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लगभग दो घंटे से हिरासत में लिए गए साथियों को बस में घुमाया जा रहा है—सिर्फ़ इस अपराध में कि हमने कहा था कि इस देश के सबसे बड़े अपराधी को सज़ा मिलनी चाहिए, जिसने गैरकानूनी तरीके से 10 करोड़ लोगों के वोट काटे।
वोट काटने वालों से सवाल पूछना अपराध है, तो यह अपराध हम बार-बार करेंगे।
इंकलाब ज़िंदाबाद।
#SIR #VoteChori #ElectionCommission
बस चालक को बताना चाहिये कि प्रधानमंत्री ने पेट्रोल डीज़ल बचाने की अपील की है। कहाँ कहाँ से लेकर जा रहे हैं ? लोकेशन शेयर करते रहिए। वोट चोरी के नाम पर डीज़ल चोरी न हो जाए।
वोट चोर गिरोह ने हरियाणा में वोटिंग के दिन बताया कि 61.19% पोलिंग हुई है
अगले दिन यानी 6 अक्टूबर को बताया कि 65.65% पोलिंग हुई
फिर 7 अक्टूबर को बताया कि 67.9% वोट पड़े और 8 को रिजल्ट आ गया
EVM बंद हो गई। सील करके रखवा दी कई। तो फिर दो दिन बाद, काउंटिंग से 12 घंटे पहले 2.25% वोट कहां से आ गए?
इन डकैतों ने हरियाणा में हर विधानसभा में औसतन 15,175 वोट बढ़ा दिए।
No progress has been made in indirect negotiations with the Trump regime. The region is heading toward escalation, as Persian Gulf dictatorships complicit in the war against Iran join Trump and Bessent's conspiracy against the Iranian people.
Never trust Axios or Aljazeera.
ERO Net का स्वरूप बदलकर ECI Net करने से हर डिजिटल एक्शन केंद्रीकृत हो गया. इसके बाद IT की प्रमुख सीमा खन्ना के सहयोग से ज्ञानेश कुमार ने जीते हुए लोगों के नाम डिलीट कर सरकार की पसंद के वोटर्स के पास वोटिंग राइट्स रहने दिया, बाक़ियों को हटाने की मुहिम शुरू कर दी!
इस ग़ैर क़ानूनी एक्शन के ख़िलाफ़ दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग अलग अपने लिखित विरोध initiate किए.
#ज्ञानेश_कुमार_वोट_चोर
वोट चोर ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए BSF, CRPF और दिल्ली पुलिस की फ़ौज खड़ी कर दी गई है!
एक तरफ़ वोट चोरी से नाराज़ देश की जनता है, तो दूसरी तरफ़ बौखलाई हुई सरकार... जो अपने 'वोट चोर अंपायर' को बचाने के लिए तमाम सरकारी तंत्र और सुरक्षा बलों को ढाल बनाकर खड़ी कर रही है!
लेकिन याद रखिए... सरकार चाहे कितनी भी बौखला जाए, जनता सब देख रही है!
इस देश की जनता सड़कों पर वोट चोरों के खिलाफ महाभियोग लगाएगी!
अब देश की हर गली, हर चौराहे पर 'जन-अदालत' लगेगी, जो इस तानाशाही का हिसाब मांगेगी और इंसाफ़ की नई इबारत लिखेगी! ✊
#JantarMantar | Election Commissioners | Gyanesh kumar | Yogendra Yadav
अपराधियों को पकड़ने की बजाय वोट चोरों को बचाने के लिए दिल्ली पुलिस ने हम सब को हिरासत में ले लिया है - दीपांकर भट्टाचार्य, अंजली भारद्वाज और नेहा बोरा सहित मुझे और अनेक युवा साथियों को दिल्ली कैंट के करीब कहीं ले जा रहे हैं, अभी बताया नहीं किस थाने में।
गद्दार ज्ञानेश के लिए
▪️असम वाला भारत रत्न माँग रहा है
▪️बंगाल वाला पद्म भूषण माँग रहा है
अरे भाई, BJP को चुनाव जितवाने का एहसान चुका रहे हैं सब भाजपाई लंगूर!
जानकार ये भी बताते हैं कि नौकरशाही के एक हिस्से का आत्मसम्मान अब प्रबल हो रहा है। बहुत से ऐसे हैं जो एक सीमा और समय से आगे झुकने को तैयार नहीं दिख रहे। स्थिति और कष्ट्रप्रद हो इससे पहले वे जाल को काटना चाहते हैं या फिर जाल के कटने के इंतज़ार में है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी की सुनवाई का निवारण चुनाव आयोग 2 घंटे में कर देता है, लेकिन शालीमार बाग में कोई सब्जी बेचने वाला हो तो उसे दिनभर लाइन में खड़ा रहना होगा, क्योंकि वो VIP नहीं है।
ये नरेंद्र मोदी का ‘नया भारत’ है।
हमने VIP दर्शन देखे, VIP लेन देखी, लेकिन कभी VIP मतदाता नहीं देखा था, पर ज्ञानेश कुमार ने हमें यह भी दिखा दिया।
नरेंद्र मोदी ने ज्ञानेश कुमार की ऐसी हालत कर दी है कि अब वो कहीं मुंह नहीं दिखा पा रहे हैं।
यही वजह है कि ज्ञानेश कुमार के प्रोग्राम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन वह प्रोग्राम ही कैंसिल कर दे रहे हैं।
: AICC मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद @Pawankhera जी
📍 दिल्ली
ज्ञानेश कुमार की बेटी मेघा रूपम को स्पेशल ट्रीटमेंट देना सीजेआई सूर्यकांत के गले की हड्डी बन गया है। बेशर्मी देखिए जिस रोज ज्ञानेश के घोटालों का सच इंडियन एक्सप्रेस ने छापा उसी रोज उनकी बेटी सुप्रीम कोर्ट की म्यूट कर दी गई सुनवाई में बच निकली। द लॉयर्स एसोसिएशन ऑफ कंस्टीट्यूशन ने इसको लेकर सीजेआई को चिट्ठी लिखी है।चिट्ठी में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि
"सुप्रीम कोर्ट में बैठे न्यायाधीशों की प्रचलित रोस्टर व्यवस्था के अनुसार यह मामला स्पष्ट रूप से उस न्यायालय के समक्ष नहीं आता जिसमें इसे सूचीबद्ध किया गया। ऐसा प्रतीत होता है कि मामले को विशेष रूप से एक विशेष पीठ को सौंपा गया।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि याचिकाकर्ता, जो एक लोक सेवक हैं, भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त की पुत्री भी हैं। मामले का अनियमित/आउट-ऑफ-टर्न सूचीबद्ध होना विशेष व्यवहार का संकेत देता है और गलत मिसाल कायम करता है।
न्यायालय में सुनवाई सार्वजनिक होती है। यह विशेष रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा के माध्यम से संभव होता है, जो वकीलों, पत्रकारों और आम मुकदमेबाजों के लिए उपलब्ध है।
एक ऐसे मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा का म्यूट किया जाना, जो मीडिया और जनता के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मजदूरों के समर्थन में प्रदर्शन में भाग लेने वाले छात्रों की एनएसए के अंतर्गत गिरफ्तारी से संबंधित है, चिंता का विषय है।
ईरान में जंग चल रही है, वह पाँचवे नम्बर पर है।
हांगकांग सातवें स्थान पर है, नार्थ कोरिया नौवें नम्बर पर है। कुवैत, क़तर, ताजिकिस्तान सब हमसे ऊपर हैं।
हमारी टीम 13 वें स्थान पर है।
और दावा विश्वगुरु होने का है!
कमाल है
ज्ञानेश कुमार की बेटी मेघा रूपम को स्पेशल ट्रीटमेंट देना सीजेआई सूर्यकांत के गले की हड्डी बन गया है। बेशर्मी देखिए जिस रोज ज्ञानेश के घोटालों का सच इंडियन एक्सप्रेस ने छापा उसी रोज उनकी बेटी सुप्रीम कोर्ट की म्यूट कर दी गई सुनवाई में बच निकली। द लॉयर्स एसोसिएशन ऑफ कंस्टीट्यूशन ने इसको लेकर सीजेआई को चिट्ठी लिखी है।चिट्ठी में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि
"सुप्रीम कोर्ट में बैठे न्यायाधीशों की प्रचलित रोस्टर व्यवस्था के अनुसार यह मामला स्पष्ट रूप से उस न्यायालय के समक्ष नहीं आता जिसमें इसे सूचीबद्ध किया गया। ऐसा प्रतीत होता है कि मामले को विशेष रूप से एक विशेष पीठ को सौंपा गया।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि याचिकाकर्ता, जो एक लोक सेवक हैं, भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त की पुत्री भी हैं। मामले का अनियमित/आउट-ऑफ-टर्न सूचीबद्ध होना विशेष व्यवहार का संकेत देता है और गलत मिसाल कायम करता है।
न्यायालय में सुनवाई सार्वजनिक होती है। यह विशेष रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा के माध्यम से संभव होता है, जो वकीलों, पत्रकारों और आम मुकदमेबाजों के लिए उपलब्ध है।
एक ऐसे मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा का म्यूट किया जाना, जो मीडिया और जनता के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मजदूरों के समर्थन में प्रदर्शन में भाग लेने वाले छात्रों की एनएसए के अंतर्गत गिरफ्तारी से संबंधित है, चिंता का विषय है।
Lawyers’ Association for Constitution writes to CJI Surya Kant raising concerns over the “out-of-turn” listing of a plea arising from strictures against the Noida District Magistrate and the muting of live proceedings during its hearing
The letter flags that the petitioner, a public servant, is the daughter of the Chief Election Commissioner of India and alleges that the matter was specially assigned to a particular Bench despite the prevailing roster
@MedhaRoopam #SupremeCourt