@mishrag47 तुम लोगों का मतलब ये है कि जो लड़कियों को "नोच" रहे हैं उनके खिलाफ भी आवाज नहीं उठाएं...सिर्फ इसलिए कि मर्द ने पैदा किए है, मां का महत्त्व भूल गए.....
@BABULKU74795114 भाई,
यहां मामला अपने घर के उत्पीड़न का है। हमें दूसरे धर्म से क्या लेना देना। अपनी महिलाओं को सुरक्षा देने की बजाय मामले को दूसरे धर्म में स्थानांतरित मत करो।
"महिला आंदोलन"
देखकर इस बात की खुशी हुई कि चलो कम से कम इस बात की चर्चा तो हुई कि महिलाओं पर जुल्म नहीं होना चाहिए। महिला उत्पीड़न को समाज ने बहुत हल्के में ले रखा है।
फिर से गाली आएगी
भारतीय समाज में अधिकतर मर्दों को बस पैदा करके छोड़ दिया जाता है
मां-बाप को लगता है उन्हें संस्कार देने की जिम्मेदारी तो समाज के ठेकदारों की है।
ये वो ही ठेकेदार है जो औरत को वस्तु समझते है।
इन गुंडों से संस्कारों की उम्मीद करोगे तो बेटियां कैसे सुरक्षित रहेगी?
"महिला आंदोलन" को देखकर टीका टिप्पणी करने वाले पुरुष अभी पितृसत्तात्मक अवधारणा से नहीं निकल पाए हैं। किसी न किसी बहाने से अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। भाई जब तक समाज का आधा अंग अपाहिज रहेगा, समाज पूर्ण विकसित कभी नहीं होगा।
@NCIBHQ भाई आप लोग भी तो एक महिला द्वारा पति की हत्या किए जाने पर संपूर्ण महिला समाज को दोष देते हो, जबकि सब ऐसी नही होती। ये प्रोटेस्ट उन लड़कों के लिए है जो आज भी महिलाओं को अपने जूते के नीचे रखना चाहते हैं। सब लड़कों के लिए नहीं भाई जी 🙏🙏
जो पुरुष प्रताड़ित हैं उनकी संख्या आज भी बहुत सीमित है, मगर महिलाओं के साथ बहुत जुल्म होता है।
किसी वर्ग पर जब अत्याचार सीमा से बाहर हो जाते हैं तब कोई कानून बनता है... अपवादों पर कोई आयोग यूँ ही नहीं बनता । महिला,बच्चे, दलित, आदिवासी, पशु पक्षी इनके साथ आए दिन अत्याचार होता है
@GarimaBharti19 भाई जो पुरुष प्रताड़ित हैं उनकी संख्या आज भी बहुत सीमित है, मगर महिलाओं के साथ बहुत जुल्म होता है।
किसी वर्ग पर जब अत्याचार सीमा से बाहर हो जाते हैं तब कोई आयोग बनता है... अपवादों पर कोई आयोग यूँ ही नहीं बनता । महिला,बच्चे, दलित, आदिवासी, पशु पक्षी इनके साथ आए दिन अत्याचार होता
@imskg2303 सबसे पहले भाई महिलाओं की गरिमा का सम्मान करने के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
आपने बहुत अच्छी तरह से इस मुद्दे पर अपनी बात रखी एकदम सटीक लेखन 👍
@ChapraZila ऐसा कुछ नहीं है,ये स्क्रिप्ट है, 2 दिनों से चर्चा हो रही है कि एक भी "चौधरी" को गिफ्तार नहीं किया गया। बस उसी की भरपाई के लिए उसमें से एक उठा लिया गया ताकि मामला शान्त हो जाए । समझ नहीं आता कि ब्लात्कार जैसे मुद्दे पर क्या सोचना जो भी संलिप्त है उन पर नरमी न बरती जाये
"कभी-कभी मन में इतने विचार उठते हैं कि उनको केवल मस्तिष्क में रखना सही नहीं है, मुझे लगता है कि विचारों को अपनों के साथ बांटने से मन को शांति मिलती है"
शुचिता