हर्ष भाई को हर्षित करने में लगी सरकार की परेशानी अब बढ़ने ही वाली है। जैसे कि OBC आरक्षण में कितनी अच्छी सुविधाएँ हमारे पुराने और लेटेस्ट सत्ताधीशों ने दे रखी है, वो सुन कर आपको आनंद हो जाएगा।
आप सोचिए कि आप उत्तर प्रदेश के यादव हैं या जाट हैं, आपके बाबूजी कलेक्टर हैं, और आपके पास 8 ट्रेक्टर, 110 बीघा भूमि है, कुल आय 10 करोड़ प्रतिवर्ष है, पर आप जब फॉर्म भरेंगे तो न केवल आपको OBC का आरक्षण मिलेगा, बल्कि आप क्रीमी लेयर में भी नहीं आएँगे!
ओ-BC! सच में?
बिल्कुल! क्यों?
क्योंकि कृषि की आय और बाप की सैलरी चाहे जितनी भी, अगर आप सही जाति में उत्पन्न हुए हैं, या पटरी उखाड़ सकते हैं, तो आप गरीब अभ्यर्थी बन सकते हैं। और देखिए सत्य भी तो है कि बाप कलेक्टर या डॉक्टर है, भूमि भी उसकी है, तो बच्चा तो गरीब ही हुआ ना, वो तो बेचारा बैकवर्ड ही रह गया।
हाँ, कलेक्टर साहेब कहीं गुपचुप का ठेला लगाते, लिट्टी बेचते, या पान की दुकान होती तो उसकी आय से पता चलता कि आप क्रीमी लेयर में हैं या नहीं!
आप सोचिए कि देश में कैसे-कैसे नियम हैं कि OBC समाज के बैकवर्ड कलेक्टर साहेब को एक साइड बिज़नेस भी खोलना पड़ता है, तब जा कर सरकारी फ़ाइलों में उसे परिवार की आय मानी जाएगी।
अब यदि आप ये सब बातें पब्लिक में ले आएँगे तो आपको क्या लगता है कि अखिलेश जी साज़िश और षड्यंत्र वाला ट्वीट नहीं लिखेंगे तो क्या लिखेंगे। वस्तुतः क्रीमी लेयर में कोई आता ही नहीं, जो आता है वो अपना क्रीम खा लेता है और कहता है कि देखो बस छाछ ही बची है जी, हम तो स्किम्ड मिल्क हैं!
लेकिन अजीत जी, कृषि की आय पर तो टैक्स नहीं लगता ना! हाँ, टैक्स नहीं लगता तो क्या वो इनकम ही नहीं है? उस से बच्चे की फीस नहीं जाती? उसे बच्चे खाते नहीं? वो क्या गंगा जी में ओबीसी समाज के कृषक बहा देते हैं?
वैसे OBC पर आजकल IT सेल वाले भी हमें यह बताने में लगे हुए हैं कि हमने मुसलमानों और ईसाइयों को OBC से हटाने की बात क्यों नहीं की;
वैसे महाराष्ट्र, असम, बिहार, यूपी, एमपी, राजस्थान हर जगह भाजपा सरकार में भी मुस्लिम जातियाँ ओबीसी में हैं। सुनो ब्रो, अब अधिक सर्च भी नहीं करना पड़ता और सब बात हम ही कर देंगे, तो तुम लोग क्या कांग्रेस की पाद सूँघ कर उसके टेम्पलेट पर AI से फोटो बनवाने के लिए प्रति ट्वीट ढाई रुपया पाते हो?
अजीत जी दो रुपया नहीं होना चाहिए? नहीं, नए वालों ने आठ आना बढ़ा दिया है, क्योंकि अब काम बढ़ गया है।
लहसुन का लोकतंत्र
देखिए कि सरकार कितनी नंगी और अराजकतावादियों की गोद में बैठने वाली हो गई है कि ये आज सुप्रीम कोर्ट में यह कहने गए कि तिलचट्टों के प्रदर्शन में जिन्होंने पत्थरबाजी की, पुलिस पर डंडों से प्रहार किया, सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाई, उन पर हुए केस निरस्त किए जाएँ।
@BJP4India वालों, वह तुम्हारे बापों की संपत्ति थी? कितनी बार तुम अपनी घटिया राजनीति के लिए @DelhiPolice को पिटवाते रहोगे? पूरी पुलिसिंग को पंगु बना कर रख दिया है, जो भी आता है इनका सर फोड़ कर चला जाता है।
पर हाँ, पुलिस कुछ न करे क्योंकि माननीय @narendramodi जी को रात के एक बजे ‘जेन जी’ के लिए रील बना कर, उन्हें माफ करते हुए बड़ा हृदय वाला दिखना है। आज कल रील और उसके व्यू नहीं गिन रहा कोई!
सरकार चाहती है कि वो ये केस माफी की भी नौटंकी करे और वही सरकार फिर कोर्ट को यह भी कहती है कि तिलचट्टों का पाँच सितम्बर वाला मार्च रोक दिया जाए। माननीय सूर्यकांत जी ने कहा है कि अभी से वो यह नहीं मान सकते कि कुछ गलत ही हो जाएगा।
जबकि माननीय सूर्यकांत के समक्ष ऐसे उदाहरण हैं कि इन्हीं आयोजकों के कारण दिल्ली में तीन दिन क्या होता रहा। फट्टू सरकार की %# इतनी फटी हुई थी कि आयोजकों को नामित तक नहीं कर पाई कि इनका ही दायित्व बनता था।
ये चल रहा है इस देश में। दंगाइयों को सरकार बचा रही है ताकि उनके राम मंदिर लूट के पाप को डायवर्ट करने का रिवार्ड उन्हें दिया जा सके। जनता सब देख रही है।
पत्रकार : पढ़ने नहीं दिया जाता था, स्कूल में एंट्री तक नहीं मिलती थी तो अंबेडकर जी फिर पढ़े कैसे?
लड़की: अंबेडकर को ब्राह्मणों ने खूब पढ़ाया फिर उसी को धोखा दिया और आज शिक्षा उन्नति के बाद भी इनके जातिसूचक नाम से हमें जेल हो जाती फिर ये पिछड़े कैसे..?
इस वृद्ध महिला को पीएम आवास नहीं मिला,
सिर्फ इसलिए क्योंकि ये ब्राह्मण है, इनका नाम दशोदरी पाण्डेय बताया जा रहा है, वीडियो MP के मऊगंज जिले के अंतर्गत ग्राम पंचायत बरही झरी का है,
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की पत्नी सविता कोविंद जी स्वास्थ्य कारणों से पुष्कर मंदिर की सीढ़ियां नहीं चढ़ सकीं, इसलिए पूजा सीढ़ियों के पास ही कराई गई।
अजमेर की तत्कालीन कलेक्टर आरती डोगरा ने भी स्पष्ट किया था कि करीब 50 सीढ़ियां होने के कारण उन्हें चढ़ने में परेशानी हो रही थी। इसके बाद राष्ट्रपति, उनकी पत्नी और बेटी स्वाति कोविंद ने तीन-चार सीढ़ियां चढ़कर वहीं स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की।
उपलब्ध प्रशासनिक विवरण में छुआछूत या भेदभाव का कोई उल्लेख नहीं था। अब राहुल गांधी इसी घटना को दलित भेदभाव से जोड़कर पेश कर रहे हैं।
बाप कलेक्टर, आठ ट्रैक्टर, सौ बीघा जमीन और सालाना आय 10 करोड़… फिर भी OBC आरक्षण और क्रीमी लेयर से बाहर!
क्योंकि जाति सही हो तो बाकी सब ‘गरीबी’ में गिना ही नहीं जाता।
मोदी जाएगा तो राहुल आ जाएगा, योगी जाएगा तो अखिलेश आ जाएगा; इस भावनात्मक ब्लैकमेल में मत फँसाइए। मैं सामान्य वर्ग के अधिकारों के लिए लड़ता रहूँगा। कल कोई बदतर पार्टी आई तो उसे सड़कों पर निपट लेंगे।
दूसरी तरफ़ घनघोर अयोग्यता को कोचिंग से लेकर मेरिट, PG, नौकरी और प्रमोशन तक लगातार छूट, ये अनंत काल तक नहीं चल सकता।
This has to stop!
अगर सरकार सोच रही है कि एक व्यक्ति को फुसलाकर सवर्ण समाज की पूरी माँगों से बच जाएगी और UP चुनाव तक टालमटोल करती रहेगी, तो यह भ्रम जल्द टूटेगा।
RHA Reforms की माँगें स्पष्ट हैं। जब तक सभी माँगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा।
नवनियुक्त IT सेल ने पिछले दो दिनों में दो योजनाओं का क्रियान्वयन किया है:
1. RW के कुछ लोगों को पैसे दे कर 'टूलकिट', 'धर्म के गद्दार', 'मोदी-योगी को हटाने के षड्यंत्रकर्ता' जैसे शब्दों के साथ RHA के लोगों को परोक्ष रूप से निशाना बनाना
2. भाजपा प्रायोजित हर्ष दूबे और नड्डा जी की मीटिंग की बात पर प्रश्न उठाने वाले वास्तविक लोगों को यह कह कर डिसक्रेडिट करना कि 'इनकी दुकान बंद हो जाएगी'
बात यह है कि दोनों ही नहीं चलने वाले! पुराने स्क्रीनशॉट्स निकाल कर मुझे कर पाए डिसक्रेडिट? सात महीने से %₹ घिस लिए, मेरी #@ उखाड़ पाए तुम सब मिल कर? तुम्हें सच में लगता है कि हर्ष दुबे ने यह सब खड़ा किया है? दो लाइन बोल पता है आरक्षण पर ठीक से? उसे तुमने ही प्लांट किया, तुम ही समझौते कर रहे हो।
और हास्यास्पद बात यह है कि ये सब बकलोली करते हुए हम पर ही आक्षेप कि हमारी दुकान बंद हो जाएगी। ठीक है, तुम खेलो मीटिंग-मीटिंग, देखते हैं कहाँ पहुँचते हो इस ग़ज़ब की तकनीक से, जो इतनी बात प्रयुक्त हो चुकी हैं कि अब आश्चर्य भी नहीं होता।
कृपया मुझे इस बात पर भावनात्मक ब्लैकमेल न करें कि मोदी जाएगा तो राहुल आ जाएगा, योगी जाएगा तो अखिलेश आ जाएगा। इस दोनों परिस्थिति की चिंता भाजपा को करनी चाहिए कि इनके आने से इनका क्या होगा। इन नेताओं और पार्टी पर ऐसे लोग कैसे-कैसे प्रतिबंध डालेंगे।
मैं इन बातों का लोड नहीं लेता क्योंकि मेरे लोड लेने, या ना लेने, से कोई अंतर नहीं पड़ता। मैं सामान्य वर्ग के अधिकारों के लिए लड़ता रहूँगा। कल को कोई ऐसी पार्टी आई जो, आप जैसा कह रहे हैं की बदतर बना देगी, तो उस से सड़कों पर निपट लेंगे। उनको वैसे भी सड़कों की क्रांति पर ऑर्गैज़म आ जाता है।
आपसे तो केवल शब्दों से लड़ रहे हैं। यदि किसी को यह भ्रम है कि सवर्णों का रक्त रंगहीन जल बन चुका है, और उस से वीरता का वाष्पीकरण हो चुका है, तो हम वहीं हैं जिन्होंने लहू से सने जनेऊ मनों में तुलवाया था धर्म रक्षा हेतु। हम वही हैं जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में फाँसियाँ झेलीं। हम वही हैं जो अंग्रेजों के विरोध में बिगुल फेंका। और हम वही हैं जिन्होंने मुगलों के होते हुए भी धर्म की रक्षा की।
जो लोग शब्दों से समझ सकते हैं वो समझें। हम बिकाऊ राजनेताओं के राजनैतिक समीकरणों के वेरिएबल्स नहीं हैं कि जब इच्छा हुई, जो मन में आया वो कर लिया। हमने आशा दिखाई कि आपके पास विज़न है, और आप 'विकसित भारत' के नाम पर एक जातिवादी समाज देश पर थोप रहे हो जहाँ प्रतिभा को आगे बढ़ने के लिए हर मार्ग पर आपने गड्ढे बना रखे हैं!
अतः, यह धर्म की लड़ाई है, समाज की लड़ाई है और देश की लड़ाई है। प्रतिभा को कूड़ेदान में रखने वाला राष्ट्र कभी भी विकसित नहीं हो सकता। ऐसे राष्ट्र में रेवड़ियाँ बाँटी जाती रहेंगी और वह अंततः वेनेजुएला बन जाएगा। इसलिए, समय रहते या तो हम इनसे तंत्र को ठीक करवाएँगे या अपने जीवन की परवाह किए बिना इस समर में कूदेंगे।
मैं नेता नहीं हूँ। मैं कुछ भी नहीं हूँ। मैं कल को रहूँ या ना रहूँ, यह विषय ही समाज का नेतृत्व करेगा। और जब समाज का हर व्यक्ति अपनी चिंता, अपने बच्चों से जोड़ कर करने लगेगा, तब सत्ता को भयाक्रांत होना चाहिए।
मेरी योजना ओपन-सोर्स है। मुझे किसी पुस्तक की आवश्यकता नहीं है। मैं छुप कर अचानक से कुछ नहीं करूँगा। मैं जो करूँगा, मैंने वह कई बार लिखा है और वही करता हूँ। मैं सचेत करने के प्रयास करता हूँ, मैं प्रॉपर चैनलों से आप तक बात भी पहुँचाता हूँ परंतु यदि तुम नहीं मानते, तो मेरा क्या दोष!
संसद में सामान्य वर्ग की बात करने वाला एक भी व्यक्ति क्यों नहीं है? OBC के क्रीमी लेयर और EWS की क्वालिफिकेशन में इतनी असमानताएँ क्यों हैं? सवर्णों के टैक्स के पैसे से SC/ST/OBC की योजनाएँ फाइनेंस होती रहेंगी और हमारे बच्चे लोन के लिए मरते रहें जो उन्हें मिलता नहीं?
उनके पिता ६०% के ब्याज दर पर पैसे ले कर उसे हर महीने भेजते रहें और तुम घनघोर अयोग्य लोगों को कोचिंग दो, फिर मेरिट में छूट दो, फिर वो क्लास में कुछ ना उखाड़ पाए तो आगे PG में फिर से छूट दो, फिर नौकरी में छूट, प्रमोशन में छूट... ये अनंत काल तक चलता रहेगा?
दिस हैज टू बी फकिंग स्टॉप्ड! एंड वी विल नोट कॉम्प्रोमाइज एन इंच नाउ!
श्री नेगोशिएशन प्रताप @JPNadda जी,
सादर चरणस्पर्श! अभी आपका यह पोस्ट प्राप्त हुआ और मन आह्लादित हो गया कि सरकार ने आदरणीय हर्ष भाई जी की चिट्ठी पर (जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं था) विचार किया और आप पुनः मिलेंगे। आपसे एक त्रुटि हो गई कि आपने आंदोलन के सबसे बड़े चेहरे श्री आनंद स्वरूप जी को साथ नहीं लिया!
आपने पहले तो (अपने ही द्वारा प्लांटेड) आदरणीय हर्ष भाई को किडनैप करवाया (जैसा कि आदरणीय हर्ष जी ने वीडियो में कहा था), और फिर नीली कलम से दो कौड़ी की डिमांड वाली चिट्ठी लिखवाई, और अब आप सौहार्दपूर्ण वार्ता भी कर रहे हैं।
यह पोस्ट पाते ही @RHAreforms वाले सारे लोग, इंक्लूडिंग @neha_laldas, लिखना छोड़ चुके हैं और उस चिट्ठी का प्रिंट आउट ले कर उत्तर प्रदेश के गाँवों में ड्रोन से गिरा रहे हैं कि सरकार ने हमारी माँगें मान ली!
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यदि सरकार को ऐसा कोई भी भ्रम है तो कोई टेबलेट खा लो। ये पुरानी और सर्वविदित तकनीक है: अपने ही द्वारा प्लांटेड व्यक्ति को नेता मान कर नेगोशिएट करने का स्वाँग रचो, फिर वास्तविक माँगों को डकार जाओ। मैं आपसे वादा करता हूँ कि मुझे आपके साथ बैठना नहीं पड़ेगा और आप हमारी माँगें भी मानोगे।
थोड़ी भी लज्जा बची है और पार्टी की थोड़ी भी चिंता है, तो खेल खेलना बंद करो। लोग ब्रजेश पाठक वाले स्टंट से ही हर्ष को नकार चुके हैं।
आदरणीय @JPNadda जी, ये है आपका 'सौहार्दपूर्ण' वातावरण? बालक कुछ बोलना चाह रहा है और आपने उसे किडनैप करके कमरे में बंद कर दिया!
नड्डा जी भी जानते हैं कि ब्रो जितना बोलेगा, उतना अपने धागे खोलेगा
News Leader के सवालों से भागता दिखा हर्ष दुबे
बताया जा रहा है कि हर्ष ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की है.
#NewsLeader | Harsh Dubey | Reservation Protest
भाजपा किसी एक को बरगला कर दबाव बना कर सवर्णों के साथ खेल कर रही है जो कि सफल नहीं होगा किसी भी क़ीमत पर
फूट डालो राज करो , सवर्णों का आंदोलन असफल करो
ये नहीं चलेगा साहब!!
21 अगस्त को जंतर मंतर पर हुए आंदोलन के उपरान्त पूर्व निर्धारित समय के अनुसार श्री हर्ष दुबे, श्री रण बहादुर सिंह चौहान व श्री मृत्युंजय पाठक, टीम के सदस्यों से सौहार्द पूर्ण वार्ता हुई। इस क्रम में हम शीघ्र ही फिर मिलेंगे।
गलत रिपोर्ट है, मैं नहीं मानता इसको, सवर्णों को छोड़ भी दो, तो भी 4 प्रतिशत को खुश करने के लिए कोई OBC वर्ग को क्यों नाराज़ करेगा?
SC/ST एक्ट मै मुकदमे OBC समाज पर सबसे ज्यादा हो रहे हैं।
और UGC अगर आया तो नुकसान क्या केवल सवर्णों का ही होगा? क्या OBC समाज इससे वंचित रहेगा?
सामान्य वर्ग के जनप्रतिनिधि लोग चुपरह कर जिस Levelकी वफादारी पेश कर रहें हैं अपने-अपने बॉस के प्रति;इसका अगर50%भी अपने निर्वाचितक्षेत्र की जनता-अपने वर्ग के प्रति वफादार रहे होते तो किसी पार्टी/बॉस के गुलाम नहीं होते,आज मुंह में जाबा नहीं लगाना पड़ता;जनता सदन भेजती चाहे निर्दल ही