ब्राह्मण जब बड़े पद पर होते है तो वो दूसरे ब्राह्मण को मदद तो छोड़िए पहचानने से इनकार कर देते है ..
और Retired होते ही अध्यक्ष बनकर ब्राह्मण महासभा चलाने लगते है ...
कितना अजीब बात है ना कि इंसान सबसे ज्यादा शोर अपने भीतर सहता है। मेरे अंदर इन दिनों एक बेचैनी सी है जो हर पल साथ चलती रहती है मेरे सादे हृदय की तलहटी में कुछ ऐसा जमा हो गया है कुछ ऐसी बात जिसे कह देने की ज़रूरत है पर मैं हर बार ना जाने क्यूं इसे अपने अंदर वापिस धकेल दे रहा हूं।
समाज ने पुरुषों को रोना नहीं सिखाया, इसलिए वे अपने दर्द को ग़ुस्से या अहंकार के पीछे छिपा लेते हैं. अगर कोई पुरुष आप पर बेवजह चिल्ला रहा है, तो समझ लीजिए कि वह अंदर से डरा हुआ है…🤍:)
पुरुष जब कमजोर पड़ता है, तो वह किसी स्त्री के दर पर पहुँचता है।
यह स्त्री कोई भी हो सकती है — माँ, बहन, प्रेमिका या साथी।
अगर कोई पुरुष आपकी दहलीज़ पर अपनी संवेदना लेकर आए, तो उसे समझिए…
क्योंकि स्त्री को शक्ति यूँ ही नहीं कहा जाता, वह टूटे मन को संभालने की ताक़त रखती है।