@ajeetbharti@jagograhakjago कंज्यूमर मार्केट इतना बड़ा है, इसे रेगुलेट करने के लिए सरकार को सीरियस होना चाहिए. सरकार की सीरियसनेस इस बा से दिखती है कि कंज्यूमर फोरम से लेकर कंज्यूमर कोर्ट तक सभी में रिटायर्ड जज लगा रखे हैं. रिटायर्ड लोग क्या करते हैं आप समझ सकते हैं.
Respected @paulagnimitra1 Ma’am 🙏 Attached is my humble representation on the irregular handover of a public open space - BFC Football Ground (Ward 22, Howrah) - to a non-local private club.
मोदी सरकार चाहती तो राष्ट्रपति शासन लगाकर बंगाल की हालत बिगड़ने से रोक सकती थी लेकिन इन्हें क्या, इन्हें तो स्थिति बिगाड़कर हिन्दुओं को मजबूर कर वोट लेना है. अगर ममता की सरकार बनती है तो ये सा#ले फिर से र#ण्डी रोना शुरू कर देंगे.
#पॉलिटिक्स#बंगालचुनाव#electionresult2026
@ajeetbharti भाजपा पहले माहौल को इतना खराब होने देती है इतना खराब होने देती है कि आप मजबूरी में उसी को वोट करने की सोचें. दूसरी एक बार सरकार बन जाने के बाद कार्यकर्ता मरे या जिए इन्हें कोई मतलब नहीं.
मोदी जी राष्ट्र के नाम संबोधन दे रहे हैं. लेकिन अब सुनने का वो क्रेज नहीं रहा. आप कुछ भी करें. हमें क्या? आपको जब हमारे जीने-मरने की फ़िक्र नहीं तो फिर हम क्यों करे? #UGC#UGCGuidelines
@ajeetbharti ये समाज ऐसे ही गर्त में थोड़े गया है. लगता है अब इस समाज को नष्ट ही हो जाना चाहिए जहां अनंत और दिनकर एक फ्रेम में रख दिए गए हो. उठा ले।रे बाबा अब मुझे उठा ले
कई लिख रहे हैं कि अजीत भारती विरोध में लिमिट क्रॉस कर रहा है।
भाई मेरे, मोदी ने जो लिमिट क्रॉस की, जिससे 30-40 करोड़ सवर्णों की रेड मारी जा रही है, उससे ज्यादा डैमेज मैंने कर दिया?
जिस सरकार को हमने हिन्दू एकता के लिए चुना था, वह एक्टिवली समाज को विभाजित करने का उपक्रम कर रहा है और लिमिट मैं क्रॉस कर रहा हूँ?
सारा सत्य बाहर आने के बाद भी पूरी सरकार, पूरी पार्टी, पूरा संघ चुप है, या अंबेडकर-अंबेडकर रट रहा है, और लिमिट मैं क्रॉस कर रहा हूँ?
सोच-समझ कर सामान्य वर्ग को एक्सक्लूड किया जा रहा है और वह सबको दिख रहा है। मैं इस विभीषिका पर लगातार यदि नहीं बोलूँगा (चाहे परिणाम जो भी हो), तो मैं अपनी पत्रकारिता के साथ धोखेबाजी कर रहा हूँ। इसलिए, पतितों को उनके दायित्व का स्मरण कराने के लिए, मैं लिमिट क्रॉस करूँगा ही!
मैं एक पत्रकार हूँ। मैंने एक विषय उठाया है। मैं इसके परिणाम तक लिखता-बोलता रहूँगा। दो ही परिणाम हैं: सरकार समुचित समाधान दे, या समाधान की संभावना समाप्त कर दे।
मैंने फिरोज खान का बीएचयू वाला विषय उठाया था, अंत तक लिखा-बोला। मैंने दिल्ली दंगों का विषय उठाया था, जब तक सरकार ने हाथ में नहीं लिया, हर विक्टिम तक पहुँचा। मैंने बंगाल राजनैतिक हत्या का मामला उठाया था, बीस से अधिक पीड़ित परिवार से मिला, न्याय दिलाने में सफलता नहीं मिली, उसे स्वीकारा।
सोशल मीडिया पर ऐसे ही कई विषय पर मैं ‘जो घर जारो आपनो’ वाले मोड में लिखता बोलता रहा हूँ। प्रदूषण हो, इथेनॉल हो, मोहन यादव का आरक्षण वाला विषय हो, जहाँ भी गलत थी सरकार मैंने बोला है, लम्बे समय तक बोला है।
इन तीनों विषयों में सरकार पतित हो गई, तब मैंने बोलना बंद कर दिया। जहाँ मुझे आशा रहती है, मैं लिमिट क्रॉस करता ही हूँ। लिमिट कौन तय करेगा? लिमिट तो केवल विषय तय करेगा।