"लव जिहाद एक ज़रूरी मुद्दा है। केरलम में ऐसे कई मामले हैं जहां अलग-अलग कम्युनिटी की औरतें लोगों के बहकावे में आकर सीरिया या अफ़गानिस्तान भेज दी जाती हैं। बदकिस्मती से, 'लव जिहाद' की कोई परिभाषा नहीं है..." : माननीय राजीव चंद्रशेखर जी
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*अगर अपने परिवार को बचाना है*
*तो खतम करो इन मुसलमानो को*
*वरना ये पूरे भारत को खा जायेंगे*
*टाइम बम है साले*
*ये पिशाच*
*मारकाट लूटपाट बलात्कार के अलावा*
*कुछ नही जानते*
हिमालय के करनाली प्रांत में स्थित पादुका स्थान प्राचीन तीर्थ स्थल है यहां मातासती कि पादुका पांच कोश १५ km के क्षेत्र में कई स्थान में गिरी है सभी शक्तिपीठ है इसलिए पंचकोशी के नाम से जाना जाता है यहां भगवान विष्णु का पादुका है
जय शिवशक्ति🙏
जय सियाराम 🙏
@gopal_gurumaita 🙏❤️
आदरणीय उपाध्याय जी सरकार के इसारे पर सुनियोजित हत्या किया गया है क्योंकि भरत तिवारी सवर्ण उसमें ब्राह्मण था और आम सर्व समाज के हितों व सरकार व उनके पलरू भ्रष्ट तंत्र के बिरुद्ध आवाज उठा रहा था!सावर्णो के खिलाफ यह सब केंद्र सरकार के इसारे पर हो रहा है सवर्णो के बिरुद्ध 👺👹👺👹👺
"उत्तर प्रदेश का चुनाव अब केवल आकर्षक नारों या राजनीतिक विज्ञापनों के भरोसे नहीं जीता जा सकता। यहाँ का मतदाता हालिया इतिहास की गहरी और व्यावहारिक समझ रखता है। राज्य के नागरिकों ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दिनों को भी देखा है और योगी आदित्यनाथ सरकार के पिछले नौ वर्षों के कड़े प्रशासनिक नियंत्रण व विकास को भी करीब से महसूस किया है। इन दोनों कार्यकालों की कार्यशैली और कानून-व्यवस्था के बीच इतना स्पष्ट और बड़ा अंतर है कि इसे किसी भी तरह की चुनावी रीब्रांडिंग या नैरेटिव से छुपाया नहीं जा सकता।
विपक्ष का 'पीडीए' फॉर्मूला या कोई भी नया गठबंधन शायद उन राज्यों में असरदार साबित हो सकता था जहाँ की जनता के पास अतीत की तुलना करने के लिए कोई ठोस संदर्भ बिंदु न हो। लेकिन यूपी में स्थिति बिल्कुल उलट है; यहाँ की जनता दोनों व्यवस्थाओं की सीधी गवाह रही है। जिन सामाजिक वर्गों को चुनावी अभियानों के जरिए साधने की कोशिश की जा रही है, वे किसी बाहरी विमर्श या सोशल मीडिया अभियानों से भ्रमित होने वाली आबादी नहीं हैं। उन्होंने सुरक्षा, व्यापारिक माहौल और नागरिक सुविधाओं के आधार पर बहुत पहले ही अपना वास्तविक मूल्यांकन पूरा कर लिया है।
आज यूपी के चौक-चौराहों पर जो माहौल है, वह इसी स्पष्ट जनमत की गवाही देता है। लोग खुद अतीत और वर्तमान की तुलना सबके सामने रख रहे हैं। विपक्ष का पूरा अभियान इस उम्मीद पर टिका नजर आता है कि जनता पुराने दौर की चुनौतियों को भूल जाएगी, लेकिन उत्तर प्रदेश के जागरूक मतदाताओं ने साफ संदेश दे दिया है कि वे अपने व्यक्तिगत अनुभवों को भूलने वाले नहीं हैं।
#SamajYadav_Party"
तेरी बातों में जो पहले सा अब वो अपनापन नहीं मिलता...
सुलगते दिल को मेरे अब कोई साया नहीं मिलता...
बदल जाता है मेरा हौसला मायूसी में पल भर में...
जब तेरी तरफ़ से कोई भी गर्मजोशी भरा जवाब नहीं मिलता...!!💔
🖤🖤🖤