जीवन मौन में नहीं चलता,
उसे दिशा देने के लिए शब्द ज़रूरी होते हैं।
"गुनाहों का देवता" बहुत पहले youtube पर audiobook के रूप में सुना था। उदास कर देने वाला उपन्यास है,पर मैं नहीं रोया।
संभव है :)
मुझे बचपन में लगता था डॉक्टर हमारे सामने लिखने की बस एक्टिंग करते हैं। डॉक्टर से मिलकर निकलते ही,डॉक्टर मेडिकल वाले को कॉल करके बोलता होगा - "ये नाम का व्यक्ति आएगा.. इसे ये-ये दवाई दे देना"😁
एशियन गेम्स में स्विमिंग, जिम्नास्टिक, एथलेटिक्स जैसे खेलों में कई मेडल इवेंट होते हैं। चीन इन खेलों में लंबे समय से मजबूत है जबकि भारत का फोकस अभी शूटिंग, एथलेटिक्स, हॉकी, कबड्डी, क्रिकेट जैसे खेलों पर ज्यादा है।
खैर 4th 👏 एक दिन टॉप पर भी आएगा भारत 🇮🇳
85 पदकों के साथ #AsianGames2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन! 🇮🇳🏆
📍 चौथा स्थान
🥇 21 स्वर्ण
🥈 27 रजत
🥉 37 कांस्य
🏅 कुल 85 पदक
ऐतिहासिक उपलब्धियों से लेकर यादगार जीत तक, भारतीय खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से तिरंगे का मान बढ़ाया। 🇮🇳
#AsianGames#TeamIndia #Cheer4Bharat
Asian Games तीरंदाज़ी में आया double gold
महिला अगर बल का, पौरुष का, जीवटता का,
साहस का प्रदर्शन कर दे, तो हम कहते हैं,
"ये तो बिलकुल एकदम अब छा जाएगी, पता नहीं क्या करेगी!"
क्योंकि पुरुषों को भी लड़की ऐसी चाहिए जो कोमलांगिनी हो, ताकि उसपर नियंत्रण रखा जा सके।
जो सबकी माँ हैं उनके पर्व पर तुम उनके शिशुओं को काट रहे हो
दुर्गा सप्तशती के संकेतों को समझे बिना केवल बाहरी कर्मकांड कर लेना नवरात्रि का सदुपयोग नहीं है। असुरों के माँस और रक्त का वर्णन भी वृत्तियों के संहार के प्रतीक के रूप में समझाया गया है। माता से आशय केवल किसी पौराणिक पात्र से नहीं, बल्कि समूची प्रकृति, अस्तित्व और ब्रह्मांड से है। इतना समझ लिया जाए तो बहुत-सी मूर्खताओं और अंधविश्वासों से बचा जा सकता है।
मैं "एक कचौरी,दो समोसा,इन मर्दों का क्या भरोसा" नारे का न समर्थन कर रहा हूँ न विरोध,बस सवाल है जब बच्चियों और महिलाओं के रेप होते हैं,तब ज्यादातर पुरुषों की तरफ़ से उतनी आवाज़ और गुस्सा क्यों नहीं दिखता? नारे पर आवाज़ें उठा रहे,उतनी आवाज़ें बलात्कारियों के खिलाफ़ भी उठाया करो ना!
देश की सबसे बड़ी समस्या महिलाओं की सुरक्षा नहीं, बल्कि "इन मर्दों का क्या भरोसा" क्यों कहा गया - ये हो गई है! ज़्यादातर पुरुषों की महिला सुरक्षा पर चुप्पी,लेकिन कचौरी-समोसे पर पूरा हंगामा!
एक नारे पर इतना जल्दी जाग गया पुरुष-प्रधान समाज, जितना महिला सुरक्षा पर नहीं जागा!
सदियों तक औरतों को गालियाँ दी गईं, तब से अब तक किसी की भावनाएँ आहत नहीं हुईं। आज कुछ लड़कियाँ कह दें, "इन मर्दों का क्या भरोसा?" तो पुरुष-प्रधान समाज की भावनाएँ ICU में पहुँच जाती हैं।
सत्य और अहिंसा के पुजारी 'राष्ट्रपिता' महात्मा गाँधी जी ने पूरी दुनिया को शान्ति, समानता और मानवता की सीख दी. उनका जीवन और उनके आदर्श विचार सदैव प्रेरित करते रहेंगे.
पूज्य बापू जी की जयंती पर सादर नमन🙏
#MahatmaGandhi#GandhiJayanti@MIB_India I @airnewsalerts
1986 भूल गया तू? अपनी जान देकर 360 लोगों की जान बचाने वाली वो बहादुर स्त्री याद नहीं तुझे @Sachingupta ? उनका बलिदान याद नहीं! तुझे कचौड़ी और समोसा तो बखूबी याद है!
Forty years apart, two Indians faced moments when every second mattered.
In 1986, Neerja Bhanot was the senior flight purser on Pan Am Flight 73 when four armed hijackers took over the aircraft in Karachi.
She hid passengers’ passports, helped people escape when the shooting began and ultimately lost her life while shielding three children from gunfire. Of the 379 people on board, 359 survived.
In 2026, Capt. Smit Machchhar was at the controls of a flydubai flight from Dubai to Tel Aviv when his co-pilot allegedly attacked and stabbed him.
Despite being seriously injured, Machchhar managed to open the cockpit door, allowing passengers and crew to enter and overpower the attacker.
Other crew members then helped stabilise and land the aircraft safely in Saudi Arabia. All 174 passengers survived, including 27 children.
Different decades. Different emergencies. But the same instinct: protect the people behind you, even when you are in danger yourself.
Salute to Neerja Bhanot and Capt. Smit Machchhar.
#NeerjaBhanot #SmitMachchhar
[Neerja Bhanot, Indian pilot Captain Smit Machchhar flydubai]
क्या Smit Machchhar पर हमला करने वाली महिला थी? @venom1s@DeepikaBhardwaj कीड़ों
अगर हमला करने वाली लड़की होती,तो पोस्ट पर पोस्ट करके हंगामा कर रहे होते। लेकिन आरोपी मुस्लिम पुरुष था, इसलिए चुप होना,वाह रे दल्लो 😡 तुम लोगों के दिल में आतंकवादियों के लिए बहुत ज़्यादा हमदर्दी है।
बिल्कुल,योगिता मैम, सिर्फ़ घटिया ऑर्केस्ट्रा कल्चर ही नहीं, फ़िल्मों में जो घटिया-गंदे गाने बनते हैं,आइटम सॉन्ग बोलकर 😡 हर जगह स्त्रियों को एक वस्तु की तरह पेश किया जाता है पुरुषों के सामने ! ये सब बंद होने चाहिए 😡
मैं ही तो नहीं था सदियों से!
मैं इंसान हूँ,कोई चिरंजीवी नहीं। अगर मैं हनुमान जी जैसा चिरंजीवी होता,तब बात अलग होती। फिर क्या मासूम पुरुषों को युद्धों में मरने देता? क्या महिलाओं के सामूहिक बलात्कार होते? क्या वे बाज़ार में किसी वस्तु की तरह बिकतीं? मेरे होते तो ऐसा कभी नहीं होता!
पहले पुरुषों को जाकर समझाओ। कुछ अपराधी महिला को अपराधी बोलने की जगह महिला,औरत,लड़की, woman बोलकर पूरी स्त्रियों को कोसते रहते हैं। तब उन पर मुँह नहीं खुलता, यहाँ खुल रहा है! पुरुष लिख दिया,तकलीफ़ हो रही है! वो अपराधी महिला को स्त्री के नामों से बोलते तब तकलीफ़ नहीं होती!