@RajuupmanINC सुई अंग्रेज बना कर गए! परमाणु बम प्रशिक्षण बीजेपी ने किया इंदिरा गांधी ने तो बस बताया हम ये कर सकते है पर अमल नहीं किया. अब बात आती है देश के गद्दारों पर तो 1947 कश्मीर, 1962 लद्दाख, 1971 का समझौता,1984 सिख दंगे, 1987 श्रीलंका एक लाख हिंदू तमिल टाइगर की हत्याओं के विरुद्ध सेना!
जयपुर हाईकोर्ट का बड़ा कदम! ⚖️राजस्थान में ST आरक्षण (12%) में से 9% विशेष आरक्षण भील समुदाय को देने की मांग पर हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भील समुदाय सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रू�� से पिछड़ा होने के बावजूद पर्याप्त प्रतिनिधित्व से वंचित है।#RajasthanHighCourt #BhilCommunity #STReservation #Jaipur #ReservationNews
@educationnagari ST आरक्षण में छेड़छाड़ नहीं हुई है, अब वास्तविक आदिवासियों को उनका हक मिलना चाहिए. @BJP4India ओर @INCIndia दोनों समझे ये मीणा कुलआदिवासी आबादी का सिर्फ 0.35% है, जिसने देश के असल आदिवासियों का कम से कम 70% हक अकेले ख��या है.अब दम असल आदिवासियों का है इन जमींदारों को बाहर करो!
@Vinodjasana ST आरक्षण में छेड़छाड़ नहीं हुई है, अब वास्तविक आदिवासियों को उनका हक मिलना चाहिए. @BJP4India ओर @INCIndia दोनों समझे ये मीणा कुलआदिवासी आबादी का सिर्फ 0.35% है, जिसने देश के असल आदिवासियों का कम से कम 70% हक अकेले खाया है.अब दम असल आदिवासियों का है इन जमींदारों को बाहर करो!
@Narendrameena_1 ST आरक्षण में छेड़छाड़ नहीं हुई है, अब वास्तविक आदिवासियों को उनका हक मिलना चाहिए. @BJP4India ओर @INCIndia दोनों समझे ये मीणा कुलआदिवासी आबादी का सिर्फ 0.35% है, जिसने देश के असल आदिवा���ियों का कम से कम 70% हक अकेले खाया है.अब दम असल आदिवासियों का है इन जमींदारों को बाहर करो!
आरक्षण के मामले में अब बात सिर्फ 12 प्रतिशत और 9 प्रतिशत की नहीं रह गई है, असली सवाल यह है कि आरक्षण का फायदा आखिर पहुंच किस तक रहा है।
राजस्थान में एसटी वर्ग को मिलने वाले 12 प्रतिशत आरक्षण में से भील समाज को 9 प्रतिशत अलग आरक्षण देने की मांग को लेकर मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा है। कोर्ट ने सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अभी इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आया है।
लेकिन इस पूरे मामले ने एक जरूरी सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।
एक ही आरक्षित वर्ग में कई समाज आते हैं, लेकिन क्या सभी समाजों को आरक्षण का फायदा बराबर मिल रहा है?
अगर किसी समाज के लोग शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आगे निकल चुके हैं और कोई दूसरा समाज आज भी बहुत पीछे खड़ा है, तो सरकार को इसकी पूरी जांच करनी चाहिए।
किसकी आबादी कितनी है...
सरकारी नौकरी में किसका कितना प्रतिनिधित्व है...
शिक्षा में कौन कितना आगे है...
कौन सा समाज आज भी आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा हुआ है...
और आरक्षण का फायदा बार-बार किन परिवारों तक पहुंच रहा है...
इन सबका साफ और नया आंकड़ा सामने आना चाहिए।
भाई, आरक्षण किसी के खिलाफ लड़ाई नहीं है।
आरक्षण का मतलब यह है कि जो लोग लंबे समय से पीछे रह गए हैं, उन्हें आगे आने का मौका मिले।
अगर आरक्षण का फायदा किसी ऐसे व्यक्ति को लगातार मिलता रहे जिसके परिवार को पहले ही कई बार इसका लाभ मिल चुका है, जबकि उसी समाज का गरीब और पिछड़ा परिवार अभी भी बाहर खड़ा है, ���ो इस पर भी सरकार को सोचने की जरूरत है।
लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि बिना आंकड़ों के किसी समाज को यह कह दिया जाए कि अब आपको आरक्षण की जरूरत नहीं है।
फैसला जाति देखकर नहीं, जरूरत और वास्तविक स्थिति देखकर होना चाहिए।
जिस समाज की स्थिति सबसे ज्यादा कमजोर है, जिसका प्रतिनिधित्व सरकारी नौकरी और शिक्षा में सबसे कम है, उसके लिए आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
और जो वर्ग आरक्षण का फायदा लगातार ले रहा है, वहां भी यह देखना जरूरी है कि उसका लाभ समाज के ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद लोगों तक कैसे पहुंचे।
इसलिए मेरी नजर में सबसे पहले राजस्थान में आरक्षित वर्गों का पूरा सामाजिक, शैक्षणिक और सरकारी नौकरी वाला आंकड़ा सामने आना चाहिए।
फिर उसी आंकड़े के आधार पर तय होना चाहिए कि किसको कितना लाभ मिल रहा है और किसको कितना मिलना चाहिए।
किसी का हक छीनकर किसी को देना समाधान नहीं है।
���सल समाधान यह है कि जिसका हक है, उसका हक उसी तक पहुंचे।
न भील समाज के साथ अन्याय हो...
न किसी दूसरे एसटी समाज के साथ अन्याय हो...
न गरीब और जरूरतमंद परिवार पीछे छूटे...
और न आरक्षण का फायदा कुछ गिने-चुने लोगों तक सीमित होकर रह जाए।
आज जरूरत आपस में लड़ने की नहीं है।
जरूरत है सरकार से साफ आंकड़े मांगने की और उस आंकड़े के आधार पर सही व्यवस्था बनाने की।
आरक्षण में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होना चाहिए कि प्���तिशत कितना है, सवाल यह होना चाहिए कि उस प्रतिशत का फायदा सबसे जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं।
यही बात गांव के आम आदमी को भी समझनी है और सरकार को भी।
हक किसी का कम नहीं होना चाहिए, लेकिन जिसको जरूरत ज्यादा है, उसके हक की आवाज सबसे पहले उठनी चाहिए।
राजस्थान हाई कोर्ट ने ST आरक्षण के उप-वर्गीकरण पर कड़ा ��ुख अपनाते हुए कहा है कि:
"ST के 12 % आरक्षण से भील समुदाय को 9% आरक्षण क्यों ना दिया जाए?"
राजस्थान हाई कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए ये कहा है जिसमें ये कहा गया था कि ST आरक्षण का 99% फायदा मीणा समाज ले रहा है, जोकि अब सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से काफी आगे बढ़ चुका है!
@IYC सुन रहे है राजस्थान में आपकी पार्टी हर निर्दलीय पार्षद को दो करोड़ में खरीद रही है राहुल गांधी की एक पार्षद के लिए इतना फंड आया कहा से? सौजन्य से अशोक गहलोत
ST आरक्षण के उप-वर्गीकरण पर राजस्थान हाईकोर्ट का कड़ा रुख.!!
वंचित भील समुदाय को उनके हक का 9% आरक्षण ST के 12 % आरक्षण से क्यों ना दें..!!
आरक्षण का लाभ सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना ही चाहिए लेकिन ST का कम क्यूँ करना है.?