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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद #महेन्द्र#भट्ट बोले #उत्तराखण्ड सरकार पर पितृों का आशीर्वाद, श्राद्ध पक्ष समाप्त होने के बाद होगा #कैबिनेट#विस्तार। वैसे नवरात्रि परसों 22 सितम्बर से ही शुरू हो रही है अब भगवान जाने उत्तराखण्ड सरकार का पितृपक्ष कितना लम्बा चलता होगा?
भयावह मंजर आंखों के सामने शारदा नदी में गिरा मकान, युवती ने भागकर बचाई जान
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा ये वीडियो #उत्तर#प्रदेश के #लखीमपुर#खीरी का है जहां लखीमपुर खीरी के #निघासन तहसील क्षेत्र के ग्रंट 12 गांव में शुक्रवार को एक युवती बाल-बाल बची। #UttarPradesh#LakhimpurKheri
गढ़वाल सांसद #अनिल#बलूनी के सामने देवप्रयाग डिग्री कॉलेज के पास टूटा पहाड़ का बड़ा हिस्सा... बाल बाल बचे सांसद
पौड़ी लोकसभा सांसद और बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी तथा #देवप्रयाग#विधायक#विनोद#कंडारी मौके पर रहे मौजूद।
#Landslide
जान हथेली में रखकर नदी को पार करते ग्रामीण,
#उत्तरकाशी जिले के #मोरी तहसील के अंतर्गत आने वाले ओसला, पवाणी, गंगाड़, डाटमीर हरकीदून बैली के ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी के ऊपर से सफर करने को मजबूर है
आइए नन्ही परी कशिश के साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करें। #justiceforkashish सड़क से सोशल मीडिया तक जोश कम नहीं होना चाहिए। वैसे भी युवाओं और सोशल मीडिया में बहुत ताकत है इसका सबसे बड़ा उदाहरण नेपाल है। आप सभी की पोस्ट हैशटैग #justiceforkashish पर होनी चाहिए।
तभी कहा था शायद पाताल लोक से दैत्य आए होंगे मासूम कशिश के साथ दरिंदगी और हत्या करने। नवम्बर 2014 में उस वक्त जो उबाल कुमाऊं की सड़कों पर दिखा था आज एक बार फिर मासूम बच्ची को न्याय दिलाने के लिए उसी उबाल की जरूरत है। वैसे सच तो यही है कि समय के साथ हम सबकुछ भूल जाते हैं...
और जबाब खुद हमें भी देना चाहिए कि क्या यही न्याय है????
अगर यही न्याय है तो थू है ऐसी न्याय व्यवस्था पर
जरा सोचिए क्या बीत रही होगी मासूम कशिश के परिजनों पर जब उन्हें पता चला होगा कि उनकी बेटी का हत्यारा तो दोषी ही नहीं पाया गया???
या तो कार्यपालिका, न्याय पालिका अपराध रोकने की जिम्मेदारी जनता के हाथों में दे दें। पुलिस प्रशासन को बर्खास्त किया जाए आन द स्पॉट न्याय हों। 11 साल बाद फैसला आता है वो भी ऐसा । जवाब हल्द्वानी पुलिस को भी देना चाहिए। जबाव उत्तराखण्ड सरकार को देना चाहिए
जबाव देना होगा हमें। हमारे शासन प्रशासन को और न्यायाधीश की कुर्सी पर विराजमान माननीय जज महोदय को। कानून अंधा है यह तो बचपन से सुनते आए थे आज देख भी लिया... ऐसे में आरोपियों के होंसले बुलंद नहीं होंगे तो क्या होंगे?