झारखंड के छात्रों ने साफ कर दिया है कि उनका आंदोलन किसी बाहरी राजनीतिक या वैचारिक एजेंडे का हिस्सा नहीं बनेगा। छात्र अभिजीत दीपके, उपद्रवियों और CJP से दूरी बनाए रखना चाहते हैं।
सुनिए वीडियो में यह छात्र क्या बोल रहा है-
अगर देशभर के लोगों को लगा कि इस आंदोलन में कोई दूसरा एजेंडा घुस गया है, तो हम सबका मन टूट जाएगा।
मैं हाथ जोड़कर कहना चाहता हूँ, कृपया आप इस आंदोलन में मत आइए। हमें आज़ादी के नारे, धार्मिक नारे या राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं चाहिए। यह केवल छात्रों का आंदोलन है।
हम जंतर-मंतर पर ऐसी मिसाल कायम करना चाहते हैं, जिसमें बिना फंडिंग, राजनीति और अभद्र भाषा के भी व्यापक जनसमर्थन मिले। किसी एक व्यक्ति की विवादित बयानबाज़ी आंदोलन की छवि खराब कर सकती है।
अभिजीत दीप जी से सम्मानपूर्वक निवेदन है, कृपया इस आंदोलन से दूर रहें। जो लोग छात्रों के हित में बिना किसी राजनीतिक या वैचारिक एजेंडे के साथ आना चाहते हैं, उनका स्वागत है।
आज झारखंड, रांची आया। इतने छात्रों का दर्द सुना।
मैं कहूँगा कि आज exam system इतना खोखला हो चुका है कि भर्तियों का इतना बुरा हाल है।
पहले भर्ती आए- इसके लिए लड़ो।
फिर exam के लिए सालों इंतज़ार करते रहो।
5 साल में एक मौका मिल भी गया तो paper leak हो जाएगा, या setting और cheating का खेल शुरू हो जाएगा।
इन सब से भी ऊपर निकलकर आप 300 में 299 भी ले आए, तो भी result में नाम आएगा इसकी कोई गारंटी नहीं।
आख़िर हर कदम पर इस देश के छात्रों के साथ क्यों छल किया जा रहा है?
और जो छात्र 100-200 रुपये की form fees जैसे-तैसे जमा करता है, वो बार-बार आंदोलन कैसे करे?
क्या करे?
असहाय महसूस करता है। जैसे-तैसे लड़ने की हिम्मत जुटाता है, सालों के अत्याचार के बाद…
कोई भी सरकार भर्ती प्रक्रियाओं को ठीक नहीं कर रही। इसकी एक बड़ी वजह मुझे यह लगती है कि सरकारों की प्राथमिकताएँ में ये है नहीं और उनके funds का बड़ा हिस्सा freebies में indirectly वोट ख़रीदने में जा रहा है
जनता जिस विचारधारा के ख़िलाफ़ वोट देती है, कल को वही नेता पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में चला जाता है। हर मोड़ पे बिस्वासघात ।
आज देश के सभी शिक्षकों को छात्रों के हितों के लिए आगे आना होगा। इनकी लड़ाई का हिस्सा बनना होगा।
तभी सबके पढ़ाने की सार्थकता है।
वरना आप भी सरकार की तरह ही है जिसका ध्यान बस पैसे आने से है,बस पढ़ाओ। Selection हो या न हो, उससे क्या मतलब?
जितनी भर्ती cancel होगी, जितनी delay होगी, उतना ज़्यादा coaching का पैसा आएगा।
इसलिए मैं सभी शिक्षकों से हाथ जोड़कर आग्रह करता हूँ 🙏🏻
please छात्रों के साथ हो रहे इस अन्याय में, जैसे भी संभव हो, वीडियो बनाकर उनकी आवाज़ उठायें या यहाँ की व्यवस्था के लिए आर्थिक मदद दे।
अगर शिक्षा से जुड़े लोग भी छात्रों के साथ खड़े नहीं होंगे, तो फिर उनके साथ खड़ा कौन होगा?
जरा @DrMohanYadav51 जी बताएँ कि यह खर्चा कौन उठाएगा? ₹5 लाख करोड़ का कर्ज है राज्य पर, 73% आरक्षण करना चाहते हैं! फिर मुझे याद आया कि जो सरकार भगवान राम को जातिवादी हत्यारा बताती है, वो शंभूक का प्रायश्चित ऐसे ही प्राइवेट कमरों का किराया भर के ही करेगी।
अब एक राशन योजना और आ जाए, जिसमें चाय-सिगरेट और गर्लफ्रेंड के उपहार की व्यवस्था हो जाए, तो पढ़ाई ढंग से हो पाएगू।
कल करणी सेना के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, जिससे एक भी हिंसा का समाचार नहीं आया, पुलिस का लाठीचार्ज हुआ और जैसा कि अपेक्षित था एक व्यक्ति की बलि के साथ सरकार ने इस यज्ञ की पहली आहुति ले ली है!
ईश्वर देवराज सिंह पलाड़ा को सद्गति दें और इस घमंडी पार्टी को सद्बुद्धि!
देवराज स्वयं ओबीसी समाज से थे पर सामान्य वर्ग के विषय के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। मैं जाति का नाम नहीं लिखता पर हर पार्टी जाति-जाति करती है, इस कारण लिख रहा हूँ।
सवर्णों के साथ राजनीतिक अत्याचार किया जा रहा है इसके बावजूद सवर्ण नेता,मंत्री चुप्पी साधे बैठे है।
हमारे समाज का इतना बुरा समय आ गया है कि हमें आंदोलन करने की अनुमति तक नहीं दी जा रही।
सभी को एकसाथ मिलकर विचार करना होगा।🙏🏻
विजेंद्र चौहान जी, आपने अपनी बात साबित करने के लिए ऐसा उदाहरण दिया है, जिसने आपके तर्क को ही कमजोर कर दिया। दिव्यांगता एक शारीरिक या मानसिक स्थिति है, जबकि जाति एक सामाजिक पहचान है। दोनों की संवैधानिक पृष्ठभूमि, उद्देश्य और आधार अलग-अलग हैं। इसलिए दोनों की तुलना करना गलत समानता है।
- आपके तर्क से तो फिर कोई कह सकता है कि अगर कोई इनकम टैक्स कम करने की मांग करे, तो उसे GST खत्म करने की भी मांग करनी चाहिए।
- अगर कोई NEET की व्यवस्था पर सवाल उठाए, तो उसे UPSC पर भी सवाल उठाना चाहिए। जबकि दोनों नीतियों का उद्देश्य और ढांचा अलग है।
- अगर कोई पेट्रोल पर टैक्स कम करने की मांग करे, तो क्या इसका मतलब है कि वह बिजली का बिल भी मुफ्त करने की मांग करे?
- अगर कोई जाति-आधारित जनगणना का विरोध करे, तो क्या उसे राष्ट्रीय जनगणना का भी विरोध करना चाहिए?
- अगर कोई एक कानून में संशोधन की मांग करे, तो क्या उसे संविधान के हर अनुच्छेद को बदलने की मांग भी करनी चाहिए?
कुछ भी कुतर्क करते हैं…..
राहुल गांधी जी और कांग्रेस पार्टी,अक्सर देश के युवाओं की बात करते हैं, लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन पर अब तक आपकी ओर से एक भी बधाई संदेश या ट्वीट नहीं आया।
जब भारत के युवा तिरंगा ऊंचा कर रहे हैं, तब राजनीति से ऊपर उठकर उनका हौसला बढ़ाना भी हम सभी की जिम्मेदारी है। 🇮🇳जय हिंद🇮🇳
सरकार ने संसद में कहा…
इथेनॉल ना मिलाते तो पेट्रोल 125 रुपये लीटर होता…
ये कौनसा गणित है सरकार का….
UPA की महा भ्रष्ट सरकार… 100 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से कच्चा तेल ख़रीदती थी…
और 70 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल बेचती थी…
और भाजपा की हरीशचंद्र सरकार… 80 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से कच्चा तेल ख़रीद कर…
110 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल बेच रही है…
और इस में भी अपनी पीठ थपथपा रही है, अगर हम इथेनॉल ना मिलाते तो पेट्रोल 125 रुपये लीटर होता…
वैसे हाथी पालना महँगा तो होता ही है…!!
Bollywood ACTIVISTs have time to visit PROTEST sites but don’t have time to offer any help to flood affected Victims
Randeep Hooda is real STAR who always stands with BHARAT unapologetically
Helping and serving ppl in Assam from past 7 days 👇🏽
ग्लासगो के रेस्टोरेंट में दिए गए नैपकिन पर भारत के नक्शे से नॉर्थ ईस्ट का हिस्सा गायब।
जम्मू-कश्मीर भी पूरा नहीं दिखाया।
बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने जताई नाराजगी।
अधिक गंभीर इसलिए भी कि यह भारतीय रेस्टोरेंट है और नैपकिन पर नक़्शा छापा गया।
Then why did Nitin Gadkari ji claim Petrol will be available at ₹15 litre ! So if a cabinet minister lies : lets throw him out !
Btw another victory for TEAM BHARAT. We have been proved correct !! Now will expose part 2 .
@OGTeamBharat
Last night, I was with my OBC patel friend and asked him about his views on reservation.
He said, "Bhai hum to chahte hain OBC aur SC/ST reservation khtm hi ho jaye. Sala koi vishesh fayda nhi hai, sirf name ka reservation hai."
Then I asked, "Tum kisi SC ke yaha khana kha skte ho kya bhai?"
He replied, "Bhai yaar mai nhi kha pata hu, ghin aati hai."
I was genuinely shocked after hearing this.
I don't think like this. I have no problem eating with or at the home of any person regardless of caste. Yet, because I criticize reservation policy, I'm routinely called an "SC/ST hater.
Opposing reservation ≠ hating SC/ST people.
झारखंड में प्रदर्शन कर रही छात्रा ने राहुल गांधी से पूछा सवाल
जब आप विपक्ष में रहते हुए छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंच सकते थे, तो अब झारखंड क्यों नहीं आ रहे, जहां आपकी गठबंधन सरकार सत्ता में है?
छात्रा के इस सवाल ने सत्ता और विपक्ष में नेताओं के बदलते रुख पर नई बहस छेड़ दी है।
भाजपा न केवल आरक्षण बढ़ाने के पक्ष में रही है, बल्कि @BJP4India वह पार्टी है जिसने 2001 में निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की माँग की और कुछ वर्ष पूर्व खट्टर ने हरियाणा में उसे लागू करने की घोषण की। कोर्ट ने इसे निरस्त किया।
इसलिए, जिसे भी यह लगता है कि भाजपा आरक्षण कम करेगी, वह इमोशनल मूर्ख है। आपको मोदी का वह भाषण याद है संसद का जिसमें नेहरू को कोट करते हुए कहा था कि नेहरू नहीं चाहते थे आरक्षण आए क्योंकि यह देश के लिए हानिकारक है?
सत्य यह है कि कारण जो भी रहे हों, नेहरू और राजीव गाँधी दो ऐसे नेता रहे हैं जिन्होंने आरक्षण का विरोध किया और तार्किकता के साथ किया। बाकी मामलों में वो बेकार थे, वह बात अलग है।
अतः, मुझे यह स्पष्ट दिखता है कि 2028 के बजट/मानसून सत्र तक, @narendramodi निजी क्षेत्रों में ग्रुप डी के समकक्ष नौकरियों में 50% तक आरक्षण की घोषणा करेंगे। और इनका दुर्भाग्य यह होगा कि उसका क्रेडिट राहुल गाँधी ले जाएगा।
"इतनी शक्ति हमें देना दाता" और "तेरा मंगल मेरा मंगल...सबका मंगल होए रे.... " हमारी @JamghatC पाठशाला की दैनिक प्रार्थना... इसके अलावा राष्ट्रगान भी हर दिन होता है..और सब बच्चों को हर दिन अच्छी भाषा,अच्छे बर्ताव की सीख दी जाती है...
The language we choose reflects our personality and the kind of person we are. Choose your words wisely, because over time, you become what you think, what you speak, and what you practice.
Using bad language is not cool. Abusing is not cool.
Let’s keep the definition of cool simple: being hardworking, kind, respectful towards others and yourself, striving to be successful through honesty, and making your parents and your country proud.
THAT’S COOL.
I’m speaking about this because, over the past few years, the way we perceive abusive language has changed. For many, using such words has become so normal that it’s even considered “cool.” Without realizing it, people casually use degrading and disrespectful language in everyday conversations.
As i hit the sack, from the bottom of my heart, the deepest parts of my soul wanna say thank you to all of u. Totally in Gratitude 🙏.
Remember life is brilliant hakuna matata!
Love and grateful!! ❤️