NEET के बाद अब SSC-GD के छात्र भी सड़कों पर हैं।
लखनऊ में 25 मई को होने वाला एग्जाम अचानक रद्द कर दिया गया। महीनों की तैयारी, खर्च और उम्मीदों पर एक झटके में पानी फिर गया। एग्जाम सेंटर के बाहर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा।
लेकिन सत्ता के लिए सब “व्यवस्था” ठीक है - युवाओं का भविष्य भले रोज़ कैंसल होता रहे, प्रचार का ‘अमृत काल’ जारी है।
“सखी, सैंया तो ख़ूब ही कमात है…
महंगाई डायन खायत जात है…”
जनगीत इसलिए अमर होते हैं क्योंकि वे सत्ता नहीं, समाज का सच बोलते हैं। देश केवल सरकारों से नहीं, जनता की चेतना से बनता है। जब लोग सवाल छोड़कर सिर्फ़ जय-जयकार में लग जाते हैं, तब लोकतंत्र भीतर से कमज़ोर होने लगता है।
आज मेहनत बढ़ रही है, लेकिन आम आदमी की थाली, पढ़ाई और इलाज लगातार महँगे होते जा रहे हैं। फिर भी सबसे ज़्यादा शोर मुद्दों पर नहीं, चेहरों पर है। इतिहास गवाह है - किसी भी राष्ट्र को सिर्फ़ बुरे शासकों ने नहीं, अंध-समर्थकों ने भी नुकसान पहुँचाया है।
इसलिए ज़रूरी है कि हम संवेदनशील नागरिक बनें, क्योंकि देशभक्ति का मतलब सत्ता से प्रेम नहीं, समाज के दुख को समझना भी होता है।
केवल आरक्षण से सामाजिक बदलाव संभव नहीं है। आरक्षण गहरी सामाजिक असमानता का पूरा इलाज नहीं, बल्कि उससे पैदा हुई पीड़ा को कुछ हद तक कम करने का एक माध्यम है।
दुर्भाग्य से समाज ने इसे ही अंतिम समाधान मान लिया, जबकि असली बदलाव समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से आएगा। जब हर बच्चे को अच्छी स्कूल व्यवस्था, प्रशिक्षित शिक्षक, आधुनिक संसाधन और आर्थिक स्थिति से परे पढ़ने का अवसर मिलेगा, तभी अवसरों की वास्तविक समानता बनेगी। शिक्षा ही वह आधार है जो व्यक्ति को आत्मविश्वास, क्षमता और सम्मानजनक जीवन की दिशा देता है। संतुलित नीतियों के बिना सामाजिक न्याय अधूरा रहेगा।
आज की सरकार सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने के बजाय उसे कमज़ोर करने में लगी दिखती है। पिछले दस वर्षों में देश में लगभग एक लाख सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं, लेकिन इस गंभीर प्रश्न पर समाज में अपेक्षित चिंता दिखाई नहीं देती।
जो प्रधानमंत्री स्वयं को सबसे बड़ा OBC नेता बताते हैं, वही OBC अधिकारों के सवाल पर चुप नजर आते हैं। सरकार ने जाति जनगणना कराने की बात कही, लेकिन जब आधिकारिक अधिसूचना आई तो जाति के कॉलम से OBC को ही गायब कर दिया गया। यह सिर्फ एक चूक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के प्रति सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष @yadavakhilesh ने इसी मुद्दे पर भाजपा को घेरते हुए डॉ. लोहिया का नारा याद दिलाया — “संसोपा ने बाँधी गाँठ, पिछड़ा पावे सौ में साठ।” यह नारा आज भी प्रतिनिधित्व, सम्मान और हिस्सेदारी की लड़ाई का प्रतीक है।
जाति जनगणना सिर्फ आँकड़ों का नहीं, बल्कि अधिकार और भागीदारी का सवाल है। सुनिए, इस मुद्दे पर अखिलेश यादव क्या कह रहे हैं।
कुलदीप सेंगर, नाम तो याद होगा।
वही भाजपा का बलात्कारी विधायक जिसने एक बच्ची के साथ उन्नाव में गैंगरेप किया था।
उसके बाद पिता की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई, जिसमें सेंगर को दोषी पाया गया।
फिर कार एक्सीडेंट में बुआ और वकील की मौत हो गई थी।
उसी एक्सीडेंट में घायल हो कर वेंटीलेटर पर 6 महीने इलाज के बाद उसकी जान बच पाई।
और आज उसी भाजपाई हैवान को दिल्ली हाईकोर्ट से रेप के मामले में जमानत मिली और उम्र क़ैद की सज़ा निलंबित कर दी गई! कोर्ट ने 15 लाख के बॉन्ड पर सेंगर को जमानत दे दी! शर्त रखी गई है कि वह पीड़ित के 5 किलोमीटर के दायरे में नहीं जा सकेगा, बिना पास जाये क्या वो कुछ नहीं कर सकता क्या?
आज वो रो रही है कह रही है की “आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं”
कोर्ट के जज से केवल एक सवाल है , आख़िर ऐसा क्या हुआ की ये फ़ैसला बदला गया और अगर सर्वाइवर को कुछ हुआ तो इसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा? इनके बच्चे या पति को कुछ हुआ तो कौन ज़िम्मेदारी लेगा?
क्या इस देश में महिलाएँ न्याय की उम्मीद छोड़ दें?
भाजपा और अदालत एक जैसे क्यो लगने लगे है?
यूपी में एक बार फिर हुआ आरक्षण महाघोटाला!
UPSSSC के लेखपाल भर्ती में बड़ा खेल हुआ है.
7994 पदों का विज्ञापन निकला, मगर इस भर्ती में OBC को उनका पूरा हक़ नहीं दिया गया.
आरक्षण के नियम के मुताबिक़ OBC को 27% यानी 2158 पद मिलने चाहिए थे, पर दिए गए सिर्फ़ 1441 पद यानी 18%.
इस तरह OBC के 717 पदों पर डाका डाल दिया गया.
BJP-RSS इसीलिए हिंदू राष्ट्र, धर्म, मंदिर और कथावाचकों की फ़ौज में OBC को उलझाने में क़ामयाब हो रही है, क्योंकि OBC सोया हुआ शेर है. उसे ये नहीं दिख रहा.
OBC देश का सबसे पीड़ित, हकमारी की शिकार समुदाय है, जिसके इसका न तो तनिक भी एहसास है और न अफ़सोस.
#आरक्षण_विरोधी_योगी_सरकार
#OBC_विरोधी_BJP
संविधान के ऊपर मनुस्मृति का ख़तरा, वैज्ञानिक चेतना के ऊपर अंधश्रद्धा का ख़तरा, क़लम और किताब के ऊपर अज्ञान का ख़तरा, तर्क विवेक के ऊपर पाखंड का ख़तरा, पंथ-निरपेक्षता के ऊपर हिंदू राष्ट्र का ख़तरा, समाजवाद के ऊपर अनियंत्रित पूंजीवाद का ख़तरा.
"जो देखता हूँ वही बोलने का आदी हूँ,
मैं अपने शहर का सब से बड़ा फ़सादी हूँ"
ऐसी अनगिनत मौजूदा चुनौतियों के ज़रिये संविधान और शिक्षा केंद्रित अपना वक्तव्य दिया है. संविधान दिवस के एक शानदार आयोजन में बीते दिनों एक बार फिर से महाराष्ट्र के नागपुर जाना हुआ, तो जो बोला उसे आप भी सुनें और अपनी प्रतिक्रिया दें.
"रात को रात कह दिया मैं ने
सुनते ही बौखला गई दुनिया"
पूरा भाषण यहाँ सुनें-
https://t.co/7VU9nJIlm2
मध्य प्रदेश में गजब की बकलोली चल रही है, सुप्रीम कोर्ट बार-बार फटकार लगा चुका है, फिर भी मध्य प्रदेश की आंधी, गूंगी, बहरी @BJP4MP सरकार सो रही है,
पिछले 6 वर्षों से ओबीसी के 13% होल्ड पदों पर आज तक नियुक्ति नहीं दे पाई,
@narendramodi@DrMohanYadav51 क्या सिर्फ ओबीसी हितैसी होने का सिर्फ ढोंग करते हैं?
@drmohanoffice51 सरकार कोर्ट के नाम पर पिछड़े वर्ग को सिर्फ गुमराह कर रही है.
पिछड़े वर्ग के नाम पर नौटंकी करने वाले पाखंडियों का बहिष्कार करें.
#आरक्षण_चोर_भाजपा #ओबीसी_विरोधी_भाजपा
भारत ने आज अपने एक महान सपूत और अद्वितीय अर्थशास्त्री को खो दिया। डॉ. मनमोहन सिंह जी का योगदान देश की प्रगति और विश्व में भारत की पहचान बनाने में अमूल्य रहा। उनका सादगीपूर्ण व्यक्तित्व और निष्ठा हमेशा प्रेरणा देती रहेगी। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। 🙏😢 #ManmohanSingh"
अभी भी #अतिथि_शिक्षक और #संविदाकर्मियों में BJP के समर्थक और अंधभक्त है
पिछले 20वर्षो से राज्य में BJP की सरकार है और लोकसभा में 29 में से 29 सीट देने के बाद भी #ठेका प्रथा जारी है और अंधभक्त हिंदू मुसलमान करते रहते है
#संविदा और #अतिथि_शिक्षक नियमितिकरण चाहिए मोहन यादव जी
पिछला आंदोलन जिन तात्कालिक मांगों के निराकरण के आश्वासन पर खत्म हुआ था, उसका आदेश नहीं निकालना कहीं सरकार को भारी न पड़ जाए। अतिथि इस बार जिद पर आ गए हैं, जब तक मांगें नहीं तब तक हटेंगे नहीं
#अतिथि_शिक्षक#अतिथि_शिक्षक_आंदोलन@MPYuvaShakti@NEYU4MP
क्या लोगों के बीच मामाजी के नाम से प्रसिद्ध @ChouhanShivraj जी कोई प्रतिक्रिया देंगे, की अतिथि विद्वानों/शिक्षकों के साथ किये गए महापंचायत की घोषणाओं को लागू करके भविष्य सुरक्षित करेंगे?क्या जिस मुद्दे पर चुनाव जीते और @JM_Scindia जी कांग्रेस से bjp में आये वो फिर सड़क पे आएंगे?
अतिथि शिक्षक बहन क्या लाडली बहन नहीं है तो फिर लाडली बहनों पर लाटी चार्ज किस के शासन में हो रहा है इसको पूरा प्रदेश क्या पूरा भारत देख रहा है हम अतिथि शिक्षकों के साथ गांधी जयंती के दिन अतिथि शिक्षकों के साथ गांधी जी का भी अपमान किया है @BJP4MP हटाओ @PMOIndia शांत क्यों
आज #अतिथि_शिक्षक फिर भोपाल आये हैं उनकी मांगे हैं कि उन्हें नियमित किया जाए ,लेकिन मप्र की भाजपा सरकार उनकी मांगों पूरा नहीं कर रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री @ChouhanShivraj जी और भाजपा नेताओं ने चुनाव से पहले वादे तो कर लिये , लेकिन जब पूरा करने की बारी आई तो मुकर रहे हैं...