, तेलंगाना की मांग पूरी हुई। जो मिली - शांतिपूर्ण आंदोलनों से, भारत के संविधान के तहत, उनके हको हुकूक के सम्मान ��ें।
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मांग सिख करे, मुस्लिम करे, वामपंथी करे, रामपंथी करे। वह उचित मांग हो, या अनुचित मांग हो। बातचीत, विचार विमर्श, नेगोशियेशन, एजीटेशन के दायरे में है- तो अपराध नहीं। यह लोकतंत्र का बुनियादी फलसफा है।
याद रहे, इस देश में संविधान बदलने, तिरंगे के अशुभ होने, और चरित्रहनन को अपनी वैचारिकी बनाने वाले संगठन को भी 100 साल तक एक्सप्रेशन की आजादी थी। अगर ��ॉट ही क्राइम होता, तो संविधान विरोधी ये लोग गाँधी हत्या के बाद विचार के आधार पर जेलों में सड़ा दिए जाने थे।
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लाल किले से हमने बहुत से खराब भाषण सुने हैं लेकिन पौन सदी के इतिहास में, लोकतंत्र के विरुद्ध इस तरह का थाट क्राइम करते हुए, पहली बार करते हुए किसी प्रधान सेवक को पाया है।
विचार करना अपराध हो जाए। रेजीम विच हंटिंग करने लगे, लेबल लगाने लगे, तो समझ लीजिये की उसके मस्तिष्क में तानाशाही का चरम कौध चुका है।
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दूसरी तरफ एक और शख्स है,
जो कहता है की जरूरत पड़ी तो मै आरएसएस के एक्सप्रेशन की भी रक्षा करूंगा। यह आवाज उस लोकतान्त्रिक भारत की है, जिसे दिमागी नक्सल करार दिया जा चुका है।
लाल किले के प्राचीर से देश में साफ साफ बाइनरी खड़ी कर दी गयी है। अब आप बेदिमाग दंगाइयो को चुनें, या दिमागी नक्सल को। अब मिडिल ग्राउंड कुछ बचा नही है।
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साफ तय करे, हिचक छोड़ दें। आपको यह देश, देश नए सवेरे, नई आशा के साथ 2084 की तरफ लेकर जाना है
या जार्ज औरवेल के 1984 की तरफ..??
🙏
@RebornManish
#nehrustudycircle
तिरंगा छोड़िये, भगवा झंडा भी हाथों में लेकर अगर किसी RSS वाले ने अंग्रेजों का विरोध किया हो तो मुझे बताइए। ये तो ��हीदों को बेवकूफ़ कहते हैं।"
- शम्सुल इस्लाम
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