नैनीताल के अशोक पांडे जी की एक साथ तीन किताबें आई हैं। इन्हें पढ़ना चाहिए। जो पहाड़ में रहते हैं या पहाड़ छोड़कर चले गए दोनों को ये किताबें अच्छी लगेंगी। लपूझन्ना, बब्बन कार्बोनेट और तारीख में औरत।
अगर हाल में पहाड़ से जुड़ी कोई किताब पढ़ी है तो उसकी जानकारी हमसे साझा करें!
बागेश्वर के पास ‘छाना बिलौरी’ गांव की दास्तां लाखों करोड़ों लोगों के दिल पिघलाने वाली है। इस साल की गणतंत्र दिवस के समापन समारोह यानी बीटिंग रिट्रीट के मौके पर पहाड़ के पसंदीदा गीत छाना बिलौरी की है... विजय चौक पर ‘छाना बिलौरी’
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पहाड़ी हल्दी उगाने वाले किसानों को @TheSlowMovement से जोड़ें। हम उनकी आमदनी बढ़ाने की पूरी कोशिश करेंगे। साथ साथ किसान की प्रतिष्ठा और स्वाभिमान बढ़ाने की भी कोशिश करेंगे। मेल करें: slowbazaar @turnslow.com
पहाड़ कनेक्शन द स्लो मूवमेंट का हिस्सा है।
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नैनीताल के बैंड हाउस में गर्मियों में हर शाम कैप्टेन रामसिंह का बैंड तराने छेड़ता।“कदम कदम बढ़ाए जा खुशी के गीत गाये जा” रोज़ ज़रूर बजता था।
बड़े हुए तब पता चला कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कैप्टेन रामसिंह ठाकुरी से इस गीत की रचना करवाई। ये आज़ाद हिन्द फौज का ��मर गान बन गया।
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@pahaadconnect धूप निकल चुकी है, आने वाली वर्षा के बादलों के साथ। ये हल्की धूप हमारे पहाडों में आशा की किरण का काम क���ती है। इसलिए हम पहाड़ी कभी न तो निराश होते और न ही कभी हार मानते। 🌸
सात दिन हो गए। दिल्ली म��ं सुबह धूप नहीं आयी। खिड़की के बाहर सिर्फ धुएं और गर्दे में लिपटा कोहरा है। कंपकपाने वाली ठंड है। सुबह की सैर बंद हो चुकी है। धूप का इंतज़ार करते करते शाम आ जाती है। ये कब तक चलेगा पता नहीं। पहाड़ में धूप आई? आज की तस्वीरें भेजिए!
धन्यवाद अनुलता जी! आपकी लिखी कहानियाँ इतनी मशहूर हैं, कभी पहाड़ और बुरान्श पर भी कुछ लिखिएगा — क्यूँकि हम स�� के दिल ��ें थोड़ा सा पहाड़ रहता है :-) @AnulataRajNair @TheSlowMovement @neeleshmisra
बुरांश खिलने ही वाले हैं।
कई विद्वान कह रहे हैं कि बीमारी अपने आख़िरी मुकाम पर है। कोरोना का चरम नज़दीक है। फिर बीमारी अपने ढलान पर होगी।अनहोनी की आशंकाओं से घिरे दिन रात, बंदिश��ं की सलाखें और साँसों की घुटन को धीरे धीरे दुनिया भूल जाएगी।
बस कुछ दिन और। बुरांश खिलने ही वाले हैं।
बुरांश खिलने ही वाले हैं।
कई विद्वान कह रहे हैं कि बीमारी अपने आख़िरी मुकाम पर है। कोरोना का चरम नज़दीक है। फिर बीमारी अपने ढलान पर होगी।अनहोनी की आशंकाओं से घिरे दिन रात, बंदिशों की सलाखें और साँसों की घुटन को धीरे धीरे दुनिया भूल जाएगी।
बस कुछ दिन और। बुरांश खिलने ही वाले हैं।
If in Dehradun, here is the @DehradunCycling Club to help you explore and remain fit.
We wonder if any other town in Pahaad has a simile cycling club ��
@TheSlowMovement
थोड़ा फसक, थोड़ा सौल-कठौल, थोड़ी बड़े-बूढ़ों की याद, थोड़ा दिलों का गुबार और बहुत सा���ा प्यार।
दिल्ली से देहरादून बहुत नजदीक होने वाला है लेकिन गांव का वो नौला, वो धार, वो गधेरे, वो गाढ़ सब बहुत दूर हैं। उन्हें पास लाना है।
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Oh #PahaadConnection would love to collaborate with, learn from, and try and give more strength to everyone working for positive impact in Pahaad!
So many people and organisations are doing amazing work. The idea is to create an ecosystem that helps as many people as possible.